साथियों को जानिये: शुभम चौधरी

 

नाम: शुभम चौधरी

संस्था: पहल जन सहयोग विकास संस्थान

क्षेत्र: मध्य प्रदेश

1)आप अपने बारे में, अपनी संस्था और काम के बारे में कुछ बताईये?                                           

मेरा नाम शुभम चौधरी है और मैं वर्तमान में ‘पहल जन सहयोग विकास संस्थान’ नाम की संस्था में काम करता हूँ जो लिंग आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए कार्य करती है| वर्तमान में हम मध्य प्रदेश के खरगोन जिला में शिक्षा पर विशेष रूप से काम कर रहे हैं| हमारी संस्था ने स्कूल न जाने वाली 6-14 वर्ष तक की बालिकाओं के लिए विशेष रूप से सेंटर चला रखे हैं| इन सेंटर में नियमित रूप से इन बच्चियों को शिक्षा दी जाती है तथा यह सुनिश्चित किया जाता है कि वे अपनी आयु के अनुरूप बेहतर और सही सीख पाएं| हमारा कार्यक्षेत्र खरगोन के अलावा इंदौर, बड़वानी, बुरहानपुर जिले में भी है जहाँ हम स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका को लेकर भी कार्य कर रहे हैं|

2) आप इस क्षेत्र में काम कब से कर रहे हैं और आपके सफर की शुरुआत कैसे हुई ? 

मैं इस क्षेत्र में वर्ष 2018 से हूँ| मेरा ‘पहल’ संस्था में आने का मुख्य उद्देश्य यही था कि मैं बच्चों की शिक्षा को लेकर काम करना चाहता था इसलिए मैंने इस कार्य को चुना| मैं आगे भी इसी क्षेत्र में कार्य करते हुए ऐसी बच्चियों की शिक्षा को सुधारने का काम करना चाहता हूँ जो किसी कारण स्कूल नहीं जा पा रहीं हों| 

3) अभी तक के सफर में सबसे गर्व की बात क्या रही है ? 

अपनी संस्था के माध्यम से हम अभी तक 1100 बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ा है जोकि पूर्व में बाल मजदूरी करती थीं | हमने ऐसी बच्चियों के घर वालों को उन्हें पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जो हमारे लिए बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य था| बच्चियों के घर वालों को उनकी पढ़ाई में किसी तरह की रूचि नहीं थी क्योंकि वे चाहते थे कि बच्चियां मजदूरी करके घर को चलाये| ऐसी स्थिति में हमने परिवार वालों को रोजगार उपलब्ध करवाने का कार्य किया| हमने उन्हें दलिया बनाने का कार्य दिया जिससे उन परिवारों की आमदनी शुरू हो गयी इससे अब बच्चियां स्कूल जाने लगीं| हमने कुल 800 बच्चों को जो सीधे बालश्रम में शामिल थे उन्हें वहां से निकाल कर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जिसमें एक ही परिवार की 3 बहनों के पढ़ाई की कहानी मुख्यमंत्री के पोर्टल भी प्रदर्शित हुई| अभी हम खड़गोन जिला में 20 नए सेंटर खोलने जा रहे हैं जिसमें 600 से आधिक बच्चियां अपनी पढ़ाई करेंगी| इसी के साथ हमने संस्थागत प्रस्ताव को बढ़ाया, गाँव में मिथक कारणों से होने वाले मातृ मृत्यु व् शिशु मृत्यु को कम किया| कुपोषित माँ व बच्चों को पोषण से जोड़ा| मैं अपने आपको बेहद भाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे इन तरह के सभी कार्यों से जुड़ना का मौका मिला है|

4) इस क्षेत्र में काम करने की सबसे बड़ी चुनौती (सरकार के साथ तथा लोगों के साथ)?

कुछ चीजें हैं जो हमें अपने काम के दौरान काफी देखने को मिली हैं तथा हमारे काम में चुनौती बनकर रहते हैं जैसे:

  • सरकारी तंत्र में लोग कागजी कार्यवाही के चलते समय की नाजुकता को कई बार समझ ही नहीं पाते जिससे काम का वह प्रभाव नहीं मिलता जो वास्तव में मिलना चाहिए | 
  • सरकारी कर्मचारी नियम से इतने बंधे  होने का दावा कर बहुत से गैरजरूरी काम तो कर लेते है परन्तु आवश्यक कार्यों को छोड़ देते हैं | 
  • सरकारी फण्ड समय पर नहीं मिलता जिससे काम में दिक्कत होती है |
  • लोगों के पास खानेपीने के संसाधन इतने कम है कि कई बार मुद्दे की गंभीरता तो समझ जाते है पर कमाने के चलते गतिविधियों के लिए समय नहीं देते | 
  • कुरीतियों में अधिक विश्वास व् सामाजिक मानदंड के कारण बदलाव के लिए कई बार तैयार नहीं होते|
  • समुदाय समस्याओं को सरकार की जिम्मेदारी समझ कर ध्यान नहीं देते |
5) आगे चलते हुए, काम से सम्बंधित आपके क्या लक्ष्य हैं?
  • अधिक से अधिक बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना 
  • संवैधानिक मूल्यों पर समझ को बढ़ावा देना व् संविधान में लोगों की रूचि/समझ बढ़ाना 
  • बालश्रम से जुड़े बच्चों को शिक्षा व् कौशल से जोड़ना 
  • लिंग आधारित भेदभाव को कम करने के प्रयास करना                                                                       
6)इस क्षेत्र में काम करने वाले बाकी लोगों के लिए कोई सन्देश या सलाह? 

काम की बेहतर प्लानिंग से काम का उचित परिणाम मिलने की सम्भावना बढ़ जाती है| लक्ष्य के प्रति समझ स्पष्ट होना चाहिए व् काम के प्रति लगन काम को गति देती है|  

कुछ चीजें हैं जो हमें समझना जरुरी है जैसे:

  • हम सभी जब इस सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे है तो हमें प्रशासनिक एव राजनीतिक दोनों व्यवस्था को अच्छे से समझना पड़ेगा| 
  • हमें समझना होगा कि पूरा सिस्टम कैसे चलता है और हमें सरकार के साथ अच्छे तरीके से तालमेल भी बिठाना होगा| इसलिए हमें अपनी बात भी उन्हें बतानी पड़ेगी तथा उनकी बात को भी समझना पड़ेगा 
  • हमें सरकार ने जो मंच दिए हैं उनका पूरा इस्तेमाल करना चाहिए 
  • सरकार के साथ जब भी मौका मिले हमें अपनी बात या समस्या पूरे दम के साथ रखनी होगी 
7) कौन सी जगह देखना या जाना चाहते हैं? 

मुझे हिमाचल प्रदेश बहुत पसंद है, जिस तरह से वहां पर पर्यटक देश-विदेश से आकर प्रभावित होते हैं, मैं भी वह अनुभव करना चाहता हूँ|