साथियों को जानिये: निराली शुक्ल

नाम : निराली शुक्ल
संस्था : महिला हाउसिंग ट्रस्ट
पद : ट्रेनर
क्षेत्र (जगह) : अहमदाबाद, गुजरात

1) अपनी संस्था और काम के बारे में कुछ बताईये?

मैं गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहेर में महिला हाउसिंग ट्रस्ट (MHT) संस्था में ट्रैनर का काम करती हूँ । MHT संस्था जिस विस्तार में काम करती है उसी विस्तार के सभी CBO (कम्युनिटी बीएड्स ऑर्गनाइजेशन) CAG(कम्यूनिटी एक्शन ग्रुप) की बहने और विकासिनी मंच की आगेवान बहनों को MHT संस्था के माध्यम से प्रोग्राम अनुसार तालीम देने का काम करती हूँ । गुजरात महिला हाउसिंग ट्रस्ट की स्थापना सन 1994 को अहमदाबाद गुजरात मे हुई थी। MHT असंगठित क्षेत्रों में कार्यकृत महिलाओं के सशक्तीकरण एवं उनके आवास और उसके आस-पास के वातावरण के उद्धार की और काम करता है। इस 25 वर्षों में इसका विस्तार हुआ और आज यह देश के 9 राज्यो में काम करता है।भारत मे 9 राज्यो के अलावा MHT बांग्लादेश और नेपाल में भी काम करता है। MHT अतः क्षेप के विविध क्षेत्र बुनियादी सेवा ओ के वितरण के लिए सरकार+ सेवा प्रदाता+ बस्तिया — MHT एक कड़ी है।

2) आप इस क्षेत्र में काम कब से और आपके सफर की शुरुआत कैसे हुई ?

मैंने अपनी ग्रेज्युएशन तक कीपढाई सायनस फैक्लटी में केमिस्ट्री सब्जेक्ट में सन 2009 में पूरी की है।में एक मध्यमवर्गी परिवार से हूँ। मुझे अपनी पढ़ाई के समय से ही काम करना पसंद था, पर ग्रेज्युएशन पूरी होने के बाद 2010 में MHT संस्था में ट्रेनर के पद पर काम करना शुरू किया। उससे पहले 2009 में 1 साल तक अहमदाबाद स्थित सेवा बैंक(श्री महिला सेवा सहकारी बैंक,) में काम किया है। MHT संस्था से जुड़ने के बाद से अभी तक वर्तमान समय मे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है।

3) अभी तक के सफर में सबसे गर्व की बात क्या रही है ?

साल 2009 से में अलग अलग प्रोग्राम के माध्यम से लोगों से जुड़ी हुई हूँ। इसमे काफी सारी चुनौतियों का सामना भी मैंने किया हुआ है।अलग-अलग प्रोग्राम के अंर्तगत जो लोग MHT संस्था से जुड़े हुए होते है, उनका MHT संस्था पर भरोसा और धीरज एक गर्व की बात है।
काफी सारे प्रोग्राम चलते है, जिस में हमे खुद सरकार से जुड़कर काम करना पड़ता है। सरकार अपनी चुनोतियाँ होती है, पर इसके अंर्तगत जो MHT संस्था से जुड़े हुए विस्तार है वो लोग और उनके आगेवान बहनो का अङ्ग रहना और उनका धीरज और MHT संस्था के सहकार उनपे भरोसा रखना जो बहुत ही गर्वनिय बात है।आगे भी सरकार+सेवा प्रदाता+बस्तिया —-Mht संस्था एक कड़ी का यह रिश्ता बना रहे। यह सब हमारे प्रयासो से संभव हो पाया है और इसमें पूरी MHT संस्था की टीम का योगदान है।

4) इस क्षेत्र में काम करने की सबसे बड़ी चुनौती ?

जैसे कि हमारी नौकरी में हमे आम जनता से डील करना होता है, जिसमे जनता पढ़ी-लिखी भी होती है और कम पढ़ी-लिखी भी,कई बार हमारी बातों एवं योजना से सभी वर्ग के लोग संतुष्ट नही हो पाते है। जो कि विकास के मार्ग में अवरोध पैदा करती है।

5) आगे चलते हुए, काम से सम्बंधित आपके क्या लक्ष्य हैं?

वर्तमान समय में ‘हम और हमारी सरकार’ के अंतगर्त जो भी गतिविधियाँ थी, वो संस्था से जुड़ी हुए आगेवानों को उनकी सरल भाषा मे समझाने का लक्ष्य है।वो लोग गवर्नन्स सिस्टम को बारीकी से समझ पाए और साथ ही मैं दूसरे प्रोग्राम के अंतगर्त भी सहकार दे सकूँ यही मेरा आगे का अभी लक्ष्य है ।

6) इस क्षेत्र में काम करने वाले बाकी लोगों के लिए कोई सन्देश या सलाह?

हमारी जॉब आम जनता से जुड़ी हुईं है और उनके लिए योजना बनती है और उन्हें साथ मे लेकर चलना होता है। लोगो का काम नि: स्वार्थ भाव से करे। अंत: में, अपने सहकमिर्यों को संदेश देना चाहूँगी कि ज़िम्मेदारी का पालन ईमानदारी से करे और आम जनता को साथ मे लेकर चले और योजनाओं के बारे में आम जनता तक संदेश ठीक तरह पहुँचाये । योजना अंर्तगत जो भी काम है वो अपनी ज़िम्मेदारी तो है ही, पर पहले समझे कि इससे जुड़े जरूरतमंद लोगों के लिए कर रहे है। काम को पूरा करने के लिए टीम वर्क होना ज़रूरी है।

7) आपका मनपसंद खाना क्या है?

गुजराती फ़ूड , पंजाबी फ़ूड और चाट खाना पसंद है। चाय या कॉफ़ी पीने की मुझे रोज़ पीने की आदत है मगर ज़्यादा पीना सेहत के लिए हानिकारक है इसलिए कुछ महीनों से कम करने की शुरुआत की है।

8) आपको क्या करना बिलकुल पसंद नहीं है?

मैं अपने काम प्रोफेशनली और प्रैक्टिकली के साथ करना पसंद करती हूँ और जो सिर्फ बड़ी बड़ी बात करते है पर काम पूरा करने लिए कोई प्रयास भी नहीं करते और दूसरे के कान भरते रहते है वह लोग मुझे पसन्द नही है।

9) कौन सी जगह देखना या जाना चाहते हैं?

मुझे हिल स्टेशन और समुद्रतट की जगह पसंद है। ट्रैकिंग पर जाना बहुत पसंद है। अभी तक मे नही गई हूँ पर आगे फ्यूचर में जाना पसंद करुँगी। मैं भारत मे हिमाचल प्रदेश, मानसरोवर और भारत के बाहर भी दूसरे देशों में ऐसी जगह पर जाना चाहूँगी।