प्रशासन के सितारे: डॉ. गोपाल

नाम: डॉ. गोपाल

पद: स्कूल प्रधानाध्यापक

1) आप अभी किस विभाग में और किस पद पर काम कर रहे हैं? आपका मुख्य कार्य क्या है?

वर्तमान में मैं शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रधानाचार्य के पद पर रा० उर्दू मध्य विद्यालय बनचौरी, प्रखंड-डुमरा, जिला-सीतामढ़ी में कार्यरत हूँ| मेरा मुख्य कार्य विद्यालय में पठन-पाठन सुचारू ढंग से संचालित कराना, शिक्षण कार्य करना, शिक्षकों को विद्यालयी कार्य में  होने वाली समस्याओं को विभिन्न स्तर पर समाप्त कराने में सहयोग प्रदान करना, विभाग से प्राप्त निदेश/आदेश के आलोक में विद्यालीय/विकासात्मक कार्य करना/आवश्यकतानुसार विभिन्न स्तर से कराने में सहयोग देना, समाज से विभिन्न स्तरों पर सहयोग प्राप्त कर शिक्षण की बेहतरी हेतु कार्य करना तथा कराने में सहयोग प्रदान करना शामिल है|

2) अभी तक के सफर में सरकार से जुड़कर काम करने का अनुभव कैसा रहा है

मेरी नियुक्ति वर्ष 2000 में बिहार सरकार के अंतर्गत सहायक शिक्षक के पद पर हुई| इससे पूर्व मैं डी.ए.वी. विद्यालय में स्नातक शिक्षक के रूप में कार्य कर रहा था| सरकारी व्यवस्था में कार्य करना कई मायनों में बेहतर रहा है| सर्वप्रथम बिना किसी भेदभाव के अपने कार्य का निर्वहन करना, दबाव मुक्त वातावरण में कार्य करना, विभागीय निदेश के आलोक में शिक्षण कार्य के साथ-साथ विभिन्न तरह के कार्यों का सम्पादन करना| परिणामस्वरूप विभिन्न तरह के अनुभवों की प्राप्ति और उसका उपयोग अपने निर्धारित कार्यों में करना जिससे कार्य व दायित्वों को बेहतर ढंग से पूर्ण करना| सरकार से जुड़कर काम करने में सबसे अहम चीज है, आत्मसंतुष्टि| अन्य जगह कार्य करके हम अपने समाज के उन तबकों की सेवा/सहयोग एक सीमा तक ही कर पाते हैं| वहां हम एक ख़ास दबाव में रहकर, नियुक्ति के लाभ को दृष्टिगत रख कर कार्य करते हैं जबकि सरकार से जुड़कर कार्य करने से हम समाज की उन्नति, लोगों की बेहतरी, देशहित में कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता के साथ कार्य करते हैं|

3) करियर में अभी तक की क्या बड़ी सफलताएं रहीं हैंएक या दो के बारे में बताईये

मेरी सबसे बड़ी सफलता यह रही है कि मैं अपने लक्ष्य के अनुरूप शिक्षण कार्य में बिहार सरकार के अंतर्गत कार्य करने हेतु चयनित हुआ| पठन-पाठन में अभिरुचि व् शिक्षण के क्षेत्र में और अधिक फैलाव के दृष्टिकोण से वर्ष 2007 में अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक के रूप में चयनित होने एवं बिहार शिक्षा परियोजना में कार्य करना मेरे लिए इस क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुआ| एक विद्यालय से निकलकर जिला एवं राज्य स्तर पर शिक्षा की अलख जगाने का कार्य करना बहुत ही रोमांच से भरा रहा| मैं चूँकि शिक्षक से अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक बना था जिससे मैं शिक्षा के महत्व के साथ-साथ इसकी बेहतरी के लिए किस तरह की योजना बनानी है, किस स्तर पर कैसे लागू करना चाहिए एवं उसका परिणाम क्या होगा, यह सब समझ रहा था| इस सबसे मैंने बिहार शिक्षा परियोजना के निर्धारित लक्ष्य को बेहतर तरीके से शत-प्रतिशत प्राप्त कराया| पुनः विद्यालय लौटने के बाद बिहार शिक्षा परियोजना में प्राप्त अनुभव के आधार पर विद्यालय में पठन-पाठन कराने एवं शिक्षार्थी को शिक्षा का मूल उद्देश्य के साथ अधिगम कराने में शिक्षकों तथा अभिभावकों को आने वाली समस्याओं का भली-भाँती निराकरण करते हुए कार्य कर रहा हूँ| इसी का परिणाम है कि भारत सरकार द्वारा इस वर्ष मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया|

 4) इन सफलताओं के रास्ते में क्या अनोखी मुश्किलें या परिस्थितियाँ सामने आयीं? इनका समाधान कैसे हुआ? क्या आप अपने अनुभव से इसके उदाहरण दे सकते हैं?

समस्या से ही समाधान का रास्ता बनता है, ये बातें मेरे साथ भी हुई हैं| मैं जब दरभंगा जिला में अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक के पद पर कार्य कर रहा था तो पाया कि राज्य व केंद्र सरकार के स्तर से जो योजना बनती है उसे सही ढंग से लागू करने में कुछ स्थानीय दबाव एवं अन्य इस प्रकार के कारण से पूर्ण रूप से सफलीभूत नहीं हो पाता है| इसके लिए दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करना होगा| वहां समय कम मिल पाने के कारण मैं इस कार्य को पूर्ण नहीं कर सका| संयोग से विद्यालय लौटने के बाद मेरा पदस्थापन उसी तरह के माहौल वाले विद्यालय में हुआ| मैंने पूर्व के अनुभव, दृढ़ इच्छाशक्ति रखते हुए उपलब्ध संसाधन में समाज का सहयोग लेने की दिशा में काम करना प्रारम्भ किया| प्रारंभ में तो तरह-तरह की बाधाएं (जैसे- सामाजिक, धार्मिक) आती गयीं जिसे मैंने अपने स्तर से तथा कुछ अन्य पदाधिकारियों की मदद से दूर करते हुए समाज को शिक्षण अधिगम कार्यक्रम से जोड़ा| इसके लिए मैं स्वयं घर-घर जाकर उनके स्वास्थ्य, बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी लेकर सभी के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर लगवाकर, विभिन्न संस्थाओं एवं सरकारी सहयोग से कार्यों में सहयोग देकर उनसे विद्यालय के लिए कुछ न कुछ दान लेकर विद्यालय से एवं अपने आपसे जोड़ने का काम किया| फिर क्या था, आज हम फक्र से कहते हैं कि जहाँ आम धारणा बनी हुई थी कि बच्चे केवल मध्याह्न भोजन के लिए ही विद्यालय आते हैं, से कोसों दूर हमारे बच्चे केवल और केवल शिक्षा ग्रहण करने आते हैं| ये वही विद्यालय है जहाँ पहले छात्राओं का प्रतिशत नगण्य था, आज चेतना-सत्र का सञ्चालन छात्रायें ही कराती हैं|

5) बेहतर शासन और सेवा वितरण में आप अपना योगदान किस प्रकार देखते हैं?     

मुझे लगता है की गाँव में लोगों के पास जानकारी का अभाव रहता है| इसलिए मुझे लगता कि जितना संभव हो ज्यादा से ज्यादा लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक करना चाहिए| मैंने स्वयं गावं में भ्रमण करके अभिभावकों को जागरूक करते हुए बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का काम किया है| मैंने हमेशा शिक्षा के साथ स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है इसलिए मैंने समय-समय पर विद्यालय में स्वास्थ्य शिविर लगाए| इसके अलावा मैं यह सुनिश्चित करता हूँ कि बच्चों को अच्छा और समय पर मध्याह्न भोजन सुचारू रूप से मिलता रहे| मुझे लगता है कि यदि हम अपने दायित्वों को निष्ठा से निभातें रहें तो इस सबसे निश्चित रूप से बेहतर शासन और सेवा वितरण हो सकता है | 

6) अपने काम के किस पहलू से आपको ख़ुशी मिलती है

मेरे पास यदि शिक्षकों तथा छात्रों द्वारा किसी कठिन बिंदु पर कोई प्रश्न या समस्या आती है तो उसे हल करने में मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है| इसके अलावा यदि विद्यालय के उत्थान के लिए मुझे अभिभावकों के साथ चर्चा एवं सुझाव करने का मौका मिलता है तो इस सबसे मुझे काफी अच्छा लगता है| जो भी कार्य मुझे विभाग द्वारा अपने अधिकारीयों के माध्यम से दिए जाते हैं और जब मैं उन्हें सफलतापूर्वक कर पाता हूँ, तो तब मुझे असीम ख़ुशी मिलती है|

 7) i) अच्छे अधिकारी के 3 ज़रूरी गुण   

जो अधिकारी समयनिष्ठ, कर्तव्य परायण एवं अपने कर्मियों से बेहतर सामंजस्य बिठाकर कार्य करते हैं, वे मेरी नजर में अच्छे अधिकारी होते हैं|

ii) काम से सम्बंधित वह ज़िम्मेदारी जिसमे सबसे ज़्यादा मज़ा आता हो

कोई समस्या आने पर जब तक उसका कोई समाधान नहीं निकलता है तब तक मैं बेचैन रहता हूँ और जब समस्या का निराकरण हो जाता है तब मुझे सबसे ज्यादा मजा आता है|

iii) अपने क्षेत्र में कोई ऐसा काम जो आप करना चाहते हो मगर संरचनात्मक या संसाधन की सीमाएँ आपको रोक देती हैं?

एक ऐसी संस्था का निर्माण करने की योजना है जहां से निकलने के बाद प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सके|