भ्रष्टाचार: क्या यह एक ही तरह का होता है?

देश में चुनावी दौर शुरू होते ही मुख्य रूप से तीन मुद्दे जाति, सम्प्रदाय और भ्रष्टाचार आपने आप में सबको आकर्षित करते है, साथ ही साथ राजनीतिक पार्टियाँ इस विषय पर बहस करते हुए और एक दूसरे को दोषी साबित करते हुए नज़र आती है | वही आम जनता चुनावी दौर में राजनीतिक पार्टियों द्वारा किये जाने वाले झूठे प्रचार में आ जाती है | वास्तविकता में क्या झूठ और क्या सच यह कोई नही जनता और ना ही कोई इस मुद्दे पर खुल कर बात करता है |

आम जनता में धारणा है कि भ्रष्टाचार एक बड़ी और अपने आप में इकलौती बीमारी है जो कि सच नही है | वही दूसरी ओर जनता का मानना यह भी है कि आचरण-व्यवहार और आदतों में सुधार मात्र से इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है, जो कि काफी नही है | इस समस्या को सुलझाने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इसकी जड़ें किस हद तक फैली हुई है| जिस प्रकार किसी भी बीमारी के जन्म के लिए जीवाणु का होना जरूरी है उसी प्रकार भ्रष्टाचार को समझना और खत्म करने के लिए उसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है |

अलग-अलग अथॉरिटीज द्वारा भ्रष्टाचार को अलग-अलग श्रेणी में बांटागया है जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि भ्रष्टाचार किस प्रकार से, किसको प्रभावित करता है और किस तरह से रोका जा सकता है| मुख्य तौर पर दो स्तर पे भ्रष्टाचार देखा जा सकता है– सरकारी और निजी स्तर पर | 

अलग-अलग प्रकार से देखने को मिलता है

  • यदि बात करे पहले मुख्य तौर पर होने वाले भ्रष्टाचार कि जो हमारे सामने है वह आम नागरिक का सरकार से सेवाओं को लेकर जूझना, जैसे कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आवास प्रमाण पत्र के लिए | इस प्रकार के भ्रष्टाचार में आम जनता को सीधे तौर पे जुझना पड़ता है |
  • दूसरे प्रकार के भ्रष्टाचार सरकार के द्वारा किये जाने वाले खरीद- फरोख्त में गड़बड़ के रूप में देखने को मिलता है, हालांकि यह मुख्य रूप से आम जनता को प्रभावित नही करता है, लेकिन करदाता को यह धीरे- धीरे प्रभावित करती है, जैसे कि रोड कंस्ट्रक्शन, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन आदि| इस तरह के भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए एक नई रणनीति अपनाने कि आवश्यकता है |                  
  • तीसरी तरह का भ्रष्टाचार दूसरे प्रकार के भ्रष्टाचार के विपरीत है, इसमें मुख्य तौर पर सरकार द्वारा सेवाओं की बिक्री करती है| इस प्रकार का भ्रष्टाचार सीधे तौर पर आम जनता को प्रभावित नही करता लेकिनकुछ समय बाद यह आम जनता में अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है | उदाहरण के तौर सरकार बिजली देने का अधीकार, टूरिस्ट लोकेशन और गवर्नमेंट लैंड को बेचती है|
  • चौथी तरह का भ्रष्टाचार सरकार की नियामक प्रणाली को लेकर है | आज कल सेवाएं मिलने में देरी, इंश्योरेंस नीतियों में अस्पष्टता, निजी मत्भेद-शादी, तलाक, RTE के अनुसार स्कूल एडमिशन, पॉवर सप्लाई टेरिफ आदि के लिए सरकार की तरफ से नियामक संस्थाओं का निर्माण किया गया है और ऐसे कामों में भी भ्रष्टाचार देखा जा सकता है। 
  • पाँचवी प्रकार के भ्रष्टाचार राजनीति से जुड़ा है।  इस प्रकार का भ्रष्टाचार नागरिकों के साथ साथ राष्ट्र को भी प्रभावित करता है |नीतियों में भ्रष्टाचार, आपने आप में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है| जैसे कि सरकारी सेवाओं/ विभागों को निजी लाभ के लिए ग़ैर सरकारी क्षेत्र को सौप दिया जाता है | 

विभिन प्रकार के भ्रष्टाचार हमारे सामने है, जिससे यह साफ़ जाहिर होता है कि भ्रष्टचार की जड़ें बहुत मजबूत व गहरी है और वह अलग-अलग तरीकों से हमारे सामने आता है। अत: इन सब को खत्म करने के लिए सशक्त प्रणाली को अपनाने कि आवश्यकता है|

 

(यह विचार एकाउंटेबिलिटी इनिशिएटिव के सलाहकार टी. आर. रघुनंदन जी के ब्लॉग से लिए गए हैं। उनके द्वारा लिखे गए ब्लॉग आप यहाँ पा सकते हैं। )