प्रशासन के सितारे : सुनील धीमान

नाम : सुनील धीमान
पद : JBT शिक्षक, शिक्षा विभाग, 
ब्लाक रक्कड, जिला काँगड़ा (हि.प्र.)  

1)आप अभी किस विभाग में और किस पद पे काम कर रहे हैं? आपका मुख्य कार्य क्या हैं?

मैं शिक्षा विभाग में जे.बी.टी. शिक्षक के पद पर कार्य कर रहा हूँ | जबकि इससे पूर्व में प्रोजेक्ट कार्यालय काँगड़ा (एस.एस.ए. एवं आर.एम.एस.ए. ) में आपदा प्रबंधन समन्वयक के रूप में अपनी सेवाएं दे चूका हूँ | वर्तमान में मैं पिछले 4 वर्षों से राजकीय प्राथमिक स्कूल बंडोल, ब्लाक रक्कड, जिला कांगड़ा में शिक्षक के रूप में अपनी सेवायें दे रहा हूँ |

मुख्य रूप से हमारा कार्य बच्चों में सर्वागीण विकास करना है, वह शिक्षा के क्षेत्र में हो या खेल के क्षेत्र में, बच्चों में अच्छे व्यवहार का निर्माण करना, सभी बच्चों को समान दृष्टि से देखना,पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए अलग से समय देना, जाति लिंग भेदभाव से उपर उठकर बच्चों में अच्छे गुणों का निर्माण करना | इसी के साथ-साथ विभाग द्वारा हमारे लिए समय समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते है | मुख्य रूप से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सामान्य प्रशिक्षण, विषय से सबंधित प्रशिक्षण, प्रबंधन सम्बधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से हम बच्चों में विकास की बुनियाद रखने में प्रयत्नशील रहते है|

2) अभी तक के सफर में सरकार से जुड़ के काम करने का अनुभव कैसा रहा है ?

मैं निजी क्षेत्र में कार्य कर हूँ और अब सरकारी क्षेत्र में कार्य रहा हूँ | सरकार के साथ मेरा कार्य करने का अनुभव बहुत अच्छा है, मैं यह मानता हूँ कि स्वयं के अंदर कुछ अलग करने की ललक और अपने कार्य के प्रति लग्न होना बहुत आवश्यक है| इस बात से फर्क नही पड़ता कि आप निजी क्षेत्र में है या सरकारी, सबसे महत्वपूर्ण यह है की आप के अंदर कार्य के प्रति लग्न एक जनून होना जरुरी है आप दोनों ही क्षेत्र में अच्छा मुकाम हासिल कर सकते है | अक्सर हम लोग सरकारी तंत्र से शिकायत करते है कि हमे अपनी तरह से कार्य करने की स्वतंत्रता नही होती है जबकि मुझे अपने उच्च अधिकारियों का पूरा सहयोग मिला है | मैंने जब भी स्कूल स्तर पर कार्य करने की योजना तैयार की है तो हर कदम पर मेरे विभाग, स्टाफ और अभिभावक से मुझे सहयोग मिला है |

3) करियर में अभी तक की क्या बड़ी सफलताएं रहीं हैं? एक या दो के बारे में बताईये?

वर्ष 2018 में देश का सबसे बड़ा सम्मान राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड, राष्ट्रपति से प्राप्त करना और हमारे प्रधानमंत्री जी से सम्मान प्राप्त करना बहुत ही बड़ा सम्मान है जोकि मेरे लिए बहुत अविस्मरणीय पल थे | पर कभी कभी सोचता हूँ तो ऐसा लगता है कि यह मेरी कोई बड़ी सफलता नही है | इसके अलावा मेरे सेवा कार्यकाल में बहुत से पुरस्कार, खंड, जिला और राज्य स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार, स्कूल आपदा प्रबंधन योजना पुरस्कार, राष्ट्रीय स्मार्ट स्कूल पुरस्कार, फोकस हिमाचल शिक्षक पुरस्कार जैसे सम्मान मिलना बहुत गौरव की बात है | परन्तु मैं सच कहूँ तो यह मेरा लक्ष्य नही था | मैंने जो भी ट्रेनिंग कार्यक्रम में भाग लिया, प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान के आधार पर उसे ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वित किया | मैंने सहजता के साथ कार्यक्रम को बनाया और दृढ संकल्प होकर उस में आगे बढ़ता रहा मैंने अपने कार्य को सहज और सरल बनाने का प्रयास किया जिससे इसमें और चीज़े आगे से आगे जुडती गई |

कुछ समय पूर्व की बात है हमारे स्कूल में आयुर्वेद विभाग से कुछ अधिकारी वर्ग स्कूल में विजिट के लिए आये और उन्होंने हमारे स्कूल में बने गार्डन की तारीफ़ की और पेड़-पौधों लगाने के लिए प्रेरित किया और मैं इसी बात से प्रभावित होते हुए अलग अलग तरह के पौधों को लगाया और बच्चों को इन पौधों और इनके फायदों से परिचित करवाया | उदाहरण के रूप में मैंने प्रैक्टिकल शिक्षा पर बल दिया है बच्चा अगर किताबों को पढ़ पढ़ का अगर परीक्षा उतरींण कर रहा है तो वह व्यर्थ है | मैंने बच्चों के आस पास में पेड़-पौधों को लगाकर, उन्हें उनके लाभ एव हानि बताना शुरू किया | ऐसा करते करते बच्चों में प्रक्टिकल ज्ञान को लेकर रूचि पैदा हुई, उसी तरह से मैंने रसोई घर में दालों को दिखा कर उनसे हमे कौन कौन सी प्रोटीन मिलती है, इस तरह की वास्तविक शिक्षा पर मैंने बल दिया | यह बहुत आसान है अगर बच्चों में बेसिक चीज़े स्पष्ट है तो पढ़ाई की अहमियत है मैं भविष्य में भी इस प्रकार से सोच रहा हूँ कि क्या नवाचार किया जा सकता है|

4) इन सफलताओं के रास्ते में क्या कुछ अनोखी मुश्किलें या परिस्तिथियाँ सामने आयी ? इनका समाधान कैसे हुआ ? क्या आप अपने अनुभव से इसके उदाहरण दे सकते हैं?

मैंने कार्य करने को लेकर जो योजना अपनाई उसमे में किसी तरह की मुश्किल का सामना नही करना पड़ा बल्कि मैं यह मानता हूँ कि कोई भी कार्य मुश्किल नही होता है, किसी भी तरह की बाधा उस कार्य को करने की एक प्रक्रिया है|

यह अब हम पर है हमे इसे कैसे देखते है, असफलता के रूप में या चुनौती के रूप में, यह सब हमारी सोच पर निर्भर करता है |

उदाहरण के रूप में बच्चों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए उठाये गए कदम – डिजिटल तकनीक के माध्यम से बच्चों को पढ़ाना और स्मार्ट क्लास रुम तैयार करने में शुरुआत में काफी दिक्कत पेश आई|आप जानते है प्राइमरी स्कूल में कम्पुटर का प्रावधान नही है, परन्तु मैंने अपने अधिकारियों को समझाया कि, मैं डिजिटल तकनीक का उपयोग कर विषय को रुचिकर बनाकर पढ़ाना चाहता हूँ| अधिकारियों ने मुझ पर विश्वास दिखाते हुये मेरे लिए कम्पुटर का प्रावधान किया | इसी का परिणाम है कि मुझे आज स्मार्ट क्लास रूप के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया |

सरकारी स्कूल में अंग्रेजी भाषा में बच्चों के पढ़ाने का निर्णय लिया, यह निर्णय इसलिए भी था कि अगर हमे निजी स्कूलों से मुकाबला करना है तो हमे अपनी कार्यप्रणाली में परिवर्तन करना होगा | सबसे पहले मैंने स्कूल के स्टाफ को प्रेरित किया | ऐसा करने के पीछे मकसद है कि हम बच्चों के नामांकन को बढ़ाने में कामयाब हो पायेंगे और हमारे अध्यापक निजी स्कूल के मुकाबले ज्यादा पढ़े-लिखे है | सभी अध्यापक में मुझ पर विश्वास दिखाते हुए भरोसा दिखाया और इसी का परिणाम है कि हिमाचल में इस समय 60 प्रतिशत प्राइमरी स्कूलों में अंग्रेजी भाषा में पढ़ाया जा रहा है |

5) बेहतर शासन और सेवा वितरण में आप अपना योगदान किस प्रकार देखते हैं?

बेहतर शासन और सेवा वितरण के लिए वर्तमान में डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए ब्लाक और ज़िला स्तर पर अधिकारी वर्ग के साथ विडियो कान्फ्रेंस में माध्यम से उनके द्वारा प्राप्त दिशा निर्देश को अतिशीघ्र ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाता है | जोकि इससे पहले संभव नही हो पाता था|

स्कूल स्तर पर बच्चों को डिजिटल तकनीक के माध्यम से पढाया जाता है जिससे कि बच्चे पढने में रूचि दिखाते है साथ ही साथ मेरे द्वारा प्रयास किये गए है कि जब मैं छुट्टी पर रहता हूँ तो विडियो कन्फ्रंसिंग के माध्यम से बच्चों को पढ़ाता हूँ|जिससे कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नही होती है और बच्चों के कार्य पर पूरा नियंत्रण रहता है और उन पूरी निगरानी रहती है| यह कुछ ऐसे प्रयास है जिन्हें मैं भविष्य में भी जारी रखना चाहता हूँ|और इनमें कुछ नई चीज़े और शामिल करना चाहता हूँ|

6) अपने काम के किस पहलू से आपको ख़ुशी मिलती है?

मैं बच्चों के सर्वागींण विकास को लेकर तरह-तरह के शोध करने को लेकर प्रयत्नशील रहता हूँ | चाहे वह bag-free teaching, smart classroom, herbal garden, practical education और खेल खेल के माध्यम से बच्चों को सिखाने में ज्यादा विश्वास रखता हूँ| इन प्रयोग को करने के बाद बच्चों में जिस प्रकार का परिवर्तन देख रहा हूँ और बच्चों के बौद्धिक विकास जिस प्रकार से वृद्धि हुई है वह मेरे लिए बहुत ख़ुशी की बात है |

7) i) अच्छे अधिकारी के 3 ज़रूरी गुण

1) कर्तव्यनिष्ठा और पूर्ण ईमानदारी 2) कुछ नया करने का एक जूनून और अपने उच्च अधिकारीयों का मार्ग दर्शन को समय-समय पर लेना जरुरी है क्योंकि उनका अनुभव हमारे बहुत काम आता है 3) विफलताओं से घबराकर, निराश होकर उसे अपने मार्ग को छोड़ना नही चाहिए बल्कि यह मान के चलना चाहिए कि मुझे अपनी मंजिल पाने के लिए और अधिक मेहनत करनी है |

ii) काम से सम्बंधित वह ज़िम्मेदारी जिसमे सबसे ज़्यादा मज़ा आता हो

मैं जिस कार्य में जुड़ा हूँ उस कार्य को करने में पूरा आनंद लेता हूँ और सच कहूँ तो मैं इसे कार्य की तरह नही समझता हूँ, यह मेरा एक संकल्प है कि मैं अपने कार्य से समाज में कुछ परिवर्तन ला सकूँ | जोकि बाकी समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने |

iii) अपने क्षेत्र में कोई ऐसा काम जो आप करना चाहते हो मगर संरचनात्मक या संसाधन की सीमाएँ आपको रोक देती हैं?

मैं जिस क्षेत्र में कार्य कर रहा हूँ, उसमे संरचनात्मक या संसाधन से सम्बधित ऐसी कोई बाधा नहीं जो मुझे मेरे कार्य करने से रोकती है| बल्कि मुझे हर तरह से अपने विभाग के अधिकारियों से सहयोग मिला है | वह मुझे हर कदम पर सहायता प्रदान करते है|