मेरी कहानी – सामाजिक क्षेत्र में काम का अनुभव

मेरे माता-पिता अंतर्राष्ट्रीय संस्था समाज कार्य एवं अनुसंधान केंद्र (बेयरफुट कॉलेज) तिलोनिया, अजमेर से जुड़े हुए हैं, जिससे मेरी प्रारंभिक शिक्षा संस्था के विद्यालय में हुई और इसी कारण मेरे दिल और दिमाग में सामाजिक कार्यों के प्रति शुरू से ही रूचि पैदा हो गई |

वर्ष 2007 में उच्च माध्यमिक शिक्षा के बाद मैं, बेयरफुट कॉलेज की सहयोगी संस्था तिलोनिया शोध एवं विकास संस्था नलु से जुड़ा| यहाँ प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत क्लस्टर इंचार्ज के रूप में ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पर काम किया | लगभग 30 गावों में गर्भवती महिलाओं, बच्चों के नियमित टीकाकरण, किशोर-किशोरी समूह व विद्यालयों में एड्स जागरूकता हेतु कैंप, प्रशिक्षण, रैली, प्रश्नोत्तरी आदि के साथ-साथ जातिगत भेदभाव, छुआछूत, बालविवाह जैसी सामाजिक बुराईयों को दूर करने हेतु प्रयास किये |

इसके अलावा पुस्तकालय कार्यक्रम “रूम टू रीड” के तहत फेसीलीटेटर के रूप में श्रीनगर (अजमेर) ब्लॉक के 20 सरकारी विद्यालयों में पुस्तकालय के माध्यम से बच्चों के साथ शिक्षा पर काम किया | पुस्तकालय कार्यक्रम में सहशैक्षणिक गतिविधियाँ जैसे बालमंच, समर कैंप, बालमेला आदि द्वारा बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया | साथ ही लगभग 2 वर्ष तक संस्था द्वारा गरीब, वंचित, दलित समुदाय, पलायन वाले परिवारों के बच्चों व ड्रॉप आउट बच्चों के लिए संचालित रात्रिशाला कार्यक्रम में शिक्षा समन्वयक के रूप में शिक्षा पर कार्य किया | इसके अलावा “नए मर्द की नई सोच” कार्यक्रम के तहत जेंडर समानता पर कार्य किया जैसे ग्रामीण चौपाल पर मीटिंग, नरेगा में महिलाओं व पुरुषों के साथ बातचीत कर जेंडर समानता के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया |

उक्त संस्थान में 8 वर्षों के कार्यकाल में अन्य कई सामाजिक संगठनों के साथ जनजागृति कार्यक्रमों में जुड़ा जैसे सूचना का अधिकार, रोजगार गारंटी क़ानून, पेंशन परिषद् इत्यादि | इस दौरान लेखा कार्य भी सीखने को मिला |

वर्ष 2014 में बेयरफुट कॉलेज की दूसरी सहयोगी संस्था मंथन संस्था कोठरी अजमेर से जुड़ा| यहाँ सर्वप्रथम वाटरशेड कार्यक्रम से जुड़ा, साथ ही लगभग 20 गावों में प्लांटेशन हेतु कार्य किया | संस्था के अन्तर्राष्ट्रीय नागरिक सेवा कार्यक्रम के तहत मेंटर के रूप में भारतीय व विदेशी वालंटियर्स के साथ 10 गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजना, स्वच्छता हेतु प्रशिक्षण, कैंप, रैली कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं, पुरुषों, बच्चों के साथ काम किया |

मलाला परियोजना के तहत कार्यक्रम समन्वयक के रूप में 10 गावों में बाल हिंसा, बाल शोषण, बालिका शिक्षा, जेंडर समानता वास्ते ग्राम स्तर पर मीटिंग, प्रशिक्षण, सरकारी विद्यालयों में फिल्म शौ आदि कार्यक्रमों द्वारा 1000 बच्चों के साथ काम किया |

वर्तमान में संस्था द्वारा संचालित डिजिटल व नॉन डिजिटल रात्रिशाला (प्राथमिक स्तर तक) कार्यक्रम में शिक्षा समन्वयक के रूप में काम कर रहा हूँ| ये रात्रिशालायें इन पिछड़ी जातियों व समुदाय के वंचित बच्चों के लिए है जोकि दिन में स्कूल नहीं जा सकते जैसे बागरिया, कालबेलिया, मल्ल समुदाय व पलायन वाले गुर्जर समुदाय | रात्रिशालाओं में बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ जेंडर समानता, पर्यावरण विकास, बाल संसद आदि के माध्यम से बच्चों को प्राथमिक स्तर पर सक्षम बनाने का प्रयास कर रहे हैं |

संस्थान में कार्य करने के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान सरकारी विभागों के साथ जुड़कर व उनसे समन्वयन कर सामाजिक कार्यों को ग्राम स्तर पर प्रभावी करने का प्रयास किया जिसमें सरकारी स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, जल एवं सिंचाई विभाग, वन विभाग, पंचायती राज संस्थाएं आदि शामिल हैं और निरंतर प्रयास है कि आगामी समय में सामाजिक कार्यों के माध्यम से लोगों तक बेहतर जिन्दगी की संभावनाओं को खोज सकें |

अलग-अलग प्रकार के सामाजिक कार्यों के दौरान मेरे जीवन कौशल को बढ़ावा मिला| भाषा व बातचीत से, नेतृत्व की प्रखरता बढ़ी साथ ही जमीनी स्तर पर लोगों के साथ जुड़ाव से सामाजिक व ग्रामीण समस्याओं व समाधानों की संभावनाएं तलाशने के प्रयास को मज़बूती मिली|

अकाउंटबिलिटी इनिशिएटिव के “हम और हमारी सरकार” कोर्स से मुझे सरकारी नौकरशाही व विकेंद्रीकरण सिस्टम को समझने में बहुत सहयोग मिला और ये सीख मेरे काम को और ज्यादा मज़बूती देगा|

उम्मीद सिंह वर्तमान में मंथन संस्था कोटड़ी, अजमेर (राजस्थान) के साथ शिक्षा समन्वयक के रूप में जुड़े हुए हैं|उन्होंने मार्च 2019 में जयपुर में हुए ‘हम और हमारी सरकार’ कोर्स में हिस्सा लिया था|

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