भारत में विकेन्द्रीकरण


 भारत में विकेन्द्रीकरण 

  • भारत में किस प्रकार आया और अभी कैसा दिखता है? 
  • भारत में विकेन्द्रीकरण से क्या अपेक्षाएं हैं?   
  • विकेन्द्रीकरण में अलग-अलग स्तरों के काम?
  • भारत में प्लानिंग 
  • पंचायतों की शक्ति 

भारत में किस प्रकार आया और अभी कैसा दिखता है?   

73वां एवं 74वां संवैधानिक संशोधन: फिर आपको बताना होगा कि भारत में विकेन्द्रीकरण किस प्रकार से लाया गया। अलग अलग  रूप से भारत में बहुत पहले से विकेन्द्रीकरण देखा गया है लेकिन अब उसकी संविधानिक दर्जा मिल गया है। यहां आप संविधान के 73वें एवं 74वें संवैधानिक संशोधन के बारे में बताएं  जिससे वर्ष 1992, 1993 के बाद भारत में त्रीस्तरीय प्रणाली की शुरुआत हुई थी | स्थानीय स्तर पंचायतों एवं नगरपालिकाओं को भी सरकार का दर्जा प्राप्त हुआ और इसके साथ ही उन्हें कुछ जिम्मेदारियां हस्तांतरित की गईं और उन्हें पूरा करने की शक्तियां प्रदान की गयीं | इस बात पर फोकस करें कि पंचायतों और नगरपालिकाओं को संविधानिक रूप से सरकार के तौर पर पहचाना गया है। नीचे लिखे गए पॉइंट को चर्चा में शामिल करें। 

  •  पंचायती राज्य संस्था तीन स्तर पर  – ग्राम पंचायत, ब्लॉक समिति और जिला परिषद्
  •  सभी पंचायतो में अनुसूचित जातियों व् अनुसूचित जन जातियों  के लिए जनसंख्या के आधार पर सीटें आरक्षित |
  •  प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा
  •   ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों का चुनाव सीधे तौर पर गाँव के लोग करेंगें|
  •   प्रत्येक राज्य में स्वंत्रत निर्वाचन आयोग की स्थापना की जायेगी |

उसी प्रकार संवैधानिक तौर पर 74वें संशोधन के बाद शहरी निकायों में भी त्री-स्तरीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया- नगर पंचायत, नगर परिषद् एवं नगर निगम | इसमें भी लोग वोट के द्वारा इसके सदस्यों का चुनाव करेंगे |  

भारत में सरकार के तीन स्तर हैं:

जैसे कि आप पहले बता चुके होंगे कि सरकार के 3 स्तर हैं, अब आपको बताना होगा की यह व्यवस्था वास्तव में लगती कैसी है। यह बताना होगा की स्थानीय सरकारों को दो हिस्से में बांटा गया है: ग्रामीण और शहरी। यह व्यवस्था शायद आपके प्रतिभागी जानते भी होंगे तो आप उनसे भी इनके बारे में पूछ सकते हैं। 

1) केंद्र सरकार

2) राज्य सरकार

3) स्थानीय सरकार

 स्थानीय सरकार:

संविधान के 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधन के बाद सरकार के तीसरे स्तर का गठन किया गया जिसे स्थानीय सरकार का नाम दिया गया | इसी के साथ विकेंद्रीकरण में एक और अध्याय की शुरुआत हुई | स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायती राज व्यवस्था में जिला परिषद्, ब्लॉक समिति एवं ग्राम पंचायत शामिल हैं जबकि शहरों में नगर पंचायत, नगर निगम एवं नगर परिषद् की व्यवस्था है |

भारत की विकेंद्रीकरण से अपेक्षाएं कुछ इस प्रकार से हैं:    

भारत एक बहुत ही विशाल देश है जिसमे अगर अच्छे से विकेंद्रीकरण हो तो देश का बहुत फायदा हो सकता है |आपको अपने प्रतिभागियों से चर्चा करनी होगी कि आख़िर भारत ने विकेन्द्रीकरण का रास्ता अपनाया ही क्यों। यह अभी जिस भी हाल में है , लेकिन जब इस व्यवस्था को लाया गया तो इसके पीछे की सोच क्या थी? 

  • ऐसी सरकार हो जो भरोसेमंद हो और जिसके पास आसानी से पहुंचा जा सके (स्थानीय सरकार के लोगों तक संसद या विधायक या मुख्यमंत्री से पहुँचना ज़्यादा आसान)
  • अधिक जवाबदेह एवं पारदर्शी हो (प्रत्येक स्तर पर जबाबदेही सुनश्चित होगी जैसे स्कूल प्रबंधन समिति की जबाबदेही अनुश्रवण, प्लान बनाना, राशि खर्च करना इस तरह से प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनश्चित की जा सकती है | इसके अलावा आम लोग ग्राम पंचायत में जाकर सीधे तौर पर चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों से सवाल-जवाब कर सकते हैं, इसलिए क्योंकि वे उनके सबसे नजदीक हैं | 
  • किसी भी प्रकार की झगड़े का सही तरीके से निपटारा कर सके
  • गांव का स्थायी  और एक सामान विकास कराये एवं समाज के पिछड़े और गरीब तबके के लोगों को और सशक्त बनाये (जैसे आप बता सकते है कि  कुछ योजनाएं ग्रामीण विकास विभाग से ही चलाई जाती हैं )
  • राजनितिक नेतृत्व में और प्रतिस्पर्धा हो (क्या आप अपने राज्य का कोई उदाहरण दे सकते हैं? कोई ऐसे राजनितिक नेता जो पंचायत या नगरपालिका स्तर से अब MP MLA या मंत्री बने हो)
  • सबसे महत्वपूर्ण यह कि जनता को बेहतर सुविधायें उपलब्ध कराये।   

जैसे कि पहले भी बात हुई थी, विकेन्द्रीकरण में 3 चीज़ें हर स्तर पर होनी चाहिए: लोग, काम, पैसा। यह कैसे तय होगा कि कौन सी स्तर की सरकार को कौन सा काम करना होगा .  इसके लिए अलग-अलग सूचियां (लिस्ट) बनाई गई हैं जिसमें यह बताया गया है कि कौनसे स्तर पर कौन सी ज़िम्मेदारियाँ दी गयी हैं। 

विकेन्द्रीकरण में अलग-अलग स्तरों के काम   

आप प्रतिभागियों से पूछो कि अलग -अलग  स्तर की सरकारों को कौन-कौन से काम करने होंगे यह कैसे तय। 

1) केंद्र सूची: संविधान ने केंद्र सरकार को कुछ महत्वपूर्ण कार्य दिए हैं जैसे सेना, विदेशी मामलों, रेलवे इत्यादि

2) राज्य सूची:  राज्यों को मुख्य रूप से कानून व्यवस्था, सार्वजनिक स्वस्थ्य, सड़कें, कृषि, पानी इत्यादि विषय दिए हैं, जिनकी मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है |

3) समवर्ती सूची: इसके अलावा कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें पूरा करने की ज़िम्मेदारी केंद्र के साथ-साथ राज्यों की भी होती हैं जिसे समवर्ती सूची कहते हैं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक और सामाजिक नियोजन, जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन इत्यादि| साथ ही, 11वी अनुसूची के अनुसार पंचायतों को 29 काम राज्यों द्वारा सौंपे जाने की बात की गयी है लेकिन ज़्यादातर राज्यों में यह काम उन्हें पूरी तरह से नहीं दिए हैं। 

भारत में प्लानिंग  

भारत एक बड़ा देश है और प्लानिंग और योजना का काम भी कई अलग अलग स्तरों पर होता है। आप को बताना होगा कि सरकार के तीनो स्तरों पर यह काम होता है। 

केंद्र स्तर पर योजना आयोग हुआ करता था जिसको हटा कर अब नीति आयोग को स्थापित किया गया है। योजना आयोग पूरे देश के लिए 5 साल का प्लान बनता था, वहीं नीति आयोग अब राज्यों को ध्यान में रखते हुए काम करता है। 

उसी तरह फिर आप राज्य स्तर की प्लानिंग प्रक्रिया के बारे में लोगों को बताएं 

TO ADD MORE 

पंचायतों की शक्ति   

इस चर्चा को ख़तम करने के लिए आप पंचायतों की शक्ति और पहुँच पर जानकारी दे सकते हैं। जैसे एक स्लाइड में यह दिखा सकते हैं कि  भारत में अलग -अलग स्तरों पर कितनी पंचायतें है और कितने प्रतिनिधि है ताकि लोगों को पता चले कि विकेन्द्रीकृत सरकार पंचायतों के रूप में कितनी गहराई तक सरकारी व्यवस्था का हिस्सा हैं।

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