योजनाओं के मूल लाभार्थियों को जागरूक करें!

मेरा नाम आनन्द सैनी है और मैं जिला अलवर, राजस्थान में पिछले दो वर्षों से इब्तिदा नाम की संस्था में महिला अधिकार कार्यक्रम से जुड़ा हूँ। इस कार्यक्रम के तहत गाँव की महिलाओं के समूहों में ही बैठकर उनकी समस्याओं का निस्तारण करना व उनके हक व अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करना होता है। महिला अधिकार कार्यक्रम के तहत महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति तैयार करके उन्हें प्रत्येक योजना की पूरी जानकारी देकर पात्रता लाभ और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इसके साथ ही यदि योजना का लाभ ना मिले तो उस स्थिति में किस तरह के कदम उठाये जाने चाहिए, इसको लेकर भी उन्हें सशक्त किया जाता है।

शुरू से ही मेरी रूचि ऐसे कार्यों को करने की रही है, जिनके माध्यम से मैं लोगों तक योजनाओं का लाभ दिला सकूँ। अतः शिक्षा पूरी करने के बाद सर्वप्रथम मैंने वर्ष दिसम्बर 2012 में पंचायत समिति रामगढ़ में काम करना शुरू किया। कार्य की समझ और सामाजिक क्षेत्र में अच्छी पकड़ को देखते हुए मुझे समाज से जुड़ी योजनाऐं जैसे बीपीएल आवास योजना व सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का कार्यभार दिया गया। इस दौरान मुझे पंचायत समिति में कार्य करने के साथ-साथ समाज में चल रहे कार्यक्रम व अन्य योजनाओं की जानकारी ग्रहण करने का मौका मिला। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में शिविरों के दौरान वृद्धजनों, विधवाओं व दिव्यांगजनों के प्राप्त आवेदनों की स्वीकृतियाँ जारी की गयी थी।

वर्ष 2018 में ब्लॉक स्तर पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के लाभार्थियों को जागरूक कर उन्हें लाभान्वित करने के श्रेष्ठतम कार्य पर मुझे श्रीमान उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी, प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी, उपकोषाधिकारी और ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा 26 जनवरी 2018 गणतन्त्र दिवस समारोह में ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया गया।

मैंने अपने अनुभव में यह देखा है लोगों को यदि सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ जल्दी नहीं मिल पाता तो वे उसके बाद निराश होकर बैठ जाते हैं तथा यह मानकर चल पड़ते हैं कि उन्हें अब योजना का लाभ नहीं मिल पायेगा। मुझे लगता है कि नागरिक के तौर पर हमें अपनी तरफ हर संभव प्रयास करने चाहिए तथा सम्बंधित अधिकारीयों से मिलकर योजनाओं के जरुरी प्रक्रियाओं का अनुसरण करना चाहिए एवं बराबर अपनी बात रखनी चाहिए क्योंकि योजनायें हम नागरिकों के लिए ही बनायी जाती है इसलिए उनका लाभ लेना हमारा अधिकार है।

मैंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन और उसकी प्रक्रिया को बहुत क़रीबी से देखा है इसलिए अपने अनुभव के आधार पर आप सभी साथियों के साथ इससे जुड़ी जानकारी साझा करना चाहता हूँ ताकि आप भी इस जानकारी को अन्य लोगों के साथ साझा कर सकें।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अन्तर्गत वृद्धावस्था पेंशन योजना में महिला की आयु 55 वर्ष व पुरूष की 58 वर्ष होना अनिवार्य है। एकलनारी पेंशन योजना में 18 वर्ष से अधिक आयु की विधवा/तलाकशुदा/परित्यकता महिला पात्र की श्रेणी में आती है। विशेष योग्यजन पेंशन योजना में किसी भी आयु का विशेष योग्यजन जिसकी निशक्तता 40% या उससे अधिक हो।

यदि लाभार्थी जनआधार कार्ड में निम्न पात्रता के अनुसार है तो नज़दीकी ई-मित्र केन्द्र पर जाकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन का आवेदन ऑनलाईन करायें।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन का आवेदन ऑनलाईन कराने के उपरान्त भी यदि लाभार्थी को पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है, तो सम्बन्धित पंचायत स्तर पर सरपंच सचिव के पास जाकर अपनी पेंशन की जांच करायें। यदि वहां सुनवाई नहीं होती हैं तो ब्लॉक स्तर पर विकास अधिकारी या प्रधान से समस्त दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, बैंक खाता आदि की सीडिंग की जांच करवायी जा सकती है। अगर आपको लगे कि ब्लॉक स्तर पर भी किसी तरह की कोई ठोस कार्यवाही नहीं होती है तो आप जिला स्तर पर कलैक्टर या राजस्थान सरकार द्वारा जारी सहायता के लिए सम्पर्क पोर्टल या 181 पर भी शिकायत कर सकते हैं। उम्मीद है, इसके बाद लाभार्थी को पात्रता का लाभ निश्चित रूप से मिल जायेगा।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में यदि कोई पात्र लाभार्थी आवेदन करता है तो उसको आवेदन की तिथि से 90 दिन के अन्तराल में लाथ मिलना आरम्भ हो जाता है। 90 दिन के अन्तराल में ऑनलाईन आवेदन सत्यापन के लिए ब्लॉक तहसील कार्यालय में जाता है। उसके बाद स्वीकृत होने के लिए ब्लॉक पंचायत समिति/उपखण्ड कार्यालय में जाता है। स्वीकृत होने के बाद पात्र राशि के लिए ब्लॉक उपकोष कार्यालय में जाकर सम्बन्धित लाभार्थी के खाते में राशि हस्तान्तरित कर दी जाती है। ये सारी प्रक्रिया 90 दिन के अन्तराल में ऑनलाईन होती है।

ये केवल एक उदाहरण के तौर पर मैंने अपना अनुभव आप सभी के साथ साझा किया है। मेरा मानना है कि एक नागरिक होने के नाते सबसे पहले हमें जागरूक होना बहुत ज़रूरी है। सरकार जो भी योजनायें हमारे लिए चलाती है, आखिर उनका लाभ किस तरह से ले सकते हैं तथा उसके लिए क्या आवश्यक पात्रता एवं प्रक्रिया है, इन सबके प्रति जानकारी का होना बहुत आवश्यक है। इसलिए अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि जितना संभव हो, योजनाओं के मूल लाभार्थियों तक ज्यादा से ज्यादा जानकारी साझा करते हुए उन्हें लाभ दिलाने का प्रयास करते रहें ताकि योजनाओं का मूल मकसद पूरा हो सके।