प्रशासन के सितारे: कमलेश चढार

नाम: कमलेश चढार

पद : सर्व शिक्षा अभियान प्रोग्रामर, ज़िला सागर, मध्य प्रदेश

1)आप अभी किस विभाग में और किस पद पे काम कर रहे हैं? आपका मुख्य कार्य क्या हैं?

में सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश के सागर ज़िले में प्रोग्रामर के पद पर कार्य कर रहा हूँ | यह एक टेक्निकल पोस्ट है, जिसमे एनुअल वर्क प्लान पर कार्य करना, स्कूल से सम्बंधित सभी प्रकार के डाटा पर कार्य करना, डाटा का प्रशिक्षण देना और फिर उसका मूल्यांकन करना होता है | सागर ज़िले के 4000 स्कूल डाटा पर कार्य करते है | बच्चो के समग्र आईडी पर कार्य करते है |

2) अभी तक के सफर में सरकार से जुड़के काम करने का अनुभव कैसा रहा है ?

अनुभव अच्छा रहा, सरकार के साथ कार्य करने में एक संतुष्टि मिलती है, मीटिंग रिव्यु में अपनी वास्तविक समस्या बताते है, और फिर उस वास्तविक समस्या का समाधान मिलता है, तो अच्छा लगता है | योजना को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के बाद जब उसके परिणाम सही से नहीं मिलते है तो दुःख होता है | उदहारण के तोर पर, अगर हम स्कूल की बात करे स्कूल में कभी भी 100% उपस्थिति नहीं रहती है, कभी 60% कभी 70% और यह भी समान बच्चे नहीं होते है, आज A नाम का बच्चा अनुपस्थित है तो कल B नाम का बच्चा अनुपस्थित रहेगा | यह अनिरन्तता हमारे प्रशासनिक कार्य के लिए काफी घातक है | जिससे हमें सही परिणाम नहीं मिल पाते है, और यह स्थिति शिक्षकों के साथ भी होती है, क्योंकि शिक्षको में भी 10% शिक्षक अपने व्यक्तिगत कार्य के लिए स्कूल में अनुपस्थित रहते है |

3) करियर में अभी तक की क्या बड़ी सफलताएं रहीं हैं? एक या दो के बारे में बताईये?

हमारी उपलब्धि यह है की, पूरे मध्यप्रदेश में हमारा सागर ज़िला हमेशा टॉप 10 में रहा है | और यह हमें गर्व सा महसूस कराता है की हम हमेशा आगे रहे|

4)इन सफलताओं के रास्ते में क्या कुछ अनोखी मुश्किलें या परिस्तिथियाँ सामने आयी ? इनका समाधान कैसे हुआ ? क्या आप अपने अनुभव से इसके उदाहरण दे सकते हैं?

हर कार्य में मुश्किलें आती है, हम हमारे सिनिअर से संपर्क करते है, हमारी मासिक रिव्यु मीटिंग होती है, विडियो कांफोरेंस होता है, व्हाट्स अप ग्रुप बने है, जिसपर हर समस्या को बोला जाता है, और फिर उसका समाधान भी प्राप्त होता है | अभी सबसे बड़ी समस्या उभरकर आ रही है वह है शिक्षकों का समय पर स्कूल नहीं पहुँचना और समय से पहले स्कूल को बंद करना | इसका विशेष प्रभाव बच्चों के पढ़ाई पर पड़ता है | निरीक्षण के दौरान पाई गए समस्या पर तुरंत निर्णय लेना हमारे हाथ में नहीं है, इसके लिए हमें सीईओ या कलेक्टर सर के निर्णय पर निर्भर रहना पड़ता है | कार्य के साथ साथ पॉवर मिलना भी जरुरी है, जिससे कार्य काफी बेहतर हो सकते है |

5) बेहतर शासन और सेवा वितरण में आप अपना योगदान किस प्रकार देखते हैं?

बेहतर शासन और सेवा वितरण के लिए सरकार द्वारा काफी शिकायत निवारण की योजनाएं चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपनी समस्या उच्च अधिकारी तक पहुँचा सकते है, इसके अलावा आज हम जिस पोजीशन पर है, वह हमें सीधे प्राप्त नहीं हुई है, इसके लिए हमें भी बहुत मेहनत करनी पड़ी है, कई ऑफिस के चक्कर काटने पड़े है | आज जो भी व्यक्ति हमारे पास अपनी समस्या लेकर आता है, तब हमे पता होता है की वह कितना परेशान है, और वह कुछ अपेक्षाएं लेकर हमारे पास आया है | इसलिए जितने जल्दी हो सके अगर उस समस्या का समाधान हम कर सकते है तो तुरंत कर दे| ताकि वह संतुष्ट होकर हमारे यहाँ से जाये|

6) अपने काम के किस पहलू से आपको ख़ुशी मिलती है?

सागर को जब राज्य से आधिकारिक पत्र आता है क्योंकि ज़िले ने वह कार्य समय सीमा में रहकर पूरा किया है, तो बहुत ख़ुशी होती है। दूसरा हमारे पास कही शिक्षक आम नागरिक अपनी समस्या लेकर आते है, और जब वह संतुष्ट होकर जाते है तब बड़ी ख़ुशी मिलती है |

7) अच्छे अधिकारी के 3 ज़रूरी गुण क्या हैं?

1) समयसीमा को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए, दुसरे अधिकारिक ज़िम्मेदारियों को अतिरिक्त समय में पूरा करना चाहिए |
2) आपके पास अलग अलग प्रकार के कार्य है, तो उसे आपको ग्रुप करना चाहिए, प्राथमिकता बेस पर कार्य करना चाहिए |
3) सहकर्मियों के साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए | सभी कार्य एक दूसरे पे निर्भर होता है, सबका कुछ ना कुछ हिस्सा उस कार्य में लगा होता है, इसलिए सबसे अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखना बहुत ज़रूरी है |

8) काम से सम्बंधित वह ज़िम्मेदारी जिसमे सबसे ज़्यादा मज़ा आता हो ?

बॉस आपके साथ मिलकर कार्य कर रहे हो, तब सबसे ज्यादा मज़ा आता है, क्योंकि निर्णय आमने-सामने होता है, और कार्य भी तुरंत होता है, कार्य और निर्णय में पारदर्शिता रहती है, क्योंकि कार्य दोनों के सहमति से होता है |

9) अपने क्षेत्र में कोई ऐसा काम जो आप करना चाहते हो मगर संरचनात्मक या संसाधन की सीमाएँ आपको रोक देती हैं?

अपने पसंद के स्कूल में जाकर 2 घंटे पढ़ाऊं और इसकी तैयारी के लिए मुझे 2 दिन चाहिए | पर वह मुझे मिलेंगे नहीं | क्योंकि जो ज़िम्मेदारी मुझे दी गई है, उसे मुझे पूरा करना है | इस प्रकार से संरचनात्मक सीमाएं हमें रोक देती है |