प्रशासन के सितारे: उदय कुमार वर्मा

नाम: उदय कुमार वर्मा

पद:राज्य वित्त प्रबंधक,  स्वच्छ बिहार अभियान, ग्रामीण विकास विभाग 

1) आप अभी किस विभाग में और किस पद पर काम कर रहे हैं ? आपका मुख्य कार्य क्या है ? 

 मैं अभी ग्रामीण विकास विभाग के लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान में राज्य वित्त प्रबंधक के पद पर कार्यरत हूँ| मेरा मुख्य कार्य राज्य स्तर पर योजना  के पूरे वित्तीय कार्य को देखना और सुपरविसन करना |

2) अभी तक के सफ़र में सरकार के साथ जुड़ कर काम करने का अनुभव कैसा रहा है ? 

अभी तक के सफ़र में सरकार के साथ जुड़ कर काम करने का अनुभव मेरा अच्छा रहा है, क्योंकि मैं बिल्कुल अपने अंदाज़ में और पारदर्शिता के साथ काम करता हूँ, जिसके कारण मुझे सरकार के साथ काम करने में कोई समस्या नहीं आती | मैं जहाँजहाँ भी सरकार के साथ काम किया है मैं वहांवंहा अपने अंदाज़ और नए आईडिया को अपनाते हुए कार्य किया है | जिसके करण मेरा काम बहुत जल्द लोगों के बीच प्रभावी हो जाता है | मैं अपने सभी कर्मी के साथ एक जैसा पेश आता हूँ जिसके कारण उन लोगों में मेरे कार्य को करने के लिए उत्साह बना रहा है | अगर कोई कर्मी अपने कार्य में लापरवाही बरतता है तो, मैं उसे कोई डांट / फटकार नहीं लगाता बल्कि मैं उसे काम करने के लिए मोटीवेट करता हूँ | इस तरह से कुल मिलाकर कहा जाये तो मैं अपने सूझबूझ के साथ अपने कार्य को करता हूँ जिसके कारण कार्य करने में मज़ा भी आता है |

3) करियर में अभी तक की क्या बड़ी सफलताएँ रही है ? एक या दो के बारे में बताएं ? 

मैं सरकार के साथ जुड़ कर 1992 से अभी तक कार्य  कर रहा हूँ  | मेरे करियर की अभी तक की ऐसे तो बहुत सफताएं रही है | मैं उसी में से दो के बारे में आपसे जिक्र करना चाह रहा हूँ

पहला सफलता यह रही थी की जब मैं पहली बार बिहार शिक्षा परियोजना में मुख्य लेखापाल के रूप में पदस्थापित हुआ तो उस समय ऑफिस की स्थिति बहुत ही बत्तरथी खास कर वितीय लेखाजोखा का बहुत ही भयावह स्थिति थी | उस समय वित्तीय मामले का कोई भी फाइल या डाटा अपलोड नहीं किया जाता था , ना ही वित्तीय किसी भी प्रकार की कोई ऑफिस में पारदर्शिता थी , ना ही कोई ऐसा सिस्टम था जिसमे सारे वितीय रिकॉर्ड को रखा जाये जो बिल्कुल पारदर्शी हो | ऐसे और भी बहुत मुद्दे थे जो ऑफिस कल्चर में फीट नहीं बैठते थे | जब मैं यहाँ ज्वाइन किया, तब मैं सबसे पहले उपरोक्त सभी कमियों पर कार्य किया और उसे दूर किया | मैं ऑफिस में एक सिस्टम बनाया जिसमे वितीय सारे  रिकॉर्ड को रखा जा सके, ताकि उस रिकॉर्ड को कोई भी मेरे जाने के बाद आने वाले अधिकारी देख सके | वितीय सभी डाटा को ऑनलाइन किया ताकि वितीय कार्य में पारदर्शिता बनी रहे

दूसरा मेरा सफलता यह है कि मेरे कार्य से प्रभावी हो कर भारत सरकार मुझे दो साल के लिए भारत सरकार में वित्तीय सलाहकार के रूप में रखा | जब मैं भारत सरकार का वित्तीय सलाहकार था तो उस समय मैं भारत के पूरे राज्यों के लेखा-पाल को प्रशिक्षण देने का काम किया करता था

4) इन सफलताओं के रास्ते में क्या कुछ अनोखी मुश्किलें या परिस्थितियां सामने आई ? इनका समाधान कैसे हुआ ? क्या आप अपने अनुभव से इसके उदाहरण दे सकते है ? 

जब मैं पहली बार बिहार शिक्षा परियोजना में मुख्य लेखापाल के पद पर पदस्थापित हुआ तो उस समय ऑफिस की स्थिति बहुत ही बेहाल स्थिति में थी | जैसा की मैं आपसे उपर में भी ज़िक्र किया था की वहाँ कोई वित्तीय सिस्टम नहीं बना था जिसमें वितीय कार्य में पारदर्शिता बनी रहे | जब मैं इस सिस्टम के उपर काम करना शुरू किया तब मेरे ही ऑफिस के लोग मेरा विरोध करने लगे | हमारे बॉस भी नहीं चाहते थे की कोई ऐसा सिस्टम बने जिसे वित्तीय पारदर्शिता हो सके| मेरे बॉस मेरे ट्रान्सफर के लिए कई नेता / अधिकारी से बात करने लगे | पर मैं बिल्कुल नही घबराया और मैं इसके उपर काम किया | इस काम में मेरी सलफता देने का श्रेय हमारे उस समय के विभाग के प्रधान सचिव अंजनी बाबु को जाता है | उन्होंने ही मुझे इस काम को करने के लिए सपोर्ट किया |

5) बेहतर शासन और सेवा वितरण में आप अपना योगदान किस प्रकार देखते है ? 

बेहतर शासन और सेवा में मैं अपना योगदान इस प्रकार देखता हूँ कि मैं कोई भी कार्य पूरी लगन , ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ करता हूँ | इसके साथसाथ मैं अपने ऑफिस के सभी कर्मियों के साथ समरूपता का भाव रखता हूँ | मेरी नज़र में सभी कर्मी एक समान है | अगर मेरे कोई कर्मी कुछ गलती कर रहा हो तो मैं उसे दंडित ना कर मुझे मोटीवेट करता हूँ ताकि उसका दिमाग हमेशा के लिए साफ हो जाये और अपने काम में पूरा 100 % समय दे

6) अपने काम के किस पहलू से आपको ख़ुशी मिलती है ? 

जब मेरे ऑफिस में काम करने वाले कर्मी का कैपेसिटी बिलिडिंग के उपर काम करता हूँ और मैं उन्हें कैपेसिटी बिलिडिंग कराने का तरह तरह का नए आईडिया को अपनाता हूँ जिसके फलस्वरूप जब उनके कार्य करने की क्षमता में बढ़ौतरी देखता हूँ, तो उस समय मुझे यह देख कर बहुत ख़ुशी होती हैं | मेरे ऐसे कई कर्मी है जिसे मैं कैपेसिटी बिलिडिंग करा कर एकाउंटिंग का काम कराया हूँ | जिनको एकाउंटिंग में ABC का भी ज्ञान नही था और वह कोई दूसरा क्लर्कियल जॉब किया करते थे मैं उनको कैपेसिटी बिलिडिंग कर उनसे एकाउंटिंग का काम करवाया है | आज वैसे बहुत सारे लोग हैं जो  दुसरे विभाग में जाकर लेखापाल की नौकरी कर रहे है | यह सब देख कर मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है |

7) i) अच्छे अधिकारी के 3 जरूरी गुण : – 

  • अपने कार्यों की प्रती जवाबदेह और पारदर्शी होनी चाहिए
  • अच्छे अधिकारी के पास पसेंस पूरी होनी चाहिए
  • अच्छे अधिकारी में अपने कर्मीयों के बिच समरूपता का भाव  होनी चाहिए

ii) काम से सम्बंधित वह ज़िम्मेदारी जिसमे सबसे ज़्यादा मज़ा आता हो

जब मुझे ऑफिस से यह बोला जाता है की नवनिर्वाचित लेखापाल को एकाउंटिंग की पूरी ज्ञान दे कर उन्हें इस लायक बना देना की वो जिला के एकाउंटिंग का काम अच्छे से कर सके तो मुझे ऑफिस से दी गयी यह जिम्मेदारी में बहुत मज़ा आता है |

iii) अपने क्षेत्र में कोई ऐसा काम जो आप करना चाहते हो मगर संरचनात्मक या संसाधन की सीमाएं आपको रोक देती है ?

मैं यह चाहता हूँ की मेरा जो काम करने का तरीका है उसमे मुझे स्वतंत्रता दिया जाएँ | मेरे जो रचनात्मक सोच है वो विभाग में लागू हो | मुझे बांध दिया जाता है मैं जिस तरह से पारदर्शिता के साथ काम करना चाहता हूँ वो अब नहीं करने दिया जाता है | बॉस का दवाब होता है | पहले और अब के कार्यालय वातावरण में बहुत अंतर हो गया है | पहले कुछ नया करने की आजादी थी और अब ऐसा कुछ नहीं है जैसे चल  रहा है चलने दिया जाता है