हमारे प्रतिभागी ओमप्रकाश का अनुभव – स्वच्छ भारत मिशन के पैसे कहाँ फँसे हुए थे?

मेरा नाम ओमप्रकाश शर्मा है और मैं जयपुर जिले के चाकसू ब्लॉक का रहने वाला हूँ। मैंने नेहरू युवा केंद्र जयपुर में ब्लॉक यूथ कोऑर्डिनेटर के रूप में 2 वर्ष का सफलतम कार्यकाल पूर्ण किया है, और अभी वर्तमान में दैनिक भास्कर जयपुर में पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा हूँ ।

सामाजिक सेवा के क्षेत्र में हमारे गाँव के युवा मंडल के माध्यम से आया, जिसमें लगभग 15 साल की उम्र में सदस्य के रूप में जुड़ा और आज उसके अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहा हूँ। सन 2009 में मैंने कक्षा 12 उत्तीर्ण की, इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए में जयपुर आ गया और यहीं से सामाजिक सेवा में अपना योगदान देने लगा सन 2009 से पार्ट टाइम इवेंट मैनेजमेंट के काम करने लगा जिनमें सामाजिक समानता, लैंगिक समानता, जनसंख्या नियंत्रण आदि कई बिंदुओं पर विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया और इस दौरान राजस्थान के विभिन्न जिलों एवं देश के अन्य राज्यों का दौरा किया जिससे कि वहां की सामाजिक परिस्थितियों को एवं ग्रामीण परिस्थितियों को करीब से देखने का अनुभव मिला।

सन 2014 में मैं वापस अपने ब्लॉक चाकसू में आ गया और यहाँ पर एनजीओ के साथ मिलकर सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालयों में पोषाहार एवं अन्य सुविधाओं का मूल्यांकन किया। सन 2016 में नेहरू युवा केंद्र जयपुर में मेरा चाकसू ब्लॉक पर ब्लॉक युवा समन्वयक के पद पर चयन हुआ। इस दौरान मैंने ब्लॉक के लगभग सभी गांव में जाकर जहाँ युवा मंडल नहीं बने हुए थे, वहाँ  युवा मंडलों का गठन किया और जो पहले से बने हुए थे उनको सक्रिय किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, अपना गाँव अपना सम्मान, स्वच्छ भारत, जल है तो कल है, परिंडा अभियान एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य विभिन्न मुद्दों को लेकर जागरूकता अभियान चलाए और कार्य किया।

लोगों का काम करवाने के दौरान कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा और पंचायत प्रशासन की बारीकियों को एवं उसकी जटिलताओं को बारीकी से देखने का अनुभव हुआ। नेहरू युवा केंद्र जयपुर में कार्य करने के दौरान ही में सेंटर फॉर रिसर्च पॉलिसी की टीम के संपर्क में आया और मेरे अन्य युवा साथियों के साथ हमने ‘हम और हमारी सरकार’ का कोर्स किया, जिसमें सरकारी मशीनरी कैसे काम करती है, योजनाओं के लिए पैसा कहाँ से आता है, योजनाएं कहाँ पर बनती है और उस पैसे का प्रवाह तंत्र किस प्रकार का होता है यह जानने को मिला, जो कि हमारे क्षेत्र में काम करने के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हुआ।

इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण मेरे साथ घटित हुआ हमारी पंचायत में एक गरीब परिवार है उसने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण करवा लिया था और केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान के लिए अपने सारे कागज पंचायत में जमा करवा दिए थे, लेकिन साल भर तक उसके खाते में पैसा नहीं आया और वह कभी पंचायत तो कभी बैंक के चक्कर लगा रहे  थे। जब यह जानकारी मेरे पास आई तो मैंने मालूम किया कि समस्या कहाँ पर आ रही है।

मालूम करने पर पता चला कि पंचायत समिति से  खाते में पैसा तो ट्रांसफर हो चुका था लेकिन वह वास्तविक लाभार्थी के खाते में  ना होकर, किसी दूसरे के खाते में चला गया था। यहाँ पर मैंने ‘हम और हमारी सरकार’  कोर्स में अर्जित ज्ञान का उपयोग किया और संबंधित परिवार को अनुदान की राशि दिलाई।

पहले कई ऐसी समस्याएं थी जिनका पता तो था, लेकिन उनके निराकरण के लिए कोई योजना नहीं थी। यह कोर्स करने के बाद उनका किस तरह निराकरण किया जा सकता है उसका पता चला। ‘हम और हमारी सरकार’  कोर्स सामाजिक क्षेत्र में आर्थिक क्षेत्र में या आप किसी भी सेक्टर में काम करें तो उसमें हर प्रकार से मददगार साबित होगा क्योंकि इस कोर्स के द्वारा हमें यह मालूम चलता है कि सरकार कैसे बनती है सरकार कैसे काम करती है. सरकार को चलाने में क्या-क्या समस्याएं आती है  सरकार की जनता के प्रति क्या जवाबदेही है और वह अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को कैसे पूरा करती है। सरकार वास्तव में तो काम करना चाहती है लेकिन उसका प्रशासनिक ढांचा ऐसा बना हुआ है इतना जटिल है कि उसके द्वारा चलाई गई जन कल्याणकारी योजनाएं पूर्ण रूप से निचले स्तर तक नहीं पहुँच पाती है। इसके बाद हमने इसी संस्था के साथ मिलकर आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार की स्थिति को जानने के लिए सर्वे किया। अभी वर्तमान में दैनिक भास्कर में संवाददाता के रूप में ग्रामीण क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का कार्य कर रहा हूँ।

ओमप्रकाश  शर्मा ने  नेहरु युवा केंद्र के साथियों के साथ  2017  में  ‘हम और हमारी सरकार ‘ में हिस्सा लिया था  यहाँ लिखे गए सारे विचार केवल लेखक के हैं और किसी भी तरह से लेखक की संस्था या अकॉउंटबिलिटी इनिशिएटिव के विचारों को व्यक्त नहीं करते हैं।