प्रशासन के सितारे : खामकर शैला दिनकर

नाम : श्रीमती खामकर शैला दिनकर

पद: बाल विकास प्रकल्प अधिकारी, सतारा, जिला सतारा, महाराष्ट्र

1)आप अभी किस विभाग में और किस पद पे काम कर रहे हैं? आपका मुख्य कार्य क्या हैं? 

मैं पंचायत समिति के समेकित बाल विकास सेवा विभाग में सी.डी.पी.ओ. पद को संभाल रही हूँ  | मैने एम. ए. बी.एड पूरा करने के बाद महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के पेपर दिए और उस में मुझे 2016 को सफलता हासिल हो गई | सब से पहले मुझे अहमदनगर जिले के श्रीगोंदा ब्लॉक की जिम्मेदारी मिली और वहां से मैने इस विभाग के साथ काम करना शुरू किया |

इस पद को संभालते समय कई प्रकार के कार्य करने होते है, इस में से कुछ मुख्य कार्य इस प्रकार है |अपने स्तर पर योजना के कार्यान्वयन से संबंधित व्यय सहित सभी गतिविधियों की निगरानी और पर्यवेक्षण करना। प्रगति रिपोर्ट समय पर भरना और भेजा जाना सुनिश्चित करना | परियोजना क्षेत्रों में योजना के कार्यान्वयन के लिए पर्यवेक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन प्रदान करना। मीटिंग, ट्रेनिंग करना, विभाग के अंतर्गत दी जानेवाली सेवाएँ लाभार्थी तक सही सेपहुँचाना, साथ ही इन सभी का अनुश्रवण, सेवाएँ जैसे की पूरक पोषण आहार, आरोग्य तपासणी, लसिकरण, सन्दर्भ सेवा,पूर्व शालेय शिक्षण- इन सभी की लाभार्थी तक सेवा देना | इस के साथ हर एक स्तर जैसे पंचायत समिति, जिला परिषद्, हमारा विभाग इन सभी के मीटिंग को उपस्थित रहना। इस प्रकार  के कई सारे काम करने होते है |  

2) अभी तक के सफर में सरकार से जुड़के काम करने का अनुभव कैसा रहा है ?                

अभी तक के सफर में जो हमने सरकार के साथ काम किया है, उसका अनुभव अच्छा रहा है। काफी कुछ हमने देखा और सीखा | हमें दिए गए अधिकार और ज़िम्मेदारी के अनुसार हम ज़मीनी स्तर तक सेवा देने में सक्षम हो रहे है | शुरू में जो हमें ज़िला मिला था वह अहमदनगर, मुझे जो ब्लॉक मिला था वह भी अति पिछड़ा हुआ  था |  जिस कारण सरकार की योजना और उनकी सेवा के बारे में लोगो में ज्यादा जानकारी नहीं थी | उस के तुलना में यहाँ लोगो में ज़्यादा।जानकारी है यहाँ के लोग भी काफी एजुकेटेड है तो क्रियान्वयन में ज़्यादा दिक्कत नहीं होती है | इस के साथ ही स्टाफ का एजुकेशनल लेवल बहुत अच्छा है जिस के माध्यम से सभी सेवाएँ ज़मीनी स्तर तक हम अच्छे से ले जाते है | उच्च अधिकारीयों से भी बहुत ही अच्छा सपोर्ट मिलता है |  

3) करियर में अभी तक की क्या बड़ी सफलताएं रहीं हैं? एक या दो के बारे में बताईये?   

मेरे इस कार्यकाल में काफी सारे कार्यक्रम आयोजित किये है।उन को पूरा करके अच्छी सफलता भी हासिल हुई है। हमारे अधिकारियों से मार्गदर्शन मिला उस प्रकार हमने काम किया और उनकी तरफ से प्रशंसा भी पाई है | हमने काफी काम किये है उनमें से एक “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” था|

भारत में 2001 की जनगणना में 0-6  वर्ष के बच्चों का लिंग अनुपात का आंकड़ा 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों  की संख्या 927 थी | जो कि 2011 की जनगणना में घटकर 1000 लड़कों के अनुपात में 918 लड़कियां हो गई है | श्रीगोंदा ब्लॉक के देऊळगांव गाँव में भी यह प्रमाण बहुत कम था, तो हमने इस को बढ़ने के लिए जो कार्यक्रम किये। इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता, सुपरवाइजर, ग्राम पंचायत, गाँव के लोग, इन सब को लेकर हमारे उच्च अधिकारी,जिला परिषद् के सी.ई.ओ के मार्गदर्शन से हमने कार्यक्रम को चलाया | आरोग्य विभाग की ओर से भी गर्भालिंग निदान कायदा का प्रभावी रूप से कार्यवाही की साथ ही साथ फेरी, मीटिंग, होम व्हिजिट, लोगो को परामर्श दिए जिस कारण आज की स्थिति में लड़कियों की संख्या बढ़ गई है|

दूसरी अगर हम बात करते है तो लड़कियों में खून की कमी हमने स्वस्थ विभाग से जो आरोग्य तपासणी की जाती है, उसको देखा तो 10 में से 4 लडकियाँ ऐसी  थी की जिनको रक्त की कमी थी।  इस को पूरा करने के लिए उन सभी को IFA की गोलिया दी। बस देने के ऊपर ही हम नहीं रुके,इस के साथ वह उनके घर में जाकर देखा भी की उन्होंने खाया या नही। इस के लिए उनको परामर्श दिए। इस काम के लिए भी हमें आरोग्य विभाग, महिला एवं बालक विकास के सभापति, उप. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बी.डी.ओ उपस्थित थे जिनके मार्गदर्शन से हमने इस कार्यक्रम को पूरा किया |

4)इन सफलताओं के रास्ते में क्या कुछ अनोखी मुश्किलें या परिस्तिथियाँ सामने आयी ? इनका समाधान कैसे हुआ ? क्या आप अपने अनुभव से इसके उदाहरण दे सकते हैं?                                   

 इस कामो में हमें ज्यादा कुछ मुश्किलें नहीं हुई है। सभी चीजे अच्छे से गई है।  इस में अगर मोठा-मोठी देखे तो गाँव के लोगों को इस काम में लाना, उन सभी को इस काम के प्रति प्रेरित करना परामर्श देने के लिए जब हम घर में जाते तो समय की एक थोड़ी सी समस्या होती थी | लेकिन हमारे लोगों ने सब को जोड़ कर इस को पूरा करके दिखाया | दूसरी एक समस्या का थोड़ा सामना करना पड़ा जो की हमारे पास होने वाला स्टाफ कम था।  जितने कर्मचारी होने चाहिए थे उतने नहीं थी लेकिन हमने इस के लिए गाँव के लड़के और लड़कियों को एक साथ लिया उनके शिक्षा के अनुसार काम दिए और उस कार्यक्रम को अच्छे से पूरा करके दिखाया |

5)बेहतर शासन और सेवा वितरण में आप अपना योगदान किस प्रकार देखते हैं?              

 बेहतर शासन और सेवा वितरण को अगर देखे तो अभी शासन बहुत कुछ बदलाव हो रहे है जिस के कारण सेवा वितरण पहले के तुलना में भी बहुत बढ़िया हो रहा है | जैसे की लाभार्थी के खाते में सीधा पैसा जा रहा है इस के साथ और दूसरी चीज़ को देखे तो पहले हमारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका का मानदेय मिलने में काफी सारी देरी होती थी, लेकिन अभी सभी के खाते ऑनलाइन कर दिए है जिनके खाते में PFMS के माध्यम से सीधा पैसा उनको मिल रहा है | हमारे जो लाभार्थी है जैसे की 0 से 6 साल के बच्चे, गर्भवती माता, धात्री महिलाओ, किशोरियाँ इन सभी की जानकरी अभी  ऑनलाइन की है डेटा को देखते हुए काफी बदलाव हुए है |

मेरे ब्लॉक में भी 337 आंगनबाड़ी है जिन का 100% सभी बच्चों का मेडिकल चेकअप हुआ है, टीकारण 100% है  | मेरे यहाँ सर्व साधारण में 94.77% बच्चे है | इस के साथ ISO Certified आंगनवाड़ी 52 है और आगे के कुछ महीनो में 60 होने वाली है और स्मार्ट आंगनबाड़ी 25 है |

6) अपने काम के किस पहलू से आपको ख़ुशी मिलती है?                                         

फील्ड में जब हम जाते है तो नियम के अनुसार सभी लाभार्थी को उनका लाभ मिल रहा है, इस के साथ समय पर मिल रहा है और अपना पूरा स्टाफ अच्छे से काम कर रहा है तो  इस को देखते हुए हमें ख़ुशी मिलती है। इस के साथ ही माझी कन्या भाग्यश्री योजना का लाभ जब एक लड़की है तो 50,000 और दो लड़की है तो हर एक लड़की को 25,000 रूपये दिए जाते है। इस के लाभार्थी अभी बढ़ रहे है इस को देखते हुए भी ख़ुशी हो रही है लड़का हो या लड़की दोनों को लोग अब एक सामान नजर से देख रहे है |

7)  अच्छे अधिकारी के 3 ज़रूरी गुण  ?                                                                

 नेतुत्व का गुण, आपनी ज़िम्मेदारी को पूरी तरह से निभाना, सहानुभूति

8) काम से सम्बंधित वह ज़िम्मेदारी जिसमे सबसे ज़्यादा मज़ा आता हो

फिल्ड व्हिजिट के लिए जाना और लाभार्थीयों को अच्छी सेवा मिलने के लिए कर्मचारियों को प्रेरित करना |   

9) अपने क्षेत्र में कोई ऐसा काम जो आप करना चाहते हो मगर संरचनात्मक या संसाधन की सीमाएँ आपको रोक देती हैं-

ऐसा ज़्यादातर नहीं होता है, काम तो होते ही है फिर भी खाली पदों की संख्या एक है| आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता को टेक्निकल ट्रेनिंग होनी चाहिए | आंगनवाड़ी की जो इमारत है उस के लिए जगह अच्छी और ज़्यादा दूर नहीं होनी चाहिए, लेकिन गाँव में ज़मीन जो दान की जाती है, जिस पर हम बिल्डिंग बनाते है वह शहर से दूर होती है और मेन जगह पर नहीं रहती है |