प्रशासन के सितारे : श्री युद्धवीर टंडन जी (राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2022 से सम्मानित)

आइये मिलते हैं, युद्धवीर टंडन जी से जोकि जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं तथा एक शिक्षक के रूप में गतिविधि पूर्ण शिक्षा से विभिन्न विषयों को बहुत सरलता से पढ़ाते हैं। इसी के साथ आई.सी.टी. और घर-घर पाठशाला पोर्टल के स्कूल समन्वयक हैं। राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन सदस्य के रूप में अपने इन्ही महत्वपूर्ण योगदानों को लेकर अपने सेवा कार्यकाल के महज 6 वर्षों की अवधि में “राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2022” से नवाज़ा गया है।   

सवाल: आप अभी किस विभाग में तथा किस पद पर काम कर रहे हैं? आपका मुख्य कार्य क्या है?  

जवाब: मैं प्रारम्भिक शिक्षा विभाग में कनिष्ठ बुनियादी अध्यापक (JBT) के पद पर 6 वर्षों से कार्यरत हूँ। मैं अपने कार्यो को अगर उल्लेख करूँ तो प्राइमरी टीचर के रूप में (multitasking) बहु-कार्यण मेरे कार्यों का प्रमुख हिस्सा हैं। हमें विषय विशेषज्ञ के रूप में कार्य करना होता है, जैसे कि गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, पर्यावरण और योग शिक्षा आदि इन सभी विषयों का पठन-पाठन का दायित्व हम पर है। इस दौरान हमें बहुकक्षीय शिक्षण भी करना होता है। जहाँ पर मैं अभी नियुक्त हूँ, जहाँ मुझे स्कूल मुख्याध्यापक से सम्बन्धित प्रशासनिक एवं शैक्षणिक गतिविधियाँ, प्रबन्धन, अध्यापक नेतृत्व व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से सम्बन्धित सभी गतिविधियों के लिए स्वयं ही कार्य करना होता है।

सवाल: आपका अभी तक के सफर में सरकार के साथ जुड़कर काम करने का अनुभव कैसा रहा है?  जवाब: मैं बताना चाहूँगा कि शिक्षा विभाग के साथ जुड़कर 6 वर्ष हो चुके हैं। इन वर्षों में विभाग के साथ कार्य करने के अनुभव बेहतरीन रहा है। बहुत अच्छे अवसर मिले, और कहीं न कही अवसरों को बनाने के लिए बहुत परिश्रम भी किया है, जैसे कि कोविड काल में विभाग की ओर से वीडियों कंटेट निर्माण का दायित्व सौपा गया था। आरम्भ में अध्यापकों को यह मालुम नहीं था कि किस प्रकार से वीडियो निर्माण का कार्य करना है। विभाग ने भी अपने स्तर से वीडियो निर्माण को लेकर प्रशिक्षण दिया व मैंने स्वयं से रूचि लेते हुए आनलाईन कंटेंट वीडियो सीखने का प्रयास किया। मैंने उस पर कार्य करना शुरू किया तथा धीरे-धीरे विभाग द्वारा वीडियो स्क्रीनिंग और काफी गुणवता चेक्स के बाद वीडियो को अपलोड किया जाने लगा। मैं अपने आप को बेहद सौभाग्यशाली मनाता हूँ कि मेरे कार्यो के लिए विभाग ने मुझे सराहा तथा यही प्रेरणा मेरे कार्य को और निखार कर प्रस्तुत करने में मददगार साबित हुई। मैं यह मानता हूँ समस्या तो सभी अच्छे से जानते हैं लेकिन वर्तमान समय समाधान पर कार्य करने का है।

सवाल: करियर में अभी तक की क्या बड़ी सफलताएं रहीं हैं? क्या आप एक या दो के बारे में बता सकते हैं?  

जवाब: मुझे अपनी पहली नियुक्ति 2016 मिली तथा जिस स्कूल में मेरी नियुक्ति हुई, वहां पर बच्चों का नामाकंन बहुत कम था। मैंने इस पर स्कूल प्रबन्धन समिति और ग्रामीणों के समक्ष मुद्दा रखा और उनके साथ चिन्तन शुरू किया। अभिभावकों के साथ बैठक करना शुरू किया। जिसका परिणाम यह हुआ कि 5 गुना नामांकन में वृद्धि हुई। इन्ही प्रयासों के लिए  2017 में विभाग से “ख़ास शिक्षा पुरस्कार” का सम्मान हासिल हुआ। 2018 में  “राष्ट्रीय संसाधन प्रतियोगिता” में पुरे देशभर में स्कूल ने शीर्ष तीन में स्थान बनाया। शिक्षा में नवाचारों और गतिविधि आधारित शिक्षा को सुदढ़ करने की पहल के लिए सेवा कार्यकाल के ढाई वर्ष की अवधि में “राज्य शिक्षा अवार्ड-2019” का सम्मान हासिल हुआ। स्कूल प्रबन्धन समिति को बेहतर प्रबंधन के लिए पिछले 2 वर्षों से लगातार ब्लॉक में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद जिला स्तर पर “उत्कृष्ट विद्यालय प्रबन्धन समिति अवार्ड” के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। स्मार्ट शिक्षा को बढ़ावा देने व मेरे प्रयासों के लिए मुझे विभाग ने सम्मानित किया। इसी के फलस्वरूप  मैंने अपने स्कूल को स्मार्ट स्कूल बनाने का सपना देखा था जो पूरा हुआ। स्कूल को समग्र शिक्षा से 20,000 हजार रूपये का अनुदान स्कूल को मिला है, और मेरे स्कूल को मॉडल स्कूल का दर्जा मिला। इसी के साथ मैं नई शिक्षा नीति के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने में स्टेट रिसोर्स ग्रुप का हिस्सा भी हूँ। इस वर्ष मुझे देश के सबसे बड़े सम्मान “राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड 2022” से पुरस्कृत होने का गौरव प्राप्त हुआ।

सवाल: इन सफलताओं के रास्ते में क्या कुछ अनोखी मुश्किलें या परिस्थितियां सामने आयीं? इनका समाधान कैसे हुआ ? क्या आप अपने अनुभवों से इसके उदाहरण दे सकते हैं? 

जवाब: मैं यह मानता हूँ, समस्या अगर है तो उसका समाधान उसके इर्द-गिर्द ही होता है। मैं एक उदाहरण से समझाना चाहूँगा मैं जब इस स्कूल में आया था उस समय स्कूल का भवन जर्जर स्थिति में ही था, जिसकी वजह से शिक्षा का माहौल बच्चों में बना पाना कठिन सा प्रतीत हो रहा था। सर्वप्रथम एस.एम.सी. और खुद के प्रयासों से स्कूल के लिए विभाग से हमने अनुदान का अनुमोदन किया। एप्रूवल मिलने के पश्चात स्वीकृत बजट का सदुपयोग करते हुए स्कूल भवन को  सुंदर बनाने का योजना रखी गई, जिसमें  समुदाय का आर्थिक और श्रमिक के रूप में भरपूर  सहयोग प्राप्त हुआ। इन्ही  प्रयासों  से स्कूल को आर्दश भवन बनाने की कल्पना साकार हुई।  दूसरा, मैंने बच्चों के साथ होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों को अभिभावकों तक पहुँचाने में सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक टूल के रूप करना शुरू किया। स्कूल में बच्चों के साथ की जाने वाली सभी शैक्षणिक गतिविधियों को अपलोड किया जाने लगा।  इसका सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि समुदाय एवं अभिभावकों में एक विश्वास होने लगा कि यह स्कूल सचमुच बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर है, एवं अध्यापक भी शिक्षा देने के प्रति कर्तव्यपरायण हैं, जिसका प्रभाव यह हुआ कि स्कूल में बच्चों के नामांकन में आशानुरूप वृद्धि हुई।       

सवाल: बेहतर शासन और सेवा वितरण में आप अपना योगदान किस प्रकार देखते हैं? 

जवाब: मैं यह मानता हूँ, अध्यापक समाज के लिए रोल मॉडल है तथा कहीं न कहीं शिक्षक को समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हुए लक्ष्यों का निर्धारण करना आवश्यक है। सरकारी शिक्षक होने के नाते हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि शिक्षा में सुधार को लेकर छोटे छोटे प्रयास स्वयं करते रहें, मैं स्वयं इसका पालन करता हूँ। इन प्रयासों में गतिविधि आधारित शिक्षा, स्मार्टस्कूल शिक्षा को विकसित करना, पाठ्यकम सुधार प्रशिक्षण आदि शामिल हो सकते हैं तथा कहीं न कहीं ये प्रयास ही नीति निर्माण में सहायक होंगे। मैं यह समझता हूँ कि अध्यापक शिक्षा को उच्चतम पायदान में लाने की दिशा में अपना हर सम्भव योगदान दे सकते हैं। इसलिए मेरा मानना है की समाज को बेहतर दिशा देने में अध्यापकों का बहुत बड़ा रोल है।

सवाल: अपने काम के किस पहलू से आपको ख़ुशी मिलती है?     

जवाब: मुझे बच्चों के साथ पठन-पाठन का कार्य बहुत रूचिपूर्ण लगता है। इसके अलावा गतिविधि आधारित शिक्षा जहाँ पर बच्चों को मानसिक और बौद्धिक रूप उन्हें समझने का मौका मिलता है। मैं यह समझता हूँ कि अध्यापक के लिए सबसे बड़ी ख़ुशी उसका समाज और शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को अच्छे नागरिक बनाने से होती है। हमें जब इस बात का पता चलता है कि हमने अच्छे नागरिकों का निर्माण किया है, तो यह अनुभूति अपने आप में आत्मसंतुष्ट करने वाले होती  है। हमारे द्वारा किए कार्यों का लाभ जब अपने स्कूल के बच्चों के साथ-साथ जिला व प्रदेश के बच्चों को भी मिलता है तो यह भी हमारे काफी सुखदायक अनुभव होता है।

सवाल: i) अच्छे अधिकारी के 3 ज़रूरी  गुण 

जवाब: मैं यह समझता हूँ कि अधिकारी में कुछ गुणों का होना आवश्यक है, जैसे कि 1)  अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति सम्मान का भाव 2) कार्य के प्रति निष्ठा और लग्न  3) लक्ष्यों को हासिल करने के प्रति दृढसंकल्प शक्ति ।   

ii) काम से सम्बंधित वह ज़िम्मेदारी जिसमे सबसे ज़्यादा मज़ा आता हो।

जवाब: मुझे अपने कार्यो में बच्चों के साथ शैक्षणिक व सह शैक्षणिक गतिविधियाँ करवाना, अध्यापकों के साथ शैक्षणिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना रुचिकर लगता है।    

iii) अपने क्षेत्र में कोई ऐसा काम जो आप करना चाहते हो, मगर संरचनात्मक या संसाधन की सीमाएँ आपको रोक देती हैं-

जवाब:  मैं यह समझता हूँ, प्रारम्भिक शिक्षा में विषयवार अध्यापक का होना अनिवार्य किया जाना चाहिए। अगर ऐसा हो जाए तो सकारात्मक रूप से शिक्षा का परिदृश्य ही बदल जाएगा।     

iii) कोई ऐसे बातें जोकि आपको लगता है कि होनी चाहिए ?

जवाब: आज के आधुनिक युग में गतिविधि आधारित शिक्षा कागज़ों में सिमट के रह गई है। इसका एक बड़ा कारण समय और इच्छा शक्ति का अभाव है जबकि कहीं न कहीं एक बड़ा वर्ग गतिविधि आधारित शिक्षा और पाठ्क्रम आधारित लर्निंग को अलग-अलग मानते हैं। हालांकि यह एक ही है और इस बात को समझना बेहद आवश्यक है, तभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।