बजट


  • बजट क्या है?
  • सरकारों के लिए बजट ज़रूरी क्यों है?
  • नागरिकों के लिए बजट क्यों ज़रूरी है?
  • बजट कौन-कौन से स्तरों पर बनता है?
  • स्थानीय बजट में क्या होता है?
  • पारदर्शिता के लिए नई पहल 

बजट क्या है?

यह सेक्शन शुरू करने से पहले आप प्रतिभागियों से पूछें कि बजट से वह क्या समझते है? उनके जीवन में क्या वह किसी काम के लिए बजट बनाते है? इसको बनाकर क्या फायदा होता है? शायद लोग अपने घर का उदाहरण देंगे जहाँ बजट बना के देखा जाता है कि घर में खर्च करने के लिए कितने पैसे है और क्या ज़रूरतें है। 

इसके बाद आप उन्हें बताएं कि इसी प्रकार सरकार भी अपना बजट बनाती है जिससे वो अपनी आय और व्यय को बेहतर समझ पाती है। बजट के बारे में कुछ अहम् बातें जो आपको उन्हें बतानी चाहिए- 

अपेक्षित आय और व्यय का विवरण: बजट से मालुम चलता है कि आमदनी कहाँ-कहाँ से होगी, कितनी होगी तथा वह पैसा किस तरह से किन-किन चीजों पर प्राथमिकता के आधार पर खर्चा किया जायेगा|
एक निश्चित अवधि के लिए: बजट जब बनाया जाता है तो उसकी एक निश्चित तय अवधि होती है जैसे सरकार द्वारा बजट प्रत्येक वित्तीय वर्ष (1 अप्रेल से लेकर 31 मार्च तक) को ध्यान में रखकर एक वर्ष के लिए बनाया जाता है |
नीति उद्देश्यों और प्राथमिकताओं का विवरण: बजट पत्र से सरकार की नीतियों और उद्देश्यों के बारे में पता चलता है| इसके साथ ही बजट से यह भी मालुम चलता है कि सरकार की प्राथमिकताएं किन क्षेत्रों में ज्यादा हैं| जैसे यदि सरकार किसी खास क्षेत्र के लिए ज्यादा पैसा आवंटित कर रही है तो इससे समझ में आता है कि उसकी प्राथमिकता उस क्षेत्र के लिए ज्यादा है| 

आर्थिक विकास, स्थिरता और सार्वजनिक कल्याण को अधिकतम करने का लक्ष्य: सरकार आर्थिक विकास और सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देती है क्योंकि ये सभी चीजें एक आम नागरिक से जुड़ी होती हैं | बजट से हमें मालूम चलता है कि सरकार का लक्ष्य जनता के कल्याण सम्बन्धी आर्थिक विकास, स्थिरता और सार्वजनिक कल्याण को अधिकतम करने का लक्ष्य: सरकार आर्थिक विकास और सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देती है क्योंकि ये सभी चीजें एक आम नागरिक से जुड़ी होती हैं | बजट से हमें मालूम चलता है कि सरकार का लक्ष्य जनता के कल्याण सम्बन्धी कार्यक्रमों को चलाकर उन्हें सुविधायें प्रदान करना है|


सरकारों के लिए बजट ज़रूरी क्यों है?

बजट क्या है यह समझने के बाद यह बताना ज़रूरी हो जाता है कि बजट सरकारों के लिए क्यों ज़रूरी है और सरकार के बेहतर काम करने में कौन-कौन से तरीको से काम आता है। इसमें ४ 4 महत्वपूर्ण पॉइंट्स हैं -

निति उपकरण (Policy tool): बजट सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है यह सरकार के लिए एक नीति नीति उपकरण के तौर पर मदद करता है| सरकार को बजट से आने वाले समय के लिए नीतियाँ बनाने में सहायता मिलती है यदि सरकार को स्वच्छता के क्षेत्र में आने वाले समय के लिए बेहतर योजनायें चलानी हैं तो सरकार इसके माध्यम से वार्षिक, तथा इससे अधिक अवधि के लिए निति बनती है तथा उसी के अनुसार आगे कार्य करती है| बजट में सरकार जिन-जिन क्षेत्रों के लिए अधिक बजट आबंटित करती है उसका मतलब होता है कि सरकार उनके क्षेत्रों को अधिक प्राथमिकता दे रही है|

योजना उपकरण (Planning tool): यह सरकार के लिए एक प्लानिंग टूल है क्योंकि बजट में दिखता है कि सरकार अपने प्लान को पूरा करने के लिए वास्तव में किस तरह से किन गतिविधियों में पैसा खर्च कर रही है| उदाहरण के तौर पर यदि सरकार की निति है कि अगले 5 वर्षों में शिक्षा में हम ये-ये काम करेंगे और उसके लिए अलग-अलग गतिविधियाँ करेंगे तो उसके लिए हर साल कितना-कितना पैसा आबंटित करना होगा ये सारी प्लानिंग बजट के माध्यम से ही सरकार करती है| अब ये प्लान कार्यान्वित हो रहा है या नहीं इसके लिए सरकार प्रत्येक वर्ष यह देखती हैं की हमने इन 1 वर्ष या दो वर्षों में कितना पैसा खर्चा किया है यह सब कुछ सरकार बजट के माध्यम से ही देखती हैं |

वित्तीय उपकरण (Fiscal tool): सरकार के पास जो पैसा आ रहा है वह कहाँ से कितना आया है और खर्चा किस हिसाब से हो रहा है इसके लिए सरकार अपने पास पूरा रिकॉर्ड रखती है| सरकार के लिए बजट एक वित्तीय उपकरण है जिससे सरकार को खर्चों एवं प्राप्तियां की पूरी जानकारी मिलती है और यह मालुम चलता है कि क्या खर्चा सही जगह पर खर्चा हो रहा है या नहीं| इसलिए सरकार के लिए बजट दस्तावेज बहुत महत्वपूर्ण होता है |

जबाबदेही उपकरण (Accountability tool): सरकार की खुद जवाबदेही को बढ़ाने के लिए बजट बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है| सरकार प्रत्येक वर्ष विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को बजट आवंटित करती है इस नाते सरकार एक दुसरे से बजट सम्बन्धी जानकारी की मांग कर सकते हैं कि क्यों बजट सही तरीके से निर्धारित कार्यों पर खर्चा किया गया या नहीं अगर पैसा खर्चा नहीं किया गया तो उसके क्या कारण रहे| इस तरह से बजट दस्तावेज सरकार के अंदर भी जवाबदेही को को भी बढ़ावा देता है|

नागरिकों के लिए बजट क्यों ज़रूरी है?

यह बात करने के बाद आपको लोगों को यह भी बताना होगा कि आखिर उनके लिए बजट की क्या महत्वपूर्णता है या उनके लिए एक आम नागरिक होते हुए, यह देखना क्यों ज़रूरी है। इसको शुरू करने से पहले आप इसके बारे में उनसे उनके विचार पूछ सकते हैं . उन्हें बताये कि बजट हमारे लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होता है जैसे-

  1. बजट देखने से हमें गलतियाँ तथा अक्षमताओं की पहचान करने में मदद मिलती है| 
  2. बजट दस्तावेज की मदद से हम यह जान सकते हैं कि सरकार का पैसा केंद्र से लेकर स्थानीय स्तर तक किस तरह से प्रवाहित हुआ है|
  3. बजट दस्तावेज से हम यह जान पाते हैं कि जो पैसा ऊपर से नीचे दिया गया है क्या वह समय पर उन्हें मिला, क्या वह जिन निर्धारित कार्यों के लिए दिया गया था उन्ही पर किया गया है या नहीं| 

एक नागरिक होते हुए, हम सब को यह पता होना चाहिए कि हमारे देश में बजट सरकार के हर स्तर पर बनता है- केंद्र, राज्य और अलग-अलग स्थानीय सरकारें बजट बनाती हैं .

बजट कौन-कौन से स्तरों पर बनता है?

जैसे कि आप पहले भी बताएँगे, बजट केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के स्तर पर बनता है .

केंद्र बजट

  • केंद्र स्तर की बात की जाए तो केंद्र सरकार प्रत्येक वर्ष अपनी आय तथा व्यय का लेखा जोखा बजट के माध्यम से पेश करती है| वर्ष 2017 से बजट प्रत्येक वर्ष 1 फरवरी को पेश किया जाता है जबकि इससे पहले यह फरवरी के अंतिम सप्ताह में पेश किया जाता था| 
  • केंद्र बजट भारत के वित्त मंत्री द्वारा पेश किया जाता है . यहाँ प्रतिभागियों से पूछें कि वर्तमान में यह कौन है
  • केन्द्रीय बजट का ज्यादातर विवरण एक्सेल शीट में उपलब्ध होता है|

राज्य बजट 

  • प्रत्येक राज्य में बजट पेश होने का समय और तारीख अलग-अलग होती है| 
  • ज्यादातर राज्यों में बजट के प्रारूप भी अलग-अलग होते हैं 
  • राज्यों में अलग-अलग भाषाएँ बोली और समझी जाती हैं अतः राज्य सरकारें अपनी राज्य की भाषा के अनुसार बजट भाषा निर्धारित की जाती है| 
  • राज्य बजट राज्य के वित्त मंत्री द्वारा पेश होता है (इस पर भी लोगों से सवाल पूछिए)

स्थानीय बजट कैसे बनता है?

जैसा की हमने पहले भी देखा की स्थानीय सरकार के पास तीन तरह से आयआती है जिसमे केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्राप्त धन, सांसद एवं विधायको से प्राप्त निधि एवं निजी आय इनके यदि अगर हम एक-एक करके उदाहरण देखेंगे तो उसमे सबसे पहले केंद्र एवं राज्य सरकार से 14 वा वित्त आयोग का पैसा और दूसरा तरीका होता है केंद्र एवं राज्यों सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का पैसा जो सीधे या किसी दूसरे तरीके से स्थानीय सरकार तक पहुँचता है | सांसद एवं विधायको द्वारा भी कुछ पैसा स्थानीय सरकार या पंचायत तक आता है जैसे की हमने पहले भी देखा था की सांसद एवं विधायक के पास भी एक तरह की निधि आती है जो वे अपने क्षेत्र मे खर्च कर सकते है एवं निजी आय से आशय है की जो स्थानीय सरकार खुद अपने स्तर पर पैसा वसूल करती है जिसमे सम्पत्ति कर, विवाह पंजीयन, हाट एवं बाजार मे लगने वाली दुकानों से होनी वाली आय पर बिक्री कर के रूप मे पैसा प्राप्त होता है |

इसमें सबसे पहले प्लानिंग ग्राम पंचायत स्तर पर बनाया जाता है जिसमे गाव के सभी लोग शामिल होते है। 

इसके साथ साथ पंचायत सचिव,सरपंच,वार्ड पंच,रोजगार सहायक एवं पंचायत स्तर पर बनाई गई सारी समिति के सदस्य का शामिल होना भी ज़रूरी है | जब यह प्लान ग्राम पंचायत स्तर सर्वसम्मति से बना लिया जाता है फिर यह पंचायत समिति(ब्लाक) के पास जाता है  जिससे यदि अगर इसमें कोई त्रुटी पाई जाती है तो उसमे पंचायत समिति इसमें सुधार करवाती है और पंचायत समिति अपना प्लान एवं ग्राम पंचायतो के प्लान को संयोजित कर आगे जिला परिषद् (जिला पंचायत) तक पंहुचा देती है | 

इसी श्रंखला मे हम देखेगे शहरी स्तर की स्थानीय सरकार अपना प्लान  किस तरह से बनाती है तो उसमे सबसे पहले वार्ड स्तर पर एक सभा का आयोजन किया जाता है जिसमे वार्ड की आम जनता एवं वार्ड प्रमुख एवं पार्षद मिल कर प्लान बनाते है फिर उस प्लान को नगर निगम,नगर परिषद् एवं नगर पालिका स्तर तक पहुँचाया जाता है इस स्तर पर आ कर प्लान को सभी वार्ड के प्लान को मिला कर नगर पालिका ने जो अपना प्लान तैयार किया उसको सभी वार्ड के बनाये गए प्लान मे जोड़ कर आगे भेज दिया जाता है | 

ग्रामीण और शहरी प्लानों को मिलकर जिला स्तर पर जो प्लान बनाया है जाता है। राज्य स्तर पर जो राज्य योजना समिति बनाई गई है वह सभी जिलो के प्लान एवं राज्य स्तर पर निर्धारित किये गए कार्य को मिला कर पूरे राज्य का एक प्लान होता है जिसे आगे केंद्र स्तर पर पंहुचा दिया जाता है।  तो इस तरह से पूरी प्लानिंग प्रक्रिया पूरी होती है और फिर जो प्लान बनाया जाता है उसके हिसाब से तकनीकी विशेषज्ञ की मदद से किस कार्य मे कितना पैसा लगेगा उसकी एक अनुमानित लागत निकल कर बजट बनाया जाता है |

पारदर्शिता के लिए नई पहल 

आप प्रतिभागियों को बताये कि कुछ राज्य सरकारों ने पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए खुद से पहल की है| कुछ राज्य सरकारों ने स्वयं आगे आकर अपने विभागों में योजनाओं के कार्यान्वयन संबंधी जानकारी को सार्वजनिक किया है|

मध्य प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के कार्यान्वयन जैसे जिला पंचायत, पंचायत समिति तथा ग्राम पंचायत में किस योजना के तहत कितना पैसा आया, कब आया, कितनी किश्तों में आया, किन कार्यों पर खर्चा हुआ, कब खर्चा हुआ - यह सब जानकारी सम्बंधित पंचायत को चुनकर बहुत विस्तार से प्राप्त कर सकते हैं| इससे यदि किसी को यह जानना हो कि मध्य प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं में किस तरह खर्चा हुआ है तथा उसके लाभार्थी कौन हैं यह सब जानकारी उपलब्ध है| 

आप प्रतिभागियों को बताये कि मध्य प्रदेश राज्य सरकार की ही तरह राजस्थान राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर  जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाये हैं| 

राजस्थान राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर लोगों को जानकारी उपलब्ध कराने हेतु एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है| इस पोर्टल में राज्य सरकार ने 28 विभागों की 54 योजनाओं की जानकारी को सार्वजनिक किया है| इसमें मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, पंचायती राज, समाजिक सुरक्षा पेंशन, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित तमाम विभागों तथ योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी गयी है| ट्रेनर प्रतिभागियों को बताये कि यदि यह जानना हो कि राजस्थान में दी गयी योजनाओं एक अंतर्गत किन-किन लाभार्थियों को कब लाभ मिला हैम उसकी पूरी जानकारी सरकार ने संस्थागत रूप से स्वयं सार्वजनिक की है| 

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