ज़रूरी है, ऑनलाइन शिक्षा की ओर भी क़दम बढ़ाना

मेरा नाम नकी अहमद है और मैं वर्ष 2005 से प्रथम संस्था से जुड़ा हूँ तथा सरकार के साथ साझा प्रयास से संचालित कार्यक्रमों का अनुश्रवण एवं अनुसमर्थन कर रहा हूँ| संस्था पिछले कई वर्षों से बच्चों के शिक्षण स्तर की जांच करने के साथ-साथ उनकी कमियों में सुधार करने के लिए नियमित प्रतिबद्ध है|

प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने हेतु संस्था और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, जन शिक्षा निदेशालय, जीविका एवं कई संस्था द्वारा मिलकर अनेक कार्यक्रमों को संचालित किया जा रहा है| जैसे बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के साथ विशेष शिक्षण कार्यक्रम, जन शिक्षा निर्देशालय के साथ ‘कोई बच्चा पीछे नहीं माता भी छूटे नहीं’ एवं जीविका के दीदियों के साथ एवं उनके बच्चों की बुनियादी शिक्षा को बेहतर बनाने हेतु संस्था के उद्देश्य ‘हर बच्चा स्कूल में और अच्छे से पढ़े’|

कोरोना स्थिति में क्या कर रहे हैं?

वर्तमान समय में पूरा देश कोरोना संक्रमण से बुरी तरह से प्रभावित है जिस कारण सभी शैक्षणिक संस्थानों में पठन-पाठन बाधित है| एक जिम्मेदार संस्था होने के नाते हमने शिक्षण कार्यों को आगे भी जारी रखा है ताकि किसी भी तरह से बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान न पड़े| इसी क्रम में हम सभी साथी अपने घर से अपने कार्यक्षेत्र में पूर्व से बने लाइब्रेरी समूह के सभी बच्चों/अभिवावक के व्हाट्सएप नंबर एवं साधारण नंबर पर करोना में ‘थोड़ी मस्ती थोड़ी पढ़ाई’ एवं टेक्स्ट मेसेज प्रतिदिन भेजते हैं| जिसके लिए हम मनपसंद कहानी लेखन एवं चित्रकला रंगोली आदि बनाना सुनिश्चित करते हैं| जिन बच्चों के घर पर एंड्राइड फोन नहीं है, उन बच्चों को टेक्स्ट मैसेज के द्वारा भी या फोन करके कहानी सुनाते हैं| फिर वह सभी बच्चे उस कहानी को पढ़कर समझकर रोजाना फीडबैक भेजते हैं और सुनाते भी हैं| इसके साथ ही अभिभावकों एवं सभी जनप्रतिनिधियों को कोविड-19 महामारी से बचाव पर बातचीत करते हैं|

प्रतिदिन की जाने वाली गतिविधियां

1. उपलब्ध सभी व्हाट्सएप नंबर पर बच्चों के पठन-पाठन से संबंधित गतिविधि भेजना
2. जिन बच्चों के पास व्हाट्सएप नंबर नहीं है, उन बच्चों के साथ टेक्स मैसेज के द्वारा पठन पाठन से संबंधित गतिविधि भेजा जाता है|
3. प्रतिदिन 25 से 30 बच्चों एवं अभिभावकों के साथ संपर्क स्थापित कर मैसेज के बारे में बातचीत कर उनसे फीडबैक लिया जाता है|
4. ब्रॉडकास्ट ग्रुप के द्वारा सभी साथी एवं शिक्षा सेवकों के साथ ‘थोड़ी मस्ती थोड़ी पढ़ाई’ से संबंधित प्रतिदिन गतिविधियों को भेजा जाता है, उससे गतिविधि से संबंधित बातचीत कर उन्हें फीडबैक लिया जाता है|
5. सेल्फ स्किल के लिए विषय वार दिए गए अध्याय को पढ़ने के उपरांत असाइनमेंट दिया जाता है, उसे खुद से तैयार कर राज्य कार्यालय को भेजा जाता है|
6. जूम कॉल के माध्यम से सभी साथियों के साथ बातचीत कर कार्यक्रम को बेहतर बनाने हेतु नए नए विचारों का समावेश किया जाता है|

शुरुआती दिनों में सभी बच्चों व अभिभावकों को मोटिवेट करने में थोड़ी कठिनाई हुई| हालाँकि अभिभावक चाहते थे कि उनके बच्चे किसी भी तरह पढ़ें| जिन बच्चों के घर या परिवार के सदस्यों के पास स्मार्ट फ़ोन हैं, ऐसे बच्चों का व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर प्रतिदिन 9 से 10 बजे तक शैक्षणिक पाठ या गतिविधियों को भेज दिया जाता है| 10 से 11 के बीच बच्चों के उपलब्ध मोबाइल नंबर पर भेजे गए पाठ या गतिविधियों के बारे में बातचीत किया जाता है| पढ़े गए पाठ के संबंधित गतिविधियों को लिख कर प्रतिदिन बच्चों के द्वारा व्हाट्सएप्प ग्रुप में भेजा जाता है तथा यह कार्यक्रम सभी तरह के फोन पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं| जो बच्चे पाठ को पढ़ नहीं सकते उनको पाठ पढ़कर फोन के माध्यम से सुनाया भी जाता है और उनसे प्रतिक्रिया ली जाती है| सभी बच्चे सकारात्मक सोच के साथ दी गयी गतिविधियों को संपादित कर रहे हैं|

हमारी नियमित कोशिश है कि इस तरह के कार्यक्रम से बच्चे ज्यादा से ज्यादा सीख पाएं तथा अभिभावकों का इसी तरह से सहयोग मिलता रहे| मुझे लगता है कि आने वाला समय जैसा भी हो लेकिन जरुरी है कि बच्चे ऑफलाइन शिक्षा के साथ-साथ ऑनलाइन शिक्षा में भी खुद को सहज कर पाएं| इसके लिए सरकार को सरकारी विद्यालयों में वे सभी संसाधन उपलब्ध कराये जाने चाहिए जिससे ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा मिल सके| इसी से हमारे देश के ये बच्चे भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो पाएंगे|

(नकी अहमद प्रथम संस्था के लिए बिहार में काम करते हैं जून 2019 में उन्होंने हम और हमारी सरकार कोर्स में हिस्सा लिया था)