प्रशासनिक व्यवस्था


आप इस हिस्से में क्या बताना चाहते हैं?
नौकरशाही का परिचय और ढांचा
  •  नौकरशाही की शुरुआत 
  • केंद्र , राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकार किस प्रकार लगती है? 
नौकरशाहों के काम करने का परिवेश  
  • लोग सरकारी नौकरी से क्यों जुड़ते हैं 
  • सरकार जीवन में क्या क्या होता है? 
सरकारी प्रशासन की जटिलताएं
  •   सरकारी प्रशासन की जटिलताएं 
लर्निंग आउटकम:

यह हिस्सा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि अगर सरकार को चलाने वाले लोगों के साथ मिलकर सेवाओं को बेहतर करना है तो उनको और उनके काम करने के सिस्टम को समझने बेहद ज़रूरी है। 

  • सरकारी अधिकारी किस ढांचे के अंतर्गत काम करते है
  • सरकारी अधिकारी किस परिवेश में काम करते हैं और उसका सीधा असर उनके काम पर कैसे पड़ता है
  • सरकारी अधिकारियों के काम करने के तरीके में क्या जटिलताएं हैं जिसकी वजह से सेवाओं की आपूर्ति होती है
  • सरकारी अधिकारियों के काम करने के तरीके- उनका ढांचा, काम करने का परिवेश उनकी परेशानियां और काम की जटिलताओं का संस्थाओं और नागरिकों का समझना क्यों ज़रूरी है।

समय : 90/ 60 मिनट

तरीका: इस भाग का कुछ हिस्सा आप हमारे द्वारा  दिए गए हमारी टीम के वीडियो  के माध्यम से सिखा सकते है।  साथ ही लेक्चर, अन्य वीडियो और चर्चा का इस्तेमाल होगा। 

नौकरशाही का परिचय और ढांचा 
  • नौकरशाही की शुरुआत 
  • केंद्र , राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकार किस प्रकार लगती है

इसमें जाने से पहले आपको लोगों को बताना होगा कि भारत में सरकार की तीन मुख्य शाखाएं है। विधान पालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। यह हमने पिछले सेशन में भी देखा। विधान पालिका वह जहाँ कानून बनाये जाते, कार्यपालिका जहाँ  इन कानूनों पर काम होता है और न्यायपालिका जहाँ कानून से सम्बंधित शिकायत निवारण किया जाता है। 

विधानपालिका: विधानपालिका संसद को कहते हैं जिसके दो सदन होते हैं – लोक सभा और राज्य सभा | लोकसभा में 552 सदस्य होते हैं जबकि राज्य सभा में 250 सदस्य होते हैं | राज्यसभा के सदस्यों को चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से 6 वर्षों के लिए होता है जबकि लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष विधि से 5 वर्षों की अवधि के लिये होता है । 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिक मतदान कर लोकसभा के सदस्यों का चुनाव कर सकते हैं। भारत की संसद के विधायिका के प्रमुख कार्य जैसे प्रशासन की देखभाल, बजट पारित करना, लोक शिकायतों की सुनवाई और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा जैसे विकास योजनाएं, राष्ट्रीय नीतियां, और अंतर्राष्ट्रीय संबंध इत्यादि करनी होती हैं ।

कार्यपालिका: कार्यपालिका के तीन अंग हैं- राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मंत्रीमंडल | संवैधानिक तौर पर केन्द्रीय कार्यपालिका का प्रमुख राष्ट्रपति होता है | मंत्रिमंडल का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है। मंत्रिमंडल के प्रत्येक मंत्री को संसद का सदस्य होना अनिवार्य है। कार्यपालिका, विधायिका से नीचे होता है। कार्यपालिका सरकार का वह अंग होती हैं जो शासन का अधिकार रखती हैं और उसकी ज़िम्मेदारी उठाती हैं। कार्यपालिका क़ानून को कार्यान्वित करती हैं और उसे लागू करती हैं।

न्यायपालिका: भारतीय न्यायिक प्रणाली को आम कानून व्यवस्था के रुप में जाना जाता है जिसमें न्यायाधीश अपने फैसलों, आदेशों और निर्णयों से कानून का विकास करते हैं। विभिन्न तरह की अदालतें देश में कई स्तर की न्यायपालिका बनाती हैं। भारत की शीर्ष अदालत नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट है और उसके नीचे विभिन्न राज्यों में हाई कोर्ट हैं। 

वास्तव में इस पूरे ढांचे को चलाने के लिए नौकरशाही की प्रमुख भूमिका होती है जिन पर सरकार की योजनाओं को चलाने की जिम्मेदारी होती है | 

फिर अधिकारियों  पर आते हुए, सबसे पहले आप पूछो कि उनके अनुसार सरकारी अधिकारी कौन लोग होते हैं? आपको बताना है कि अलग-अलग तरीके के श्रेणी के अधिकारी होते हैं जैसे अखिल भारतीय सेवाएं जिसमे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), और भारतीय वन सेवा (IFS) . इन सेवाओं के अधिकारियों को एक राज्य आवंटित किया जाता है [जिसे राज्य कैडर कहा जाता है] और सेवानिवृत्ति तक ही राज्य सरकार में काम करना होगा। हालांकि, वे कुछ वर्षों तक प्रतिनियुक्ति पर नई दिल्ली में केंद्रीय सचिवालय में भारत सरकार के लिए भी काम कर सकते हैं। 

फिर आपको बताना होगा  साथ ही, दो और मुख्य तरह के अधिकारी होते हैं।   

केन्द्रीय सेवायें (Central Services): इन अधिकारीयों को केंद्रीय सरकार के प्रशासन को चलाने के लिए केन्द्र स्तर पर नियुक्त किया जाता है जिन्हें भी राष्ट्रपति द्वारा भी ही नियुक्त किया जाता है। केन्द्रीय सेवाएं उन सेवाओं का गठन करती हैं जो केंद्र सरकार के लिए काम करती हैं और भारतीय विदेश सेवा, भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क सेवा, भारतीय रेलवे सेवाएं, भारतीय डाक सेवा, भारतीय सूचना सेवा इत्यादि जैसी सेवाएं शामिल हैं।

राज्य सेवा (State Services): इन अधिकारीयों को राष्ट्रपति द्वारा किसी सामान्य या विशेष आदेश द्वारा अलग-अलग राज्य सार्वजनिक सेवा आयोगों द्वारा संचालित एसएससी परीक्षा के माध्यम से चयनित किया जाता है | इनकी नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है उदाहरण के तौर पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), नायब तहसीलदार, फारेस्ट रेंजर इत्यादि नियुक्तियां राज्य लोक सेवा द्वारा की जाती हैं|

केंद्र , राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकार किस प्रकार लगती है? को समझाने के लिए आप हमारी टीम का रिकार्डेड वीडियो (प्रशासनिक व्यवस्था पर) दिखा कर उसपर चर्चा कर सकते हैं।

नौकरशाहों के काम करने का परिवेश
  • लोग सरकारी नौकरी से क्यों जुड़ते हैं 
  • सरकार जीवन में क्या क्या होता है 
  • नौकरशाह और नियम 
नौकरशाहों की व्यक्तिगत प्रेरणा : लोग सरकारी नौकरी से क्यों जुड़ते हैं?   

सबसे पहले आप प्रतिभागियों से पूछें कि सरकारी अधिक्यारियों या नौकरशाहों के बारे में वह क्या सोचते है। 3 या 4 लोगों के विचार सुनने का समय लीजिये। शायद लोगों के जवाब से आपको लगे कि अधिकारियों के बारे में उनके विचार काफी नकरतात्मक हैं। 

इस चर्चा (लगभग 5 मिनट) के बाद अब आप विडियो चलाये जो एक BDO के ऊपर आधारित है जिसमें बताया गया है कि वह किस लग्न के साथ अपना कार्य करती हैं |

विडियो दिखाने के बाद ट्रेनर प्रतिभागियों को इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देने को कहे और बोले कि अब आप बताईये कि इस विडियो को देखकर आपको क्या लगा |  इस पर अवश्य प्रतिभागी अपनी प्रतिक्रियाएं देंगे और कहेंगे कि वह बहुत अच्छे से, लोगों के बीच में रहकर काम करती हैं। 

इस चर्चा से हमें यह जानकारी निकालनी है कि सब नौकरशाह एक जैसे नहीं होते| माना की कई नौकरशाह भ्रष्टाचारी हैं लेकिन उस ही माहौल में ऐसे नौकरशाह भी हैं जो ईमानदारी से अपना काम करते हैं.. ये जो नौकरशाह होते हैं,  ये सब हमारे ही समाज के लोग हैं ये कहीं अलग जगह से नहीं आये हैं | 

इनकी भी कुछ बाधाएं हो सकती हैं| आपको ध्यान देना होगा कि जितना अधिक हो सके वह कोशिश करे कि प्रतिभागी जो भी नौकरशाह के बारे में अपनी समझ रखते हैं वे इसके बारे में अधिक से अधिक बताये ताकि उनकी रूचि एवं समझ और गहरी हो सके| इसमें हो सकता है कि प्रतिभागी भी इससे जुड़े अपने किसी स्थानीय अधिकारी का उदाहरण दें |

आप प्रतिभागियों को बताये की हमने आपको बताया कि नौकरशाह कौन होते हैं अथवा कहाँ से आते हैं | अब हम आपको बताएँगे की आखिर कौन सी ऐसी व्यक्तिगत प्रेरणाएं होती हैं जो एक नौकरशाह को सरकारी क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित करती हैं और इनका सेवा वित्तरण पर क्या प्रभाव पड़ता है | ट्रेनर प्रतिभागियों को बताये की हमारे पिछले कुछ अध्ययनों के आधार पर हम कह सकते हैं कि नौकरशाह को प्रशासन में आने के लिए आंतरिक प्रेरणादायक (internal motivational) तीन प्रमुख चीजें होती हैं |

  1. कम काम करना पड़ता है– कुछ नौकरशाह यह मानते हैं कि एक बार सरकार के अंदर आने के बाद उन्हें इस नौकरी में निजी क्षेत्र कि तुलना में ज्यादा काम नहीं करना पड़ता |
  2. सामजिक सेवा की भावना: अधिकतर नौकरशाह कहते हैं कि यहाँ पर आने का उनका मुख्य उद्देश्य होता है कि ताकि वे प्रशासन में रहकर लोगों की सेवा कर सकें |
  3. सुरक्षित नौकरी:  कुछ नौकरशाह ऐसे भी हैं जो ये कहते हैं कि उनके लिए इस सरकारी तंत्र में आने का मकसद यही था कि ताकि उन्हें एक सुरक्षित नौकरी मिल सके |  

अब आप प्रतिभागियों से पूछो कि यह प्रेरणा को समझना क्यों ज़रूरी है? नौकरशाहों की व्यक्तिगत प्रेरणा का असर सेवा वितरण पर पड़ता है |तो कहने का अर्थ यही है कि जब लोग इस तरह की प्रेरणा से सरकारी क्षेत्र में आएंगे तो उसका प्रभाव उनके काम में भी दिखेगा क्योंकि उनकी प्रेरणा काम करना नहीं बल्कि खुद को सुरक्षित या कम काम करना है |  

नौकरशाहों के  जीवन का हिस्सा

आखिर एक नौकरशाह के काम का वातावरण किस प्रकार का होता है और उसके दैनिक जीवन पर इसका क्या प्रभाव होता है |

  •   नौकरशाह के हस्तांतरण होने का एक नियम बना हुआ है मतलब कभी भी कहीं के लिए भी सेवाएं देने के लिए जाना पड़ता है
  •   सपोर्ट स्टाफ के स्थानान्तरण कि वजह से अधिकारी को काम करने में बहुत परेशानी होती है
  •   संसाधनों की कमी
  •   कार्यालय में अतिरिक्त पद
  •   कार्य स्पष्टता की कमी
  •   अच्छी और ज़रुरत अनुसार प्रशिक्षण में कमी
नौकरशाह और नियम

आप प्रतिभागियों को बताये कि नौकरशाह नियमों का बहुत पालन करते हैं यानि सरकार में नियम प्रमुख होता है| छोटा या बड़ा फैसला हो, नौकरशाह उसे नियम अनुसार लेते हैं। इसकी वजह से नौकरशाही में नियम उसके कल्चर और रोज़मर्रा का बड़ा हिस्सा हैं। 

नियम अच्छे और बुरे दोनों परिणाम ला सकते हैं। एक तरफ यह सुनिश्चित करते हैं कि काम सही तरीके से किया जा रहा है वहीँ दूसरी ओर कभी कभी काम की गति को धीमे करते या तोड़ भी सकते हैं। प्रतिभागियों को यह ज़रूर बताएं कि यह दोनों पहलू सच हैं और इस मुद्दे को दोनों नज़रियों से देखना ज़रूरी है। यहाँ आप सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं का उदाहरण दे सकते हो।

इस नियमबद्धता का कभी-कभी उल्टा प्रभाव भी देखने को मिलता है- जैसे अगर एक कॉपी या पेन भी लेना है तो इसके लिए भी फ़ाइल में लिखना होता है, उसके बाद आदेश लेकर ही खरीद सकते हैं और एक दम नियम से करना होता है| हर छोटे काम के लिए जब नियम पालन करने होते हैं तो एक तो बहुत समय बर्बाद होता हुआ दिखाई पड़ता है, दूसरा नौकरशाहों के पास काम न करने का एक बहाना भी हो जाता है और तीसरा इस वजह से  उनका मोटिवेशन भी बहुत कम हो जाता है |

सरकारी प्रशासन की जटिलताएं 

सरकारी  प्रशासन एक बहुत बड़ा तंत्र है। जब इतने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक व्यवस्था चलती है तो उसमे मुश्किलें और जटिलताएं भी होती हैं। इनको समझना हमारे लिए इसलिए ज़रूरी है ताकि इनके साथ हम अपने काम में बेहतर और उचित तरीके से जुड़ सकें। सरकार में  कई अनोखी जटिलताएं होती है जो शायद अन्य संस्थाओं में ना होती हैं जैसे एक से अधिक बॉस होना, कार्य की स्वतंत्रता ना होना, काम करने के लिए वित्तीय ज़िम्मेदारी ना होना, कार्य स्पष्टता ना होना, अलग-अलग विभागों में तालमेल की कमी, कार्य के अनुसार  संसाधनों की कमी। आप इन सभी का मतलब समझाते हुए प्रतिभागियों को अवगत करें कि इन सभी का असर सेवाओं पर पड़ता है। और अगर सेवाओं को बेहतर करने में भूमिका निभानी है तो सरकारी प्रशासन यानि नौकरशाहों और उनके दिन-प्रतिदिन की समस्याओं को समझना हमारे  ज़रूरी हो जाता है। 

 

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