सार्वजनिक वित्त


आप इस हिस्से में क्या बताना चाहते  हैं?
भारत में सार्वजनिक वित्त का परिचय 
  • भारत में सरकार का पैसा कैसे खर्च होता है?
  • वित्तीय असंतुलन क्या है?
 वित्तीय विकेन्द्रीकरण 
  • वित्तीय विकेन्द्रीकरण क्या है?
  • भारत में वित्तीय विकेन्द्रीकरण किस प्रकार लाया जाता है?
भारत में वित्त पोषण
  • वित्त पोषण के प्रकार 
  • केंद्र प्रायोजित योजना 
सार्वजनिक वित्त की जटिलताएं
  • सार्वजनिक वित्त की जटिलताएं 
  • जटिलताएं सेवाओं पर कैसे असर करती हैं?
लर्निंग आउटकम
  • भारत में किस तरह से पैसा केंद्र से लेकर स्थानीय स्तर तक प्रवाहित होता है तथा उसमें किस तरह की व्यवस्था बनी हुई है|   
  • भारत में कर किस प्रकार इकट्ठा होता है और फिर उसको कैसे खर्च किया जाता है| वे जान पाएंगे कि भारत में पैसा, केंद्र से राज्य और राज्य से स्थानीय स्तर पर कैसे पहुँचता है तथा उसे खर्च करने की शक्ति किसके पास है। 
  • वित्त पोषण के ढांचे को देखकर मालूम  चलता है कि पैसा बहुत सारे अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त होता है|
  • प्रशासनिक व्यवस्था की तरह भारत का वित्त पोषण ढांचा भी बहुत जटिल है जिसकी वजह से पैसा समय पर नीचे नहीं पहुँच पाता|

समय: 60 / 20 मिनट

तरीका :लेक्चर, हम और हमारी सरकार टीम का वीडियो, अन्य वीडियो

भारत में सार्वजनिक वित्त का परिचय
  • भारत में सरकार का पैसा कैसे खर्च होता है?
  • वित्तीय असंतुलन क्या है
 वित्तीय विकेन्द्रीकरण 
  • वित्तीय विकेन्द्रीकरण क्या है
  • भारत में वित्तीय विकेन्द्रीकरण किस प्रकार लाया जाता है

ऊपर लिखे गए विषय पढ़ाने के लिए आप हमारी टीम द्वारा रिकार्डेड वीडियो चला सकते हैं। यह ध्यान रखना होगा कि शायद प्रतिभागियों के कोई सवाल हो तो आपको अपनी तैयारी  भी पक्की रखनी होगी।

अगर आपका सेशन यहाँ ख़तम हो रहा है तो प्रतिभागियों से कहें कि कुछ इस प्रकार पैसा भारत में केंद्र से होकर ज़मीनी स्तर तक पहुँचता है और इसको समझना क्यों ज़रूरी है।  अगर  आप लम्बा सेशन कर  रहे हैं , तो अगले हिस्से पे जाएँ। 

भारत में वित्त पोषण 
  • वित्त पोषण के प्रकार
  • केंद्र प्रायोजित योजना

यह वीडियो चलाने के बाद आपको अपने प्रतिभागियों को कुछ मिनटों का समय देना चाहिए जिससे वह आपस में वीडियो में सीखी गयी जानकारी को समूह में चर्चा कर सकें। शायद उनके कुछ सवाल भी होंगे, जिन्हे आपको पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपनी तरफ से तैयारी कर के जाएँ। 

फिर आप बताईये कि अभी तक हमने जाना कि केंद्र सरकार राज्य और स्थानीय सरकारों तक पैसा भेजती है। अब आप बताएँगे कि यह भी दो प्रकार के होते हैं। शर्त और बिना शर्त के हस्तांतरण। जैसा कि इनके नाम से ही पता चलता है, शर्त सहित हस्तांतरण में पैसे के साथ कोई शर्त लगी होती है , कि यह पैसा इस काम पर ही खर्च किया जा सकता है , जैसे स्कूलों को मरम्मत करने के लिए पैसा मिलता है और वह उसे इसके अलावा किसी और काम में नहीं लगाया जा सकता है . वहीँ दूसरी ओर कुछ हिस्सा खुला पैसा  मिलता है जिसे ज़रुरत अनुसार किसी भी काम में लगाया जाता है जैसे वित्त आयोग का पैसा जो जो कायदे से राज्य और स्थानीय सरकारों को अपनी ज़रुरत और मर्ज़ी अनुसार खर्च कर पाना चाहिए।  

शर्त सहित हस्तांतरण का एक मुख्य तरीका केंद्र प्रायोजित योजनाएं  है। यह ऐसी योजनाएं है जो केंद्र और राज्य सरकार मिल कर चलाते हैं और दोनों इसमें कुछ हिस्से का पैसा डालते हैं जैसे समग्र शिक्षा, स्वच्छ भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आई.सी.डी.इस आदि . यह शर्त सहित पैसा इसलिए है क्योंकि यह जिस भी योजना के नाम पे आया है, सिर्फ उसपर ही खर्च किया जा सकता है। 

सार्वजनिक वित्त की जटिलताएं 

इसमें आप AI का हिंदी पैसा वीडियो दिखाएं। यह वीडियो आपको पहले से निकाल कर या डाउनलोड करके रखना चाहिए, यह वीडियो अभी तक सीखी चीज़ों को फिर से उनके सामने लाने में मदद करेगा . यह भी सामने आएगा कि पैसे के प्रवाह में कई सारी जटिलताएं भी सामने आती हैं। पैसे का प्रवाह इतने सारे रास्तों से होकर आता है और इसमें क्या मुश्किलें आती हैं यह आप जटिलताओं पर बनी एक स्लाइड के माध्यम से दिखा सकते हैं। स्लाइड में  विस्तार में जाना  उतना ज़रूरी नहीं है जितना यह दिखाना की सच में यह सिस्टम कितना मुश्किल बना हुआ है। 

यहाँ  कह सकते हैं कि टेक्नोलॉजी के आने से इनमे से कुछ जटिलताओं को को  सुलझाने की कोशिश की  जा  रही  है जैसे कि  डी.बी.टी के माध्यम से लेकिन इसका कुछ हद तक ही फर्क पड़ा है और अभी काफी दूरी तय करनी बाकी है। 

जटिलताएं सेवाओं पर कैसे असर करती हैं?

यह मुश्किलें किस तरह से सेवाओं पर असर करती हैं यह समझने के लिए अब आप AI के काम में से कुछ उदाहरण दे सकते हैं। 

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत विलेज हेल्थ एक्शन प्लान (VHAP) जिससे स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य प्लानिंग।  इसको समझने के लिए हमारी टीम ब्लॉक लेवल पर प्रोग्राम मैनेजर से मिली जहां यह पता चला कि स्थानीय लेवल से आये प्लान का कुछ ख़ास नहीं होता है और ब्लॉक लेवल पर वह बस पिछले साल से 10 % ज़्यादा बजट बना कर आगे भेज देते हैं। जिला स्तर पर भी यह ही देखने को मिलता है जहाँ 10 % बढ़ाकर  बजट भेजा जाता है। कोई नई योजना आती है तो सारे अधिकारी उसमे लग जाते हैं और प्लान के मुताबिक़ काम नहीं हो पाता है। 

अगली स्लाइड में आप देख सकते हैं कि राज्य सरकारों को राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी तक पैसा भेजने में कितनी देरी होती है  और पैसा पहुंचने में कितने दिन लगते हैं. यह बात ज़रूर बताएं कि अगर पैसे इतनी देर में आएंगे तो विभाग प्लानिंग के अनुसार अपना काम कैसे करेगा। 

सरकारों को कई बार मांगे गए पैसे से काम प्राप्त होता है और उसमे से भी राज्य सरकारें कई बार पूरा पैसा खर्च नहीं कर पाती हैं। अगली स्लाइड में देखें कि बिहार ने लगातार कई सालों तक NHM के पैसे में  से सिर्फ कुछ ही हिस्सा खर्च कर पाएं। 

हमने यह  कोर्स बनाते समय उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल किया है। आप जब भी यह कोर्स करें तो कोशिश करें कि नए से नए आंकड़ों को सामने लाएं (जहाँ तक हो सके)  हमारी वेबसाइट पर हम नयी जानकारी डालते रहते हैं। 

ऐसे कुछ और समस्याएं आती है जैसे पैसा देर से आना, शर्तों के साथ आना, सीमित पैसा आना, यह ना पता होना कि कब और कितना पैसा आएगा। आपको यहाँ सार्वजनिक वित्त का हिस्सा ख़तम करना होगा। प्रतिभागियों को यह समझाना होगा कि अगर पैसे की व्यवस्था मुश्किल है तो उसका असर तो सीधे हम तक मिलने वाली सेवाओं पर होता है। 

 

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