लोगों को उनका हक़ मिले!

मेरा नाम नसरुद्दीन है और मैं इब्तिदा संस्था में अधिकार कार्यक्रम के अंतर्गत काम कर रहा हूं| अभी हाल ही में जैसा कि आप सभी लोग परिचित हैं कि कोरोना महामारी की वजह से काफी समय लॉकडाउन रहा तथा इससे हम-आप सभी लोगों के दैनिक जीवन में अचानक से बदलाव देखने को मिला, जिसके बारे में शायद कभी कल्पना भी नहीं की थी|

अगर देखा जाए तो आम जनता के साथ-साथ सरकार के लिए भी ये समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है| ये एक ऐसी महामारी है जिससे ये अंदाजा कोई नहीं लगा सकता कि वास्तव में इसका अंत कब और कैसे संभव होगा| अगर राजस्थान के अलवर जिला की बात करूँ तो यहाँ पर भी इब्तिदा संस्था के फील्ड कार्यकर्ताओं ने ग्राम पंचायत में जाकर सरपंच सचिव से बात कर राशन किट का वितरण कराया| हमने दुकानों व पानी की टंकियों, दीवारों व सार्वजनिक स्थलों पर पंपलेट लगाना, लोगों को बेनर द्वारा समझाना व सरकारी स्कीम के लाभ की जानकारी देना इत्यादि किया| लेकिन व्यक्तिगत अथवा संस्था के तौर पर काम करते हुए ये सब कई बारी इतना आसान भी नहीं रहता|

राजस्थान सरकार ने घोषणा की थी कि हर ग्राम पंचायत में सेनेटाइजर के छिड़काव के लिए 50000 रुपये की राशि दी जायेगी लेकिन उसके बावजूद भी कुछ गांव में छिड़काव नहीं किया गया| ऐसे में जब लोगों द्वारा राजस्थान सरकार के शिकायत निवारण नंबर 181 पर शिकायत की तो उसके बाद उन पंचायतों ने सेनेटाइजर छिड़काव किया गया| हमने लोगों को इस हेल्पलाइन नंबर का इस्तेमाल करने के लिए भी जागरूक किया ताकि यदि लोग किसी समस्या से जूझ रहे हों तो वे इसके माध्यम से अपनी शिकायत सरकार तक पहुंचा सकते हैं| ऐसे ही मनरेगा योजना में भी बदलाव देखने को मिल रहा है क्योंकि शुरुआत में तो कार्य देने को लेकर कुछ पंचायतों की भूमिका बहुत खराब रही है| लोग काम तथा जॉब कार्ड के लिए चक्कर काटते रहते लेकिन उसमें भी बनाना बाजी करना रहता था| लेकिन जब लोगो को जानकारी दी गयी कि 6 नंबर फ़ॉर्म भरकर सचिव साहब से काम मांगा जा सकता है तो धीरे-धीरे उससे काम मिलना शुरू हुआ|

जबसे राजस्थान सरकार द्वारा शिकायत निवारण हेतू हेल्पलाइन नंबर 181 शुरू हुआ है तबसे लोगों की समस्याएं काफी हद तक दूर हो रही हैं| अब चाहे राशन डीलर द्वारा राशन का गबन करने से सम्बंधित शिकायत हो या फिर किसी अन्य योजना का लाभ न मिल पाने से जुड़ी समस्या हो, लोग अब धीरे-धीरे अपने अधिकारों के लिए बोलने लगे हैं|

जब हम लोगों के हक़ के लिए मांग करते हैं तो कई बार कुछ जनप्रतिनिधि हमें कहते हैं कि हम जनता को भड़काते हैं| ऐसे में कई बार फील्ड में काम करते हुए डर भी लगता कि कभी ऐसे छिट-पुट लोग किसी तरह से नुकसान न पहुंचा दें लेकिन बावजूद इसके हमने अपना काम नियमित जारी रखा है|

ऐसा नहीं है की इस तरह की समस्याएं हमारी प्रत्येक पंचायत में हैं| मैंने स्वयं देखा है कि कुछ पंचायतें अच्छा काम भी कर रही हैं बल्कि कोविड-19 में ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा घर-घर जाकर रोजाना देख-रेख करना व सर्वे कार्य करना गरीब लोगो की लिस्ट बनाकर सरपंच व वार्ड पांच द्वारा राशन किट का वितरण करना काफी बखूबी निभाया व सहयोग किया| आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से लेकर आशा सहयोगिनी तक सभी ने लोगों को राहत पहुँचाने तथा उन्हें जागरूक करने के हर संभव प्रयास किये गए हैं|

मुझे लगता है कि पंचायत सरकार के रूप में हमारे समीप एक सबसे महत्वपूर्ण इकाई है तथा केंद्र एवं राज्य सरकार से आने वाली योजनाओं का कार्यान्वयन पंचायतों के माध्यम से ही अधिकांश तौर पर किया जाता है| लोग भी बड़ी आस लगाकर पंचायत में बार-बार आते हैं ताकि उनकी समस्या का निराकरण हो सके| इसलिए पंचायत स्तर पर जो भी प्रतिनिधि एवं अधिकारी नियुक्त होते हैं उनके लिए ये और भी जरुरी हो जाता है कि वे लोगों को सरकार की इन सभी योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुँचाने के लिए तत्पर रहें| साथ ही लोगों को भी जागरूक होना होगा की वे सरकार द्वारा उन्हें दिए गए अधिकारों का सही तरीके से इस्तेमाल करें और एक सक्रीय नागरिक बनें!