प्रशासन के सितारे: राजेश शर्मा

नाम:राजेश शर्मा
पद: बाल विकास परियोजना अधिकारी, धरियावद, जिला प्रतापगढ़, राजस्थान
1)आप अभी किस विभाग में और किस पद पे काम कर रहे है ? आपका मुख्य कार्य क्या है ?

मैं महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार में बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर कार्य कर रहा हूँ, वर्तमान में प्रतापगढ़ जिले के धरियावद ब्लाक में पदस्थापित हूँ |
हमारा मुख्य कार्य समेकित बाल विकास सेवाओं के लाभार्थियों (0-6 वर्ष के बालक-बालिकाओं गर्भवती, धात्री एवं किशोरी बालिकाओं) को शाला पूर्व शिक्षा, टीकाकरण पोषण, स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवा एवं जागरूकता फैलाने का कार्य करते है |

2) अभी तक के सफर में सरकार से जुड़ के काम करने का अनुभव कैसा रहा है ?

सरकार के साथ काम करते हुए और विशेषकर समेकित बाल विकास सेवाओं के लाभार्थियों के साथ, ये अनुभव रहा है कि सरकार के द्वारा किये जा रहे प्रयास जागरूकता के अभाव में पूर्ण रूप से सफल नही हो पा रहे है, ग्रामीण जनता में शिक्षा का व्यापक प्रसार होने के बावजूद भी पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कार समाजिक रीति-रिवाज आदि भी पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी आदतों में परिवर्तन लाने में रुकावट के रूप में खड़े हैं, जिससे सरकारी प्रयासों को अब भी अपेक्षित रूप से सफलता नही मिल पा रही है | सबसे निचले स्तर पर नवीन सोच, नवाचार को अपनाने की स्वीकृति के प्रति अरुचि के साथ संसाधनों का अभाव भी है, जिस पर सरकार द्वारा निरंतर प्रशिक्षण के साथ संसाधनों का प्रबंधन भी किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में धीरे-धीरे सफलता की दर में आशातीत प्रगति सम्भव होगी |

3) करियर में अभी तक की क्या बड़ी सफलताएं रही है ? एक या दो के बारे में बताइयें ?

वैसे तो जिस क्षेत्र में मैं कार्यरत हूँ, उसमे जो कार्य करना चाहता हूँ उसमे अपेक्षित सफलता अभी तक नही मिल पाई है, किन्तु पिछले वर्ष विभागीय कार्यों को ब्लाक स्तर पर क्रियान्वन करने पर स्वतंत्रता दिवस पर जिला परिषद द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया है | लेकिन हाँ, पिछले ब्लाक सलूम्बर जिला उदयपुर में संचालित समस्त केन्दों पर ग्रोथ मानिटरिंग का सही तरीके से कार्य करवाते हुए कुपोषित बच्चों की पहचान कर 15 दिविसीय ग्राम पंचायत स्तर पर समुदाय आधारित कुपोषण उपचार कार्यक्रम चला कर 32 बच्चों को उपचार करवाया गया, जिससे एक बच्ची के हिमोग्लोबीन कम पाए जाने पर उसका ब्लड ट्रान्सफ्यूजन करवाया गया, आज सभी बच्चों के पोषण स्तर में सुधार आ रहा है | आगामी दिनों में ये शिविर समस्त ग्राम पंचायतों में चलायें जायेंगे |

4) इन सफलताओं के रास्तें में क्या कुछ अनोखी मुश्किलें या परिस्थितियां सामने आयी|इनका समाधान कैसे हुआ ? क्या आप अपने अनुभव से इसका उदाहरण दे सकते है |

वैसे तो मैंने पहले ही बताया है कि कोई विशेष सफलता नही पाई है तथापि पिछले दिनों सलूम्बर ब्लाक में चलाए गए समुदाय आधारित कुपोषण उपचार कार्यक्रम को ही सफलता मानता हूँ, उस दौरान पहले तो हमारी आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम हेतु अपने आँगनवाड़ी सर्वें क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की सही पहचान हेतु कार्य करने हेतु प्रेरित किया, उसके उपरांत कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को उनके बालकों की पोषण स्थिति से अबगत करा उसके प्रति उनकी समझ बढ़ाना एवं बच्चों की पोषण स्थिति के प्रति स्वीकृत उत्पन्न करना था, लेकिन उसके बड़ी समस्या यह थी कि अभिभावकों को निरंतर 15 दिवस तक शिविर मब बच्चों को लेकर सुबह 9 बजे से 5 बजे तक उपस्थिति सुनिश्चित करना था, जिसके लिए हमने उनको लाने-ले जाने की व्यवस्था, सुबह का नाश्ता व दोपहर के खाना आदि की व्यवस्था की थी, किन्तु उनके बावजूद भी कुछ अभिभावक निरंतर नही आना चाहते थे प्रशासन के सहयोग से उनकों पाबंद कर ये शिविर हमने चलाया और 32 बच्चों का उपचार किया वर्तमान में उन बच्चों का फालोअप किया एवं उनकी पोषण स्थिति पर नजर रखी जा रही है |

5) बेहतर शासन और सेवा वितरण में आप अपना योगदान किस प्रकार देखते है |

बेहतर शासन और सेवा वितरण में मेरा सीधा सम्बन्ध ब्लाक स्तर पर प्रशासन के साथ समन्वय करते हुए समेकित बाल विकास सेवाओं के लाभार्थियों को बेहतर सेवा प्रदान करवाना है, इसके अतिरिक्त फिल्ड स्तर पर मानदेयकर्मियों को प्रशिक्षण द्वारा नवाचारों से सुबरू करवाते हुए अपने फिल्ड में उनका उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करना है | साथ ही मानदेयकर्मियों की समस्याओं को जानकार उनको दूर करने हेतु प्रयास करना, जिस समस्या का समाधान मेरे स्तर पर सम्भव हो उसका त्वतरित समाधान कर उनको राहत प्रदान करना है |
इसके अतिरिक्त प्रशासन के विभिन्न अंगों से समन्वय कर विभागीत कार्यों को नियत समय पर करवाना जैसे भवन विहीन आँगनवाड़ी केन्द्रों के लिए उपखंड अधिकारी से सम्पर्क कर निशुल्क भूमि पट्टा प्राप्त करना, पंचायती राज से समन्वय कर भवन मुरम्मत, भवन निर्माण आदि कार्य करवाना |

6) अपने काम के किस पहलु से आपको ख़ुशी मिलती है ?

मुझे सर्वाधिक ख़ुशी तक मिलती है, जब आँगनवाड़ी केंद्र निरीक्षण के दौरान 3 से 6 वर्ष के बच्चों के नामांकन में वृद्धि होती है और हमारी आँगनवाड़ी कार्यकर्ता उनको शालापूर्व शिक्षा प्रदान करती हुई नजत आती है, क्यूंकि शाला पूर्व शिक्षा के सही और सफल क्रियान्वन द्वारा ही हम आँगनवाड़ी केन्द्रों की तस्वीर आमजन में बदल कर शिक्षा के निजीकरण और प्राइवेट स्कूल के बढ़ते जाल को भी रोक सकते है | साथ ही समेकित बाल विकास सेवाओं की अन्य सेवाओं के प्रति भी आमजन की सोच में बदलाव लाकर उसको प्रभावी बनाने में समुदाय का सहयोग ले सकते है |

7) i) अच्छे अधिकारी के 3 जरुरी गुण :

हाहाहा, यह मैं कैसे बता सकता हूँ, मुझ में है या नहीं लेकिन आपने पूछा तो मुझे लगता है- संवेदनशील
तकनीकी रूप से सक्षम और धैर्यशील

ii) काम से सम्बन्धित वह जिम्मेदारी जिसमे सबसे ज्यादा मजा आता हो ?

मुझे सबसे ज्यादा मजा आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नया कार्य सीखाने में आता है, फिर चाहे वो शाला पूर्व शिक्षा की तकनीकों का प्रशिक्षण देना हो या आईसीटी, आरटीएम के तहत मोबाइल पर आईसीडीएस केस साफ्टवेयर का प्रशिक्षण देना हो, इन प्रशिक्षणों के दौरान आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इस प्रशिक्षण के उपरांत समुदाय में उनके प्रति सोच में बदलाव, उनके कार्य में आसानी और कार्य परिणाम में प्रभावी बदलाव आदि के द्वारा प्रोत्साहित कर उनको अपनी सोच में सकरात्मक लाने के लिए प्रोत्साहित करने में ज्यादा मजा आता है |

iii) अपने क्षेत्र में कोई ऐसा काम जो आप करना चाहते है मगर सरंचनात्मक और संसाधन की सीमाएं आपको रोक देती है ?

मैं समेकित बाल विकास सेवाओं के लाभार्थियों के लिए काम करता हूँ, जहाँ मैं कुछ बदलाव करना चाहता हूँ जैसे कि शाला पूर्व शिक्षा के पाठ्यक्रम में अनौपचारिक शिक्षा के साथ कुछ हद तक बालकों को अक्षर ज्ञान आदि भी देना ताकि समुदाय में प्राइवेट स्कूल एवं आँगनवाड़ी केंद्र के बीच बढ़ते अंतर के विचार को कम किया जा सके | मानदेय कर्मी के चयन की प्रक्रिया को और प्रतिस्पर्धी बनाकर पंचायती राज की अनुशंसा यानी की ग्राम सभा की अनुशंसा के प्रावधान को हटाया जाए |

8) कोई ऐसी बातें जो आपको लगता है कि होनी चाहिए ?
जवाब: समेकित बाल विकास सेवाओं के आँगनवाड़ी केंद्र नवीन तकनीकों से सुसज्जित हो जिसमे दूरसंचार के माध्यम से बालकों को शाला पूर्व शिक्षा, समुदाय को पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी शिक्षा, दी जा सके | आँगनवाड़ी के समस्त मानदेयकर्मियों को समेकित बाल विकास सेवाओं के इतर अन्य किसी भी सेवा में न लगाया जाए, वर्तमान समय में क्षेत्रीय स्तर विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं के क्रियान्वन हेतु प्रशासन द्वारा मानदेयकर्मियों से कार्य लिये जाने से विभाग की सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ा है |