साथियों को जानिये: विजय जामवाल

नाम: विजय कुमार जम्वाल

संस्था: प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन

पद: जिला समन्वयक/फील्ड स्टेट रिसोर्स ग्रुप

क्षेत्र: मॅंडी (हिमाचल प्रदेश)

1) अपनी संस्था और काम के बारे मे कुछ बताइए?

मैं विजय जम्वाल हिमाचल प्रदेश के मॅंडी जिला का रहने वाला हूँ| मैं प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन में जिला समन्वयक एवं फील्ड स्टेट रिसोर्स ग्रुप के रूप मे काम करता हूँ| प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन शिक्षा क़ी गुणवत्ता में सुधार करने वाली  एक अग्रणी संस्था है जोकि भारत मे लगभग 25 राज्यों मे कार्य करती है| यह संस्था 1994 से भारत की मौजूदा शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में कार्यरत है| प्रथम संस्था 2005 से पूरे भारत में शिक्षा की स्थिति को जानने के लिए ASER (असर)Annual Status of Education Report नामक सर्वे से बच्चों के शिक्षण स्तर को पूरे समाज के सामने लाने का प्रयास करती है|

2) आप इस क्षेत्र में आपके सफ़र की शुरुआत कैसे हुई?

मैंने अपनी स्नातकोत्तर (post-graduation) अँग्रेज़ी विषय में हिमाचल प्रदेश विश्व विद्यालय से की है| प्रथम संस्था में मैने सन् 2009-10 से संकुल समन्वयक के तौर पर कार्य करना शुरू किया| 2012-13 से मैंने प्रथम के Vocational Training Program में English faculty के तौर पर काम किया| 2014-15 से मैंने बतौर जिला समन्वयक काम करना शुरू किया|

3) अभी तक के सफ़र मे सबसे गर्व की बात क्या रही है?

प्रथम संस्था हिमाचल प्रदेश मे 2006-07 से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही है इसलिए तब से लेकर आज तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर कई तरह के कार्यक्रम चलाए गये| लेकिन 2015-17 के बीच में जिला मॅंडी में उपायुक्त (DM), सर्व शिक्षा अभियान मॅंडी और प्रथम संस्था के सहयोग से उड़ान” नामक कार्यक्रम चलाया गया| यह कार्यक्रम पहले साल 350 संकुल विद्यालयों में चलाया गया| इसकी सफलता को देखते हुए अगले साल इसी कार्यक्रम को पूरे जिला मॅंडी के लगभग 1700 विद्यालयों में स्केल-अप किया गया| इस कार्यक्रम से मैंने एक चीज यह अनुभव की कि यदि किसी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रशासन एवं हम जैसी सामाजिक संस्थाएं एकजुट होकर काम करें तो निश्चित तौर पर उस कार्यक्रम को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता| बल्कि जब जिला स्तर पर उपायुक्त (DM) जैसे अधिकारी स्वयं आगे आकर पहल करें तो मुझे लगता है कि समाज में भी सरकार के प्रति एक बेहतर सन्देश जाता है तथा बाकी लोग भी इससे प्रेरित होते हैं| अतः अपने जिला में एक सफल कार्यक्रम को चलाने के लिए मुझे तथा पूरी प्रथम टीम को गर्व है|

4.) इस क्षेत्र में काम करने की सबसे बड़ी चुनौती?

हम शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हैं तो इस नाते हमें शिक्षा विभाग के अलग-अलग अधिकारियों के साथ कार्य करना होता है| हम लोग अध्यापकों को प्रशिक्षण देने का काम भी करते हैं इसलिए कई बार इस दौरान कई अध्यापकों को नई गतिविधियों और नये तरीकों तथा नई तकनीक के साथ जोड़ने में बड़ी मुश्किल आती है| इस पर अगर अध्यापकों की तरफ बात की जाए तो उनका यही कहना होता है की उन्हें पढ़ाने के अलावा भी बहुत सारे अन्य कार्य करने पड़ते हैं जिस वजह से वे अपने मूल कार्य के ऊपर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाते| इसके अलावा मुझे लगता है जब हम कोई भी कार्यक्रम सरकार के साथ राज्य स्तर पर शुरू करते हैं कहीं न कहीं स्कूल स्तर पर पहुँचते-पहुँचते उसका प्रभाव उतना नहीं रहता| इसके पीछे मैंने ऐसा महसूस किया है कि सरकार को उक्त कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर अधिक निगरानी और जरुरत के आधार पर कमियों पर अधिकारीयों के साथ चर्चा करना बहुत ज्यादा जरुरी है, इससे बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में काफी ज्यादा सुधार होने की सम्भावना है |

5) आगे चलते हुए काम से संबंधित आपके क्या लक्ष्य हैं?

वर्तमान समय में प्रथम संस्था पूरे हिमाचल प्रदेश में प्री-प्राइमरी कार्यक्रम को लेकर कार्य कर रही है| मैं चाहता हूँ कि, मेरे जिला में भी यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक चले ताकि मॅंडी जिला में प्राइमरी विद्यालयों में बच्चों के नामांकन को लेकर आने वाली समस्याओं से निजात मिल सके| अतः इस प्री-प्राइमरी प्रोग्राम को सफल बनाना मेरा अगला लक्ष्य है|

6) इस क्षेत्र में काम करने वाले बाकी लोगों के लिए कोई संदेश या सलाह?

मैं यही संदेश देना चाहूँगा कि हम सब अपना काम जिम्मेदारी और ईमानदारी से करें क्योंकि हमारा काम विद्यालयों में अध्यापकों के साथ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है इसलिए हमें सयंम एवं सहयोगात्मक रूप से काम करके अपने कार्यक्रम को सफल बनाना है| ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और उनके शिक्षण स्तर में बेहतर सुधार हो|

7) शिक्षा को कैसे बेहतर किया जा सकता है? इस पर आपके विचार|

मुझे लगता है कि सरकार को ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जहाँ, अध्यापकों को अतिरिक्त कार्यों से निकालकर उनके पढ़ाने के कार्य में ज्यादा समय मिले| सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जहाँ पर शिक्षकों के पद रिक्त हैं या फिर वे अपने विद्यालय के अलावा किसी अन्य विद्यालय में प्रतिनियुक्त हैं, तो ऐसे में हर स्कूल की जरूरत के आधार पर वहां शिक्षक अवश्य नियुक्त हों| सरकार को एक ऐसा मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए जिसमें स्कूल स्तर पर  ज्यादा से ज्यादा निरिक्षण के साथ-साथ उनकी समस्याओं को समझते हुए उनका उचित निपटारा करना चाहिए ताकि इन सबका बच्चों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े| इसके अलावा मुझे यह भी लगता है कि एक अध्यापक को पढ़ाने के साथ इस बारे में भी अवश्य समझना चाहिए कि उनके छात्र किस परिवेश से आते हैं, आखिर क्यों वो पढ़-लिख नहीं पा रहे| क्योंकि मेरा मानना है कि प्रत्येक बच्चा अच्छा पढ़-लिख सकता है, बस जरुरत उनकी मनोस्थिति समझने की है|

8) आपका मनपसंद खाना क्या है?

मुझे हिमाचली व पंजाबी खाना बहुत पसंद है|

9) आपको क्या करना बिल्कुल पसंद नही है?

मुझे किसी की भी निंदा सुनना पसंद नहीं है|

10) कौन सी जगह देखना या जाना चाहते हैं?

मुझे किसी धार्मिक स्थल की यात्रा करना पसंद है तथा मैं दक्षिण भारत में कहीं भी घूमना चाहता हूँ|