मनरेगा योजना से जुड़ी एक जमीनी हक़ीकत

मेरा नाम उदय शंकर है और मैं अकाउंटबिलिटी इनिशिएटिव ग्रुप के साथ वर्ष 2014 से जुड़ा हूँ| अकाउंटबिलिटी इनिशिएटिव के अंतर्गत हम विभिन्न केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं में केंद्र से लेकर स्थानीय स्तर तक की प्लानिंग प्रक्रिया, बजटिंग, निधि प्रवाह के साथ-साथ सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था तथा वित्तीय व्यवस्था पर गहराई से अध्ययन करते हैं| अतः इसी के अंतर्गत मैं आप सभी के साथ अभी कुछ समय पूर्व हुई एक वास्तविक घटना को साझा कर रहा हूँ|

यह कहानी मनरेगा योजना से जुड़ी हुई है| भारत में वर्ष 2005 से “महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम” योजना चलाई जा रही है जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाके में रहने वाले अकुशल मजदूरों जो वयस्क तथा बेरोजगार हैं, उन्हें रोजगार देना है| इस योजना के तहत सरकार द्वारा मजदूरों को 100 दिनों कि रोजगार देने का प्रावधान है जिसमें काम करने वाले मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी भी तय कर दी गई है| अभी फ़िलहाल यह मजदूरी रेट 250 रुपये प्रतिदिन है| इस योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को सरकार के तरफ से अब सीधा उनके बैंक खाते में पैसा भेजा जाता है|
अभी कुछ समय पूर्व मैं औरंगाबाद जिले के एक प्रखंड कार्यालय में गया था| जब मैं कार्यालय में बैठा था तो वहां पर जिला पदाधिकारी की एक टीम आई थी और वो जाँच पड़ताल कर रही थी| प्रखंड कार्यालय के लिपिक से मेरी पारिवारिक जान पहचान थी अतः जैसे ही वह टीम वहां से चली गयी तो मैंने उनसे पूछा कि यह टीम किस चीज़ कि जाँच पड़ताल कर रही थी?
मुख्य लिपिक ने मुझे बताया कि इस प्रखंड की एक पंचायत में मनरेगा के तहत जो काम चल रहा है, उसके मुखिया और पंचायत सचिव पर धोखा-धड़ी का मामला है| उन्होंने बताया कि पंचायत का मुखिया दबंग है तथा उस पर आरोप है कि उसने मनरेगा के तहत एक अत्यंत गरीब परिवार की मजदूरी को हड़प लिया है| मुखिया उस पुरे परिवार के पांच सदस्यों से मनरेगा के तहत वर्षों से काम करवाता आ रहा है लेकिन उसके बदले में उन्हें एक रुपया भी मजदूरी के नाम पर नहीं देता| केवल काम के बदले में मुखिया उन लोगों को एक पहर का खाना देता है और यह खेल पिछले कई सालों से चलते आ रहा था|
यह सुनकर मैं काफी विचलित हुआ और परिवार का पता लगाते हुए कुछ दिनों के बाद मैं उस परिवार से जाकर मिला| उनसे जान-पहचान निकालने के बाद मैंने घर के मुखिया से इस पूरे मुद्दे पर बात की| मुखिया ने बताया की हम पिछले कई सालों से बहुत गरीबी में जी रहे हैं| पंचायत का मुखिया मनरेगा में दिहाड़ी लगाने के नाम पर परिवार के हम सभी सदस्यों को सिर्फ एक पहर का ही खाना देता था जिसके कारण हमें भर पेट खाना भी नसीब नहीं होता था|

घर के मुखिया ने मुझे बताया कि एक दिन हमारा एक रिश्तेदार कुछ दिनों के लिए रहने हमारे पास आया था| उसने हमसे पूछा कि आप सभी लोग दिन-भर मजदूरी करते हैं तो उसके बदले में एक दिन का कितना पैसा कमा लेते हो? हमने उसे बताया कि काम के बदले मुखिया जी पैसा नहीं देते है बल्कि एक पहर का भर पेट खाना देते हैं| यह सुनकर रिश्तेदार बहुत चिंतित हुआ| उसने हमसे पूछा कि आप लोग जो काम करते है उसका जॉब कार्ड आप लोगों को मिला है तो परिवार वालों ने जवाब दिया की हम लोगों के पास कुछ भी नहीं है, हमारे पासबुक भी मुखिया जी अपने पास ही रखते हैं| यह सब सुनकर रिश्तेदार ने कहा कि इसमें बहुत गड़बड़ी हो रही है जिसका पता लगाना होगा| सबसे पहले उसने पंचायत के मुखिया और पंचायत सचिव से हम परिवार के सदस्यों के जॉब कार्ड और पासबुक मांगे लेकिन मुखिया ने साफ़ मना कर दिया की उनके जॉब कार्ड और पासबुक का तुम क्या करोगे? मैं इन लोगों को काम देता हूँ और पालन–पोषण करता हूँ| मुखिया होने के कारण उसने हमारे रिश्तेदार को धमकाया लेकिन रिश्तेदार ने हार नहीं मानी| वह प्रखंड कार्यालय गया और वहां जाकर उसने प्रखंड पदाधिकारी और प्रखंड प्रमुख को सारी बात बताई| उसकी बात सुनकर प्रखंड पदाधिकारी और प्रखंड प्रमुख ने कहा कि हम इसकी जांच करके तुरंत करवाई करेंगे और अगर मुखिया और पंचायत सचिव दोषी पाये गये तो उन्हें इसकी सजा दी जाएगी|

अधिकारीयों से आश्वासन पाकर हमारा रिश्तेदार वापिस अपने घर चला गया| वह हमसे फ़ोन पर पूछता रहता था कि हमने जो प्रखंड कार्यालय में शिकायत की थी, उसके ऊपर कुछ सुनवाई हुई या नहीं? हम एक ही जवाब देते की कुछ नहीं हुआ और अब मुखिया जी हमें काम नहीं देते, न ही खाना देते हैं, हमारा जीना बहुत मुश्किल हो गया है| बल्कि तुमने यह सब करके हम लोगों के पेट पर लात मार दी है| अब हम लोगों को कोई शिकायत नहीं करनी है हमें मुखिया जी जैसे रख रहे हैं, रहेंगे| यह सब बोल कर हमने अपने रिश्तेदार से बात करना भी बंद कर दिया लेकिन उसने हार नहीं मानी और लड़ाई लड़ता रहा|

हमारा रिश्तेदार फिर से अपनी शिकायत पर प्रगति हेतु प्रखंड पदाधिकारी और प्रखंड प्रमुख से मिला| दोनों अधिकारीयों ने रिश्तेदार को अपने कार्यालय से डांट फटकार कर लौटा दिया और कहा कि आप किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के ऊपर झूठा इल्जाम लगायेंगे तो हम तुम्हारे ऊपर ही कारवाई कर देंगे| हमारे रिश्तेदार ने फिर जिला में जाकर जिला पदाधिकारी कार्यालय में शिकायत अर्जी की कॉपी लगा दी| जब जिला पदाधिकारी ने शिकायत अर्जी देखी तो उसने रिश्तेदार को तुरन्त अपने कार्यालय में बुलाया और सारी बात सुनी-समझी| जिला पदाधिकारी द्वारा रिश्तेदार को आश्वासन दिया गया कि इस मामले को एक सप्ताह के अन्दर निपटा दिया जायेगा तथा जो लोग दोषी पाए जायेंगे उनके ऊपर उचित करवाई की जाएगी|
जिला पदाधिकारी द्वारा इस मामले हेतु एक टीम गठित करने के उपरान्त उस प्रखंड का औचक निरिक्षण किया गया और पूरे मामले को गंभीरता से जांचा| जांच में मुखिया और पंचायत सचिव दोषी पाये गये| इसके साथ ही प्रखंड पदाधिकारी के द्वारा भी मामले को दबाने का प्रयास किया गया इसके लिए उन्हें भी दोषी माना गया| जिला पदाधिकारी द्वारा सबसे पहले कारवाई हुई, पंचायत सचिव को दो साल के लिए बर्खास्त कर दिया गया| परिवार के मुखिया ने फिर बताया कि अभी तक की हमारी जितनी भी मजदूरी बनी थी उस मजदूरी को ब्याज के साथ मुखिया और पंचायत सचिव से वसूल किया गया| यह मजदूरी हमें लगभग 3 लाख 50 हज़ार रूपये जिला पदाधिकारी द्वारा दिए गए| प्रखंड पदाधिकारी का भी 6 महीने का वेतन काट लिया गया|

उपरोक्त घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं है बल्कि हमारे देश में कई ऐसे परिवार होंगे जिनका इस तरह से किसी न किसी रूप में शोषण किया जा रहा होगा| जब तक हमारा समाज इन सभी चीजों के ऊपर अपनी आवाज नहीं उठायेगा, तब तक हमारे समाज में ऐसे परिवारों के ऊपर दबंगों द्वारा शोषण होता जायेगा| इसलिए अब समय आ गया है कि हम लोग सब मिलकर अपनी आवाज बुलंद करें तथा अन्याय के विरुद्ध एकजुट हो जाएँ|