राज्य दर्पण: बदलती नीतियों में हम-1

अलग-अलग राज्यों से जानिये कि सामाजिक क्षेत्र मैं कौन से अहम् नीति सम्बंधित फैसले लिए जा रहे हैं, और इनका हम जैसे नागरिकों के जीवन पर क्या असर पड़ेगा। 

हिमाचल प्रदेश से खबरें 

शिक्षा: हिमाचल सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम संशोधन 2019 को लागू करने का फैसला लिया है। इस शैक्षणिक सत्र से ही पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अगली कक्षा में जाने के लिए परीक्षा पास करने की व्यवस्था लागू कर दी है। अब दोनों कक्षाओं की परीक्षाओं के लिए राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड प्रश्नपत्र तैयार करेगा। उत्तर पुस्तिकाएं भी बोर्ड ही उपलब्ध करवाएगा। जिला उपनिदेशक उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करवाएंगे। वार्षिक परीक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों को दो माह में फिर परीक्षा का मौका मिलेगा। इन दो माह के भीतर फेल हुए विद्यार्थियों के लिए एक्सट्रा क्लास लगाई जाएगी। दोबारा होने वाली परीक्षा में भी फेल होने वाले विद्यार्थियों को अगली कक्षा में नहीं भेजा जाएगा। पहली से चौथी और छठी और सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों को असेसमेंट आधार पर ही अगली कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। इन कक्षाओं के लिए नो डिटेंशन पॉलिसी जारी रहेगी।

जवाबदेही: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा अधिकारीयों की जवाबदेही तथा आम जनता को सेवाएं सुनिश्चित करने हेतु जन मंच नामक कार्यक्रम राज्य के सभी जिलों में आयोजित किया जाता है| प्रत्येक जिला में एक मंत्री द्वारा सभी विभागों के अधिकारीयों की मौजूदगी में इस बैठक की अध्यक्षता की जाती है जिसमें लोगों की समस्याएं सुनी जाती हैं तथा यह सुनिश्चित किया जाता है कि ज्यादातर समस्याएं मौके पर ही सुलझाई जाएँ| 

राजस्थान से खबरें

शिक्षा: शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों की रूचि के अनुसार पढ़ाए जाने की पहल की गई है। साथ ही बस्ते के बोझ को कम करने के पायलट प्रोजेक्ट की पहल की गई है। इस प्रोजेक्ट में राजस्थान के ३३ जिलो में पायलट के तौर पर 1-1 विधालय को चुना गया है| ये प्रोजेक्ट पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से चलाया जा रहा है। रचनात्मकता आधारित शिक्षा दी जायगी, राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य होगा, जहाँ ऐसी शुरुआत की गई है। विद्यालयों में शिक्षा के साथ, खेल-कूद प्रोत्साहन हेतु 38 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इससे स्वस्थ तन के साथ स्वस्थ मन से शिक्षा के स्वप्न को साकार किया जा सकेगा। 

 पोषण :उत्कृष्ट कार्य करने के लिए  राजस्थान को भारत सरकार समग्र उत्कृष्ट पुरुस्कार 2018 मिला। माह सितम्बर-2019 पोषण माह के रूप में मनाया गया|जिसके अंतर्गत  निरोग, शिक्षित ,कुपोषण मुक्त, एनीमिया मुक्त बनाने की परिकल्पना की है। राजस्थान में लम्बे समय से 0 से 6 वर्ष के बच्चों, किशोरियों एवं महिलाओं में एनीमिया व कुपोषण एक गम्भीर समस्या रही है। इससे निपटने के लिए व जन-समुदाय की भागीदारी बढ़ाने एवं समाज में जागरूकता फैलाने के लिए राज्य में पोषण माह अभियान संचालित किया गया है।

अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, प्राथमिक शिक्षा विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, शहरी विकास विभाग तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सहयोग और सहभागिता की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला, ब्लॉक, ग्राम एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान में भाग लेने के लिये सभी जन प्रतिनिधियों यथा सांसदों, विधायकों, जिला प्रमुखों तथा महापौर को इस अभियान में नेतृत्व एवं भागीदारी निभाई जाएगी |इस अभियान के केन्दि्रत सन्देश “चलो अपनाये पोषण व्यवहार 2019” को घर-घर तक पहुंचाना है।

जवाबदेहीराजस्थान सरकार ने जन सूचना पोर्टल के माध्यम से जवाबदेही की तरफ एक कदम और बढ़ाया है| राजस्थान सरकार के अनुसार, जन सूचना पोर्टल अपनी तरह का पहला ऐसा प्रयास है जिसमें सरकार द्वारा वार्ड/पंचायत में क्रियान्वित सभी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध करवाई जा रही है। यह सूचना का अधिकार अधिनियम , 2005 की धारा 4(2) को क्रियान्वित करता है: “प्रत्येक लोक अधिकारी का निरंतर यह प्रयास होगा कि वह उपधारा (1) के खंड (ख) की अपेक्षाओं के अनुसार, स्वप्रेरणा से, जनता को नियमित अन्तरालों पर संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिनके अन्तर्गत इंटरनेट भी है, इतनी अधिक सूचना उपलब्ध कराने के लिये उपाय करे जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिये इस अधिनियम का कम से कम अवलंब लेना पड़े”

इस पोर्टल के माध्यम से कुल 13 विभागों की कुल 23 फ्लेगशिप योजनाओं से संबंधित रियल टाइम में  सुचनाये प्राप्त की जा सकती है | इस लिंक के माध्यम से हम सुचना पोर्टल पर जा सकते है |