नागरिक भागीदारी और सामाजिक जवाबदेही


आप इस हिस्से में क्या बताना चाहते  हैं?
नागरिक भागीदारी 
  • नागरिक भागीदारी क्यों ज़रूरी है?
  • सक्रिय नागरिक कौन है?
  • नागरिक अपनी भागीदारी किस तरह से निभा सकते हैं?
  • नागरिक भागीदारी में क्या समस्या है ?
सामाजिक जवाबदेही 
  • जवाबदेही क्या है?
  • सरकार से जवाबदेही माँगने के क्या दो तरीके हैं?
  • सामाजिक जवाबदेही क्या है?
सामाजिक जवाबदेही के उपकरण
  • सामाजिक जवाबदेही के उपकरण 
  • सैंडविच स्ट्रेटेजी क्या है ?  
लर्निंग आउटकम
  • प्रतिभागी समझ पायेंगे की एक सक्रिय नागरिक होने की आवश्यकता क्यों है| प्रतिभागी समझ पायेंगे की एक सक्रीय नागरिक अपनी भागीदारी कहाँ और कैसे निभा सकता है| 
  • प्रतिभागी समझ पायेंगे  कि भागीदारी निभाना भी इतना आसान नहीं होता, उसमें भी कई तरह की मुश्किलें आती हैं|
  • प्रतिभागी समझ पायेंगे कि जवाबदेही क्या होती है  तथा सामाजिक भागीदारी निभाना ज़रूरी क्यों होता है| 
  • प्रतिभागी समझ पायेंगे कि सामाजिक जवाबदेही के लिए जो अलग अलग उपकरण हैं वे किस तरह से इस्तेमाल किये जाते है|

समय: 120/ 90/ 60 mins

तरीका : लेक्चर, चर्चा, गतिविधि, हम और हमारी सरकार टीम का वीडियो

लोकतंत्र क्या है और नागरिक भागीदारी क्यों ज़रूरी है? 

यहाँ आप तीसरा और आखरी मॉड्यूल शुरू कर रहे हैं। अभी तक सरकार की व्यवस्था की बात करी और देखा कि उसमे कई तरह की जटिलताएं हैं। यह भी देखा कि इनका सेवाओं पर असर कैसे पड़ता है। आप अपने ग्रुप से पूछें कि लेकिन क्या सिर्फ सरकार  की  भूमिका है बेहतर शासन बनाने में? सेवा वितरण को और बेहतर बनाने के लिए कुछ कदम हैं जो सरकार उठा सकती है और कुछ कदम हैं जो जनता ले सकती है | इसलिए इस मोड्यूल में हम आपको बताएँगे की आप एक जनता के तौर पर बेहतर सेवाओं को पाने के लिए सरकार के साथ किस प्रकार रिश्ता जोड़ सकते हो |

इसके बाद अगर समय हो तो आप लोकतंत्र और लोगों की भागीदारी पर एक छोटी चर्चा कर सकते हैं। लोगों से पूछें कि वह क्या समझते हैं लोकतंत्र के बारे में, और लोगों की भागीदारी के बारे में। 

सक्रीय नागरिक कौन है? 

अब आप बात करेंगे सक्रीय नागरिक की।  सक्रीय नागरिक कौन है? वह कौन है जो ज़िम्मेदारी से अपनी भागीदारी निभाता है। तो यह नागरिक कैसा होता है? आप सक्रीय नागरिक के उस गुण के बारे में बताएँगे जो उनको दूसरों से अलग करते हैं। 

यहाँ आप 3 अलग-अलग तरह के नागरिकों के बारे में बताएँगे-

उपयोगकर्ता या लाभार्थी: कुछ नागरिक ऐसे होते हैं जो सरकार की सेवाओं  को उपयोगकर्ता की नज़र  से देखते हैं |उदाहरण के लिए – यदि आपके पंचायत के सरकारी  स्कूल में पढ़ाई सही नहीं हो रही पर भी आप उसे उसी प्रकार से ले रहे हैं| आप अपनी कोई भी भूमिका नहीं निभा रहे , जैसा भी चल रहा है , अच्छा या बुरा जैसा भी स्कूल चल रहा है, आप उसको वैसे ही स्वीकार कर रहे हैं। 

ग्राहक या उपभोक्ता: कुछ नागरिक ऐसे होते हैं जो सरकार की सेवाओं  को ग्राहक बनकर देखते हैं।  जैसे यदि सरकारी स्कूल में आपके बच्चे कि पढ़ाई अच्छी नहीं हो रही है तो आप वह अपने बच्चे को सरकारी स्कूल से निकाल कर किसी निजी विद्यालय में दाख़िला कर दें लेकिन सरकारी स्कूल को बेहतर करने के लिए आवाज़ ना उठाएं। l

तो इनसे अलग सक्रीय नागरिक कौन होता है?

सक्रिय नागरिक:  सक्रीय नागरिक वह है जो सेवा से संतुष्ट  ना होने पर न तो उसको ही मान लेता है और ना ही निजी क्षेत्र  की तरफ चला जाता है, बल्कि सरकार से उसको बेहतर करने की मांग करता है। एक सक्रिय नागरिक होने की आवश्यकता है ताकि समस्याओं को पहचान करके उसके हल निकालने के लिए सरकार से बेहतर से बेहतर सुविधाओं कि मांग कर सकें

नागरिक अपनी भागीदारी कैसे निभा सकते हैं?

अब आप प्रतिभागियों को बताएँगे कि नागरिक कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में भागीदारी निभा सकते हैं। vh अपनी भागीदारी समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में दे सकते हैं चाहे वह स्वास्थ्य का क्षेत्र हो, शिक्षा हो या फिर वातावरण का क्षेत्र या अन्य कोई| इन क्षेत्रों में सक्रिय नागरिक अपनी भूमिका नीतियों के निर्माण एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में भूमिका अदा कर सकते हैं | नागरिक अपने भागीदारी सरकार से साथ विश्लेषण करने में निभा सकते हैं | यहाँ आप प्रतिभागियों से पूछ सकते हैं कि  वह अपनी भागीदारी कैसे निभाते है - शायद ज़्यादा लोग कहेंगे कि संस्था से जुड़ कर। 

नागरिक भागीदारी में मुश्किलें 

इस भाग में आप प्रतिभागियों के सामने यह लेकर आएंगे कि नागरिक भागीदारी ज़रूरी है लेकिन आसान नहीं है। यह हम एक गतिविधि और चर्चा के माध्यम से करेंगे। अगर आप सिर्फ आधे दिन का कोर्स करवा रहे हो, तो शायद आपके पास पूरी गतिविधि करवाने का समय ना हो। ऐसे में, नागरिक भागीदारी की मुश्किलों वाली स्लाइड पर अपनी चर्चा केंद्रित  कर सकते हैं और यह विषय कवर कर सकते हैं। आप नीचे दिए गए पॉइंट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

गतिविधि (आधे दिन के कोर्स में इसको ना करें और सीधा अगले सेक्शन ‘नागरिक भागीदारी की मुश्किलों’ पर जाएँ)  

आपको एक गतिविधि करवानी होगी, जिसके बारे में आप यहाँ (link to instructions and characters) पढ़ सकते हैं। उसमे लिखे गए अनुदेशों के अनुसार आप यह गतिविधि करवाएं। इस गतिविधि के लिए आप को 5 लोगों की ज़रुरत पड़ेगी। 

इस गतिविधि में  नागरिक भागीदारी से सम्बंधित कुछ मुश्किलें सामने आएँगी। चर्चा को इसपर केंद्रित रखते हुए, कोशिश करिये की प्रतिभागियों द्वारा ही वह यह समस्याएं पहचान पाएं। इसका मकसद यह है कि वह समझे कि हालांकि भागीदारी ज़रूरी है और सबको निभानी चाहिए ,  इतना आसान नहीं है  और एक सफल  नागरिक  पहल को  इन  मुश्किलों से आगे  बढ़ना होगा। 

नागरिक भागीदारी की मुश्किलें 

अगर आप सिर्फ आधे दिन का कोर्स करवा रहे हो, तो शायद आपके पास पूरी गतिविधि करवाने का समय ना हो। ऐसे में, नागरिक भागीदारी की मुश्किलों वाली स्लाइड पर अपनी चर्चा केंद्रित  कर सकते हैं और यह विषय कवर कर सकते हैं। आप नीचे दिए गए पॉइंट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं-

आकार की दुविधा : यानी यदि आप किसी मुद्दे पर आवाज उठाना चाहते हैं तो उसके लिए लोगों को इकट्ठा करना इतना आसान नहीं है | यदि आप किसी भी मुद्दे के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं, तो जरूरी है कि उसके लिए अधिक से अधिक लोग एकजुट हों और फिर आवाज उठाएं | तो कहने का अर्थ है कि लोगों को किसी भी मुद्दे के लिए एकजुट करना इतना आसान नहीं होता |

बहिष्कृत लोगों की आवाज न सुना जाना : नागरिक भागेदारी में ये भी एक मुश्किल है कि समाज के पिछड़े लोगों की आवाज ही नहीं सूनी जाती ये पिछड़े लोग कोई भी हो सकते हैं उदाहरण के तौर पर जैसे अनुसूचित जाति के लोग या फिर ऐसे भी हो सकते हैं जो बहुत कम पढ़े लिखे हों, महिलाएं हो सकती हैं, विकलांग लोग भी हो सकते हैं  या फिर कम उम्र का होना जैसे स्कूल प्रबंधन समिति में बच्चे की भूमिका तो है लेकिन उसकी आवाज कहाँ सुनी जाती है |

समय की दुविधा:  नागरिक भागेदारी में यह भी मुशिकल है कि कितने लोगों के पास वास्तव में इतना समय है की वे अपना दैनिक काम छोड़कर किसी मुद्दे के लिए अपना समय दे सकते हैं | इसके अलावा लोगों के पास इतने आर्थिक संसाधन भी नहीं है की वे अपना काम छोड़कर आवाज उठा सकें| उदाहरण के तौर पर जैसे एक दिहाड़ी लगाने वाले व्यक्ति के लिए उसकी प्राथमिकता यह है की वह दिहाड़ी लगाए और अपना घर चलाए, न कि अपना काम छोड़कर किसी मुद्दे के खिलाफ आन्दोलन में शामिल हों | 

तकनीकी विशेषज्ञता की दुविधा: लोगों के पास इतनी तकनीकी विशेषज्ञता भी नहीं होती कि वे अपनी भागीदारी दे सकें जरूरी है लोगों के पास मुद्दे से संबंधित तकनीकी जानकारी हो | यदि किसी पंचायत में  बाँध बनाना है तो उसके लिए जरुरत है ऐसे तकनीकी विशेषज्ञ लोग हों, जो उस काम को सही से पूरा कर पाएं | तो कहने का अर्थ यही है कि कुछ आम नागरिकों में तकनीकी विशेषज्ञता की भी कमी होती है|

सबकी भलाई में दुविधा : नागरिक भागेदारी में यह भी मुश्किल है कि प्रत्येक नागरिक के अपने-अपने मुद्दे हैं| जरूरी नहीं की जो मुद्दा एक समूह के लिए विशेष हो वह दुसरे के लिए भी उतना ही खास हो | इसलिए सबकी आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं | उदाहरण के तौर पर यदि एक सड़क है और मैं चाहता हूँ कि वह सड़क ज्यादा चौड़ी हो ताकि ट्रैफिक कि समस्या कम हो लेकिन उसी सड़क के किनारे ठेला लगाने वाला व्यक्ति नहीं चाहेगा कि उसका रोज़गार ख़त्म हो तो ऐसे में वह इस आन्दोलन में साथ नहीं देगा।

सामाजिक  जवाबदेही
  • जवाबदेही क्या है?
  • सरकार से जवाबदेही माँगने के क्या दो तरीके हैं?
  • सामाजिक जवाबदेही क्या है?

यह हिस्सा आप हम और हमारी सरकार टीम द्वारा दिए गए रिकार्डेड वीडियो के ज़रिये सिखा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे , प्रतिभागियों के सवालों और चर्चा के लिए आपकी तैयारी भी पक्की होनी ज़रूरी है। अगर आपका सेशन यहाँ समाप्त हो रहा है तो इसके बाद सीधा क्लोजिंग सेशन पर जाएँ, अगर नहीं, तो अगले सेक्शन पर बढ़िए। 

सामाजिक जवाबदेही के अलग-अलग उपकरण 

दुनिया में अलग-अलग जगहों पर जवाबदेही मांगने के अलग-अलग उपकरणों का इस्तेमाल होता है। यह सरकार के अलग-अलग काम जैसे नीति और योजना बनाना, बजट और व्यय का काम, सेवा वितरण और सार्वजनिक निरिक्षण पर सरकार से जवाब मांगने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। आप प्रतिभागियों को बताएं कि समय की कमी के कारण आप हर एक उपकरण के बारे में जानकारी नहीं साझा कर पाओगे लेकिन कुछ के बारे में बात करेंगे। आप दी गयी लिस्ट में से चुन कर कुछ के बारे में बात कर सकते हैं। हमने जो चुनें हैं वह है :

नीति पर मतदान: इस में जनता सरकार के किसी भी फैसले पर वोट करती है, कि वह इसके समर्थन में है या नहीं और बहुमत के फैसले पर अमल किया जाता है। हाल में ब्रिटैन के लोगों  को मौका मिला कि वह यह चुन सकें कि उनके देश को यूरोपियन देशों के समूह में रहना है या नहीं और इसपर उन्होंने वोट किया और सरकार के कामों में अपनी भागीदारी निभायी। 

बजट और खर्च के मामलों में जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए भी कई उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे एकाउंटेबिलिटी इनिशिएटिव हर साल बजट का स्वतंत्र विश्लेषण करती है और बताती है कि हर साल कौनसी योजना में सरकार ने कितना पैसा लगाया और कौनसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई। 

सेवा वितरण के मामले में सार्वजनिक सुनवाई एक अहम् तरीका है, जिसमे सही सुविधा ना मिलने पर सरकारी अधिकारियों से सीधे तौर पर जवाब माँगे जा सकते हैं। 

निरिक्षण समिति जैसे SMC भी जवाबदेही माँगने और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का एक तरीका होता है। 

अगर आपका सेशन यहाँ समाप्त हो रहा है तो इसके बाद सीधा क्लोजिंग सेशन पर जाएँ, अगर नहीं, तो अगले सेक्शन पर बढ़िए। 

सैंडविच स्ट्रेटेजी

आप प्रतिभागियों को बताएं कि जवाबदेही माँगने के सभी तरीको में समस्या तो आती है। कोई भी उपकरण 100 % नहीं काम कर पाता है। ऐसे में जोनाथन फॉक्स सो एक प्रोफेसर हैं  जिन्होंने सामाजिक  जवाबदेही के मुद्दे पर काफी काम किया है, उन्होंने सामाजिक जवाबदेही के प्रयासों को और सशक्त और मज़बूत बनाने की बात कही है  जिसको उन्होंने सैंडविच स्ट्रेटेजी का नाम दिया है। स्लाइड  पे  लगे  सैंडविच की तस्वीर से आप यह समझा सकते हैं। 

    • सिस्टम को और सशक्त बनाने में दोनों सरकार और लोगों की भागीदारी होनी पड़ेगी। 
    • सरकार ऊपर से दबाव डाले  और लोग नीचे से - दोनों ग्रुप अपनी भूमिका अनुसार सिस्टम पर प्रेशर बनायेंगे। 
    • ऐसे में सिस्टम पर तनाव होगी और जवाबदेही विरोधी और जवाबदेही समर्थक ताकतों में तनाव होगा। 
    • सिस्टम में (दोनों सरकार और नागरिकों की तरफ से)  जवाबदेही विरोधी (जो नहीं चाहते हैं कि यह सिस्टम बेहतर हो क्योंकि वह कमज़ोर सिस्टम का फायदा उठा  रहे हैं  और जवाबदेही समर्थक (जो इसको बेहतर करना चाहते हैं) दोनों ही तरह के लोग होते हैं  लेकिन यह ज़रूरी है कि विरोधी ताकतों को बाहर कर दिया जाये। 
    • अगर दोनों तरफ से सही प्रेशरबना रहा तो समर्थक ताकतें रह जाएंगी और विरोधी ताकतों को धीरे धीरे सिस्टम से बाहिर कर दिया जायगा 
    • मीडिया की भी भूमिका है यह प्रेशर बनाने में। 
    • हर तरफ से और स्मार्ट तरीके से प्रयास करना ज़रूरी है 
    • समर्थक ताकतों को और भी मज़बूत करना ज़रूरी है 

जोनाथन फॉक्स का कहना है कि शायद यह एक तरीका है जिससे जवाबदेही का सिस्टम सशक्त बने। यह विषय शायद आपको थोड़ा धीरे और पॉइंट को दौहराते हुए समझाना होगा। 

इसके बाद आप प्रतिभागियों को 4-5 लोगों के समूहों में बाँटिये। अगर आपके प्रतिभागी अलग-अलग संस्थाओं से आएं हैं तो उन्हें उसके अनुसार समूहों में बाँटिये।  अगर सभी आपकी संस्था से है या किसी एक संस्था से हैं तो जहाँ तक हो सके, इन समूहों को उनके काम के अनुसार बनाना बेहतर होगा। सबसे कहें कि अब यह नई सीख के बाद सोचें कि उनकी संस्था या टीम कैसे दबाव बना सकती है। यहां सोचने के लिए आप उन्हें कह सकते हैं कि दूसरी संस्थाओं, मीडिया, सरकारी प्रशासन और लोगों के साथ मिलकर कैसे सिस्टम को और सशक्त बनाया जा सकता है। 

चर्चा के लिए 15 मिनट का समय देकर, अगर समय बचे तो आपस में अलग -अलग समूहों में चर्चा हो सकती है कि उनके समूह में क्या बिंदु निकल कर आएं।

सेशन समाप्ति 

अंत में प्रतिभागियों को बताएं कि अलग -अलग क्षेत्रों में वह जो काम कर रहे हैं और सक्रीय नागरिक का काम कर रहे हैं, वह करते रहे और सरकार और अन्य सभी लोगों के साथ मिलकर सेवाओं को बेहतर करने में अपनी अहम् भूमिका निभाते रहे। 

कोर्स क्लोज़िंग

क्योंकि यह हमारे कोर्स का अंतिम हिस्सा है, यहाँ आपको कोर्स को भी क्लोज़ करना होगा। शुरू से कहानी को बाँधना होगा और यह सन्देश बताना होगा कि सरकार को समझना उसके साथ मिलकर बेहतर सेवा वितरण के प्रयास में जुड़ने के लिए ज़रूरी है। साथ ही उनसे उनके कोर्स के अनुभव के बारे में पूछ सकते हैं। उनको वेबसाइट www.humaarisarkaar.in के बारे में बताना ना भूलें जहाँ वह नई जानकारी हर हफ्ते पढ़ सकते हैं। 

आपके लिए संसाधन  

आधे दिन का कोर्स 

एक दिन का कोर्स 

दो दिन का कोर्स 

वीडियो