बेहतर शिक्षा का एक प्रयास..

सफ़र की शुरुआत

मैंने हिमाचल प्रदेश में प्रथम संस्था के साथ वर्ष 2007 में जुड़ कर शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने का सफ़र शुरू किया| प्रारंभिक वर्षों में जब प्रथम संस्था के साथ कार्य की शुरुआत कि उस समय मैं स्वयं पढ़ाई करने में व्यस्त थी और बीएड करके आई थी | प्रथम में आने से पहले जिलावार हम लोगों को BRCC के माध्यम से जानकारी दी गयी थी कि शिक्षा के क्षेत्र में कुछ कार्य करने के लिए बीएड पास विद्यार्थियों की आवश्यकता है, आप लोग आना चाहें तो आ सकते है | शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना मुझे बहुत पसंद था, इसीलिए एक दिन सभी लोगों को एक निर्धारित स्थान में बुलाया गया और एक दिन में प्रथम में किए जाने वाले कार्य के बारे में बताया गया | 

तद्पश्चात शिमला जिला में लगभग 45 लोगों को SIEMET में तीन दिवसीय  कार्यशाला का गठन हुआ, जिसमें हम सभी लोगों को रात 2-3 बजे तक बिठाकर कार्यक्रम में प्रयोग किए जाने वाले विषय और पद्धति के बारे में बताया/समझाया गया | उसके कुछ दिन बाद हम लोगों के साक्षात्कार हुए | जिसमें लगभग 20 लोगों का चयन हुआ | मेरे जीवन के यह पल आज भी बहुत यादगार है क्योंकि रात को 2-3 बजे तक बैठकर कभी कोई कार्य नहीं किया था लेकिन आज भी उन दिनों का सीखा हर एक शब्द याद है | मैंने प्रथम संस्था में Block Coordinator के पद से कार्य शुरू किया था और आज State Resource Group का भाग हूँ | 

हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ मिल कर बच्चों की शिक्षा को बेहतर करने का काम

हिमाचल प्रदेश में प्रथम संस्था ने वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार के साथ मिलकर प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों के स्तर को बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्कूलों से कार्य शुरू किया | कार्यक्रम के प्रभाव को देखते हुए वर्ष 2007 में हिमाचल सरकार ने प्रदेश के सभी स्कूलों में प्रथम संस्था के साथ मिलकर ‘आधार’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें कक्षा पहली से पाँचवीं के बच्चों के साथ हिंदी और गणित विषयों पर स्तरानुसार कार्य किया गया | प्रदेश में इस तरह का स्तरानुसार कार्य पहली बार प्रथम संस्था के साथ मिलकर किया गया था | प्रथम संस्था द्वारा प्रयोग की जाने वाली कमाल पद्धति (CAMaL- Combined Activities for Maximized Learning) पिछड़े छात्रों के स्तर को बढ़ाने में बहुत लाभकारी है |

हिमाचल में शुरूआती दिनों में हिंदी और गणित विषयों पर कार्य किया गया लेकिन समय के साथ-साथ और बच्चों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजी विषय को भी प्राथमिक कक्षा का हिस्सा बनाया गया | इसके साथ-साथ उच्च प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 6-8) में विज्ञान और गणित विषयों के साथ कार्य किए गये | प्रथम संस्था की विशेषता में प्रमुख कार्य है समुदाय में अभिभावकों को शिक्षा के क्षेत्र में जोड़कर बच्चों के शैक्षिक स्तर को बढ़ाना | अत: हिमाचल में प्रथम संस्था प्रदेश सरकार और अभिभावकों के सहयोग से स्कूल और समुदाय में पूर्व प्राथमिक कक्षाओं से लेकर कक्षा आठवीं तक शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहीं हैं |

कुछ ख़ास उपलब्धियाँ

प्रथम में काम करना और बिताया हुआ हर एक पल मेरे लिए गर्व के समान है क्योंकि इसमें मैंने अपने आप को और अपने सीखने के स्तर को हमेशा जिंदा रखा है | लेकिन अगर बात किसी ख़ास  पल की करें तो दो बातें साझा करना चाहूँगी |

पहली – जिला शिमला में फागु के समीप बणी स्कूल में कक्षा छठी की एक छात्रा जो पढ़ने में बहुत कमजोर थी और जिसे अध्यापिका हमेशा यह कहती रहती कि ये लड़की कुछ नही कर सकती… ये लड़की कुछ नही कर सकती ! सुनकर बहुत अजीब सा लगता था |  मैं उस स्कूल में हिंदी और गणित का पायलट करने के लिए लगभग 30 दिन तक गयी थी | मुझे हर वक्त उस लड़की को देखकर लगता था कि मुझे कुछ ऐसा करना है कि यह लड़की कुछ अलग करें और सभी अध्यापक गलत साबित हो जायें | कुछ दिनों बाद अध्यापक दिवस था और मैंने उस लड़की को 15-20 लाइन का नोट तैयार करके दिया और रोज़ाना उसे प्रस्तुत करने के तरीके की तैयारी करवाई | अध्यापक दिवस के दिन जब सुनीताने वह नोट बिना देखे हाव-भाव के साथ सुनाया तो मुख्याध्यापिका की आँखों से आँसू आ गये, जिसे देख मैंने यह साबित किया कि प्रथम संस्था वाले लोग कुछ भी कर सकते हैं | 

दूसरा– जब लगभग 80 अध्यापकों को एक साथ ट्रेनिंग दी और लगभग सभी अध्यापकों ने कार्य को सराहा तो बहुत गौरवान्वित महसूस हुआ था, जिसके बाद से आज तक हर ट्रेनिंग में हमेशा अच्छा देने के लिए तैयार रहती हूँ |

कुछ मुश्किलें भी सामने आई

काम में कुछ चुनौतियां भी रहती हैं लेकिन उनसे जूझने से ही बहुत कुछ सीखने को मिलता है:

  • प्रथम हो या कोई भी संस्था, चुनौतियाँ ना हो तो कार्य करने में रूचि नहीं बनती इसलिए किसी कार्य में सफलता की सही ख़ुशी चुनौतियों को पार करने के बाद ही मिलती है | प्रथम मैं चुनौतियों की बात करें तो सबसे पहले बदलते कार्यक्रम के साथ-साथ अपने आप को बिना समय मिले ही डालना | जैसे-मैंने प्रथम में हिंदी और गणित विषय के साथ काम शुरू किया था लेकिन कुछ वर्षों के बाद कक्षा 6-8 में कार्य शुरू हुआ, जिसमें विज्ञान और गणित विषय में कार्य करना था जो कि मेरे लिए मुश्किल था क्योंकि मैं बी. एस. सी नहीं थी लेकिन समय की नज़ाकत को देखें तो लगभग सभी लोगों को इसके लिए तैयार रहना होता है |
  • कभी भी कहीं भी यात्रा करने के लिए तैयार रहना, जिसे मैंने समय के साथ अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लिया है| संस्था के कार्य के लिए आज भारत के किसी भी राज्य में जाना पड़े, मैं अब हमेशा पूरी तत्परता से तैयार रहती हूँ| 
  • कार्यक्रम का बदलता स्वरुप जैसे- कभी डायरेक्ट कार्यक्रम और कभी सरकार के साथ मिलकर सरकारी अध्यापकों की ट्रेनिंग के लिए लोगों को तैयार होना अर्थात किसी भी समय कार्यक्रम में बदलाव आ जाए तो स्वयं को और अपनी टीम को भी तैयार करना एक चुनौती बन जाती है| 
  • बच्चों को पढ़ने- पढ़ाने से सम्बंधित तो प्रथम में बहुत से कार्य हो रहें हैं लेकिन आज भी हमारे बच्चे सीखे गये कार्यों को अपने दैनिक जीवन के साथ नहीं जोड़ पाते अत: जो भी बच्चों को सिखाया जायेगा उन्हें दैनिक जीवन में उपयोग करवाने योग्य बनाना|
  • नैतिक मूल्य जो कि अब किताबों में तो आ गया है लेकिन बच्चों में मूल्यों का अभाव दिखता है जिसके लिए समुदाय में प्रथम के द्वारा किए जा रहे कार्यक्रमों में अभिभावकों को मूल्य सम्बंधित ज्ञान में हिस्सेदार बनाना |
  • बच्चों के साथ- साथ अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना और समय-समय पर चुनिन्दा समुदाय में अभिभावकों से मिलना और अपनत्व स्थापित करना|

अपनी संस्था की बात करूँ या फिर किसी भी अन्य संस्था की, हर समय सीखने के लिए कुछ ना कुछ है बस आप में सीखने की अभिलाषा का होना आवश्यक है| मैं सीखने के लिए किसी भी जगह जाना पसंद करुँगी| लेकिन मौका मिले तो उत्तरी पूर्वी राज्यों में जाना पसंद करूँगी | कभी भी सीखना बंद ना करें क्योंकि जो सीखता रहेगा वही सिखाने में सफ़ल  होगा| बाकी संस्थाओं को मेरी यही सलाह है कि जहाँ पर भी संभव हो एक – दूसरे के साथ सहयोग करिए, अधिकारियों तथा लोगों के साथ मिलकर काम करिए ताकि जिस मकसद के लिए हम सभी जुटे हैं उसे हम प्राप्त कर सकें| इसके अलावा अभिभावक हों या फिर अन्य समुदाय, दोषारोपण के बजाय आगे आकर शिक्षा तथा अन्य सभी क्षेत्रों की बेहतरी के लिए एक दूसरे के साथ मिलकर काम करने चाहिए ताकि सेवाएं ज्यादा से ज्यादा बेहतर तरीके से ज़मीनी स्तर तक पहुँच पाएं|