सरकार कौन है?


आप इस हिस्से में क्या बताना चाहते हैं?
  • सरकार लोगों से कर इखट्टा करती है और उसके बदले में सेवाएं देती है 
  • सरकार कर कैसे इखट्टा करती है?    
  • सरकार किस चीज़ पर खर्च करती है?    
  • सरकार खर्च कैसे करती है?    
  • यह सेवाएं सरकार को ही क्यों देनी चाहिए?   
लर्निंग आउटकम:
  • प्रतिभागी ये जान सके की एक तरह से  सरकार की उत्पत्ति की सोच कहा से और कब आई | 
  • प्रतिभागी सीख पाएंगे कि सरकार मूल रूप से करती क्या है?
  • प्रतिभागी समझेंगे कि सरकार हो ही क्यों सेवाएं देनी चाहिए?

समय : 20 / 10  मिनट

तरीका : लेक्चर- इसके लिए आप पीपीटी (नाम) का इस्तेमाल कर सकते हैं।  

सरकार लोगों से कर इखट्टा करती है और उसके बदले में सेवाएं देती है?   

सबसे पहले आप प्रतिभागियों से पूछें कि उनकी नज़र में सरकार क्या होती है? कोर्स का नाम भी सरकार से सम्बंधित है और शायद कई लोगों ने कहा भी होगाकि  हम सरकार को बेहतर समझने के लिए यहाँ आएं है। लोग शायद अलग

-अलग जवाब दें जैसे सरकार वह है जो हमने चुनी है, सरकार वह  है जो सत्ता में है, सरकार वह है जो हमें सुविधाएं देती है, सरकार वह है जिससे हम अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए देखते हैं आदि। 

आपको यहाँ यह बात चर्चा में लानी है कि मोटे तौर पर सरकार सुविधाएं देती है और यह सुविधाएं कैसे देती है? हम सब से टैक्स या कर इखट्टा करके। तो यह बताना होगा यहाँ की सरकार लोगों से कर इखट्टा करती है और उसके बदले में सेवाएं देती है। यहाँ आप पूछ सकते हो कि क्या ऐसा कोई है जो इस बात से सहमत नहीं है या जिसको लगता है कि वह  टैक्स नहीं दे रहा है। अगर कोई ऐसा कहे तो आपको क्लियर करना होगा कि किसी न किसी तरीके से, काम या ज़्यादा, टैक्स हम सब भरते हैं जैसे एक पेन खरीदने पर भी सरकार हम पर टैक्स लगाती है। 

सरकार कर कैसे इखट्टा करती है? 

अब आपको यह बात करनी होगी कि सरकार आखिर इतने सारे लोगों से टैक्स इखट्टा कैसे करती होगी। यहाँ आपको टैक्स के दो प्रकारों का परिचय देना होगा- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर। इसको शायद कुछ लोग डायरेक्ट और इंदिरेक्ट टैक्स के नाम से जानते हों। 

प्रत्यक्ष कर: प्रत्यक्ष कर जैसे की नाम से ही परिभाषित है, कर जो करदाता द्वारा सीधे तौर पर सरकार को दिए जाते हैं | घर और संपत्ति से आय पर जैसे  नागरिक सीधे सरकार को देता है। कंपनी भी टैक्स भरती हैं और यह भी सीधा सरकार को जाता है। 

अप्रत्यक्ष कर: अप्रत्यक्ष कर सरकार द्वारा एकत्र किए गए कर का एक प्रकार है|  टैक्स का प्रभाव उन उपभोक्ताओं पर पड़ता है जो मध्यस्थ से सेवाओं और माल को खरीदते हैं। यह प्रत्येक व्यक्ति से चाहे वह अमीर हो या फिर गरीब, समान रूप से माल की खरीद के समय वसूल किया जाता है, यानि लोग यह टैक्स बाज़ार में कुछ खरीदते समय भरते हैं और वहाँ से वह टैक्स सरकार तक पहुँचता हो। चाहे कोई प्रत्यक्ष कर ना भी देता हो लेकिन हर कोई कुछ न कुछ छोटी या बड़ी चीज़ तो मार्किट से खरीदता ही है, इसलिए सभी लोग अप्रत्यक्ष टैक्स भरते हैं। जैसे अगर आपने 10 रुपये का पेन खरीदा तो उसमे टैक्स का आद्या या एक रुपया शामिल होगा। वैसे ही, और भी तरह के अप्रत्यक्ष कर होते हैं जैसे 

  •  उत्पाद शुल्क: यह निर्माता द्वारा देय होता है जो खुदरा विक्रेताओं (retailers) और थोक व्यापारी (wholesalers) को स्थानांतरित हो जाता है |
  • बिक्री कर : एक दुकानदार या रिटेलर द्वारा देय होता है जो उपभोक्ता को स्थानांतरित हो जाता है|
  • सीमा शुल्क: वस्तु के देश से बाहर जाने पर आयात शुल्क, अन्ततः उपभोक्ता और रिटेलर द्वारा भुगतान किया जाता है |
  • सेस (cess या उपकार) यह टैक्स के ऊपर टैक्स लगाया जाता है, और किसीख़ास काम में लगता है जैसे स्वच्छ भारत सेस आपको पता है कि इसी योजना के काम में लगाया जायगा और यह सिर्फ ज़रुरत पड़ने पर इसको हटा लिया जाता है। 
सरकार किस चीज़ पर खर्च करती है ?   

अभी तक आपने बताया कि सरकार अलग -अलग ज़रियों से टैक्स इखट्टा करती है। यह पैसा इखट्टा होकर कैसे और किस प्रकार खर्च होता है? इससे लोगों को कौन-कौनसी सुविधाएं दी जाती हैं। यहाँ आप प्रतिभागियों से भी पूछसकते हैं कि वह सरकार के खर्च करने के बारे में क्या जानते हैं .

सरकार अलग-अलग तरह की सेवाओं पर पैसे खर्च करती है जैसे 

सार्वजनिक सेवाएं- जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वछता आदि, कानून और न्याय व्यवस्था - शासन प्रशासन, पुलिस, कोर्ट आदि, अर्थव्यवस्था- जैसे रोड, रेलवे, ब्रिज आदि, सुरक्षा- जैसे सेना

 यह सिर्फ कुछ चीज़ें हैं जिन पर सरकार खर्च करती है, इसके अलावा भी सरकार कई सेवाओं पर खर्च करती है। 

सरकार कैसे खर्च करती है?   

सरकार के पास भी सीमित पैसा होता है और लोगों की बहुत अलग -अलग ज़रूरतें होती हैं। ऐसे में सरकार को सोचना पड़ता है कि साधनों का सबसे बेहतर उपयोग कैसे हो सके। ख़ास तौर पर दो बातों का ख़ास ध्यान रखना  पड़ता है। 

मुफ्त सवारों की समस्या : कुछ लोग कर नहीं दे पाते, aur kuch kam kar dete hain, लेकिन ऐसे लोगों को भी सरकार से सुविधाओं की ज़रुरत है। सरकार को अलग -अलग कामों में पैसा लगाने के समय ऐसे लोगों और उनकी ज़रूरतों का भी ध्यान रखना होता है जो मुफ्त सवार हों, यानी जो सेवाएं तो लेते हों मगर उसके बदले ज़्यादा टैक्स ना देते हों। बहुत गरीब लोग टैक्स काम भर पाते हैं लेकिन सरकार को उनके लिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधा का बंदोबस्त फिर भी करना होता है। 

आम लोगों की त्रासदी - सरकार को इस बात का भी ध्यान रखना होता है कि ऐसी चीज़ों पर कितना खर्च हो जिनको कोई भी इस्तेमाल कर सकता है और जो शायद खुले इस्तेमाल के बाद ख़तम हो जाएँ और दुबारा आने में बहुत समय लगे। जैसे चराई की ज़मीन में अगर सबने अपने जानवर बिना देखे चला दिए तोह वह ख़तम हो जायगा। इसलिए ऐसी खुले इस्तेमाल की चीज़ों पर कितना खर्च किया जाए यह भी एक अहम् सवाल है?

इसलिए जब लोग सेवा लेने के लिए अतिरिक्त खर्चा करते हैं तो सरकार यह सुनिश्चित करती है कि ऐसे लोगों को सुविधा को लेकर किसी प्रकार की समस्या नहीं होनी चाहिए | इसलिए सरकार कुछ चीजों पर नियंत्रण लगाकर रखती है ताकि सार्वजनिक संपत्ति का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिल सके |  

सरकार ही क्यों सेवाएं  दे?  

अगर सरकार को इतनी सारी बातों के बारे में सोचना पड़ता है तो सरकार ही क्यों सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है? और भी संगठन यह सेवाएं देते हैं जैसे स्वयंसेवक समूह या सामाजिक संस्था लेकिन सरकार के पास ऐसा क्या ख़ास है? प्रतिभागियों से पूछें। यह बात निकल कर आनी है कि सरकार हर काम को बड़े स्तर पर  नागरिकों तक पहुँच सकती है देश के कोने कोने तक और यह कि हम यह मानते हैं कि सरकार बिना किसी भेद भाव के यह सेवाएं सब तक पहुंचाएगी। इसलिए इतने और विकल्पों के होने के बावजूद सरकार ही सबसे सक्षम है। 

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