रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए, खाद्य सुरक्षा के मायने

क्या आप जानते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर मिनट, दूषित खान-पान से 44 से ज्यादा लोग बीमार हो जाते हैं। 66 फीसदी लोग बैक्टीरिया जनित खान-पान के कारण बीमार होते हैं, जबकि 26 फीसदी लोग दूषित रसायन के चलते, 4 फीसदी पैरासाइट के चलते बीमारी का शिकार होते हैं। एक तथ्य के अनुसार भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कीटनाशक उत्पादक देश है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में 108 टन सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए 6000 टन कीटनाशक का उपयोग किया जाता है मानव स्वास्थ्य के लिए कीटनाशक यानी वो जहर है जो फल, सब्जियों और अनाज को कीड़ों और खरपतवार से बचाने के लिए डाले जाते हैं लेकिन इसका सिर्फ एक हिस्सा ही कीड़ों और रोगों को मारने के काम आता है, बाकि 99 फीसदी का बड़ा हिस्सा उस फल और अनाज में समा जाता है जो खाने वालों को बीमार कर सकता है। कीटनाशकों के प्रभाव से अस्थमा, आटिज्म, डायबिटिज, परकिन्सन, अल्जाइमर, प्रजनन सम्बन्धी अक्षमता और कई तरह के कैंसर होने का खतरा है।

आज पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में सुरक्षित खाद्य वस्तुओं का उपभोग एवं पोषण पर ध्यान देना आवश्यक हो गया है, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ा है।

क्या है खाद्य सुरक्षा?

खाद्य सुरक्षा का अर्थ यह सुनिश्चित करना कि हर व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले खाद्य केवल एक कृषि सम्बन्धी और व्यापारिक वस्तु नहीं है बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य का  मुद्दा भी है। हर वर्ष विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है तथा इस वर्ष इसका थीमस्वस्थ कल के लिए, सुरक्षित भोजन आज’ रखा गया है।  इस वर्ष का विषय भोजन की गुणवत्ता पर ज़ोर देता है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा सरकार, उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच आपसी साझीदारी का हिस्सा है। ये साझेदारी यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि हमारा भोजन सुरक्षित है या नहीं, कहीं यह हमारे स्वास्थ्य को नुकसान तो नहीं पहुंचाएगा। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के लिए खाद्य और कृषि संगठन तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन नोडल एजेंसी है, जो दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही हैं।

भारत में खाद्य सुरक्षा को लेकर  प्रावधान?

एफएसएसएआई (FSSAI) यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत एफएसएसएआई यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकों को शुद्ध खान-पान मिले तथा हानिकारक एवं ज़हरीले पदार्थ बाज़ार तक न पहुंचे। किसी खाद्य पदार्थ के विक्रेता के पास एफएसएसएआई लाइसेंस होना अनिवार्य होता है। यह हम पैकेड बंद खाने एवं पीने के वस्तुओं खाने का तेल, दालें, बिस्किट, नमकीन, जूस  इत्यादि  के ऊपर अंकित देख सकते है | 

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है कि खाने में मिलावट के मामले पिछले 8 साल में दोगुने हो गए हैं इन्ही आंकड़ों को कम करने के लिए खाद्य समाग्रियों की गुणवत्ता के प्रति विशेष ध्यान दिया जाता है। 

अभी सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है

खाद्य पदार्थों में अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग को जाँचने और उसका प्रयोग मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, अतः ऐसे उत्पादों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। उम्मीद लगाई जा सकती है कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 को मंजूरी मिलने से भविष्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।  

नागरिक खाद्य सम्बन्धित शिकायतों हेतु क्या कर सकते हैं?

खाद्य सुरक्षा और पोषण हमारे जीवन से सीधा जुड़ा विषय है, इसलिए हमें इससे सम्बंधित जानकारी के बारे में मालुम होना बेहद आवश्यक है अगर खाद्य से सम्बन्धित समस्याएं है तो इसके लिए कानून और शिकायत तंत्र प्रणाली क्या है तथा यह हमें किस प्रकार का अधिकार प्रदान करता है, आईये उन पर बात करते हैं:

  • खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 पूरे भारत में 1 जून 1955 को लागू हुआ। इसका उद्देश्य भोजन में मिलावट की रोकथाम के लिए प्रावधान करना है तथा यह अधिनियम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सम्बन्धी वस्तुओं का अधिकार देता है। 
  • किसी उत्पाद या सेवा में यदि दोष पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 हमें यह अधिकार प्रदान करता है कि उत्पाद/सेवा निर्माता क्षतिपूर्ति के प्रति जवाबदेह  है। 
  • खाद्य पदार्थों में मिलावट और गड़बड़ी की आंशका होने पर उपभोक्ता फ़ूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी आफ इण्डिया की वेबसाईट और टोल फ्री नम्बर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत के लिए वेबसाईट के सिटीजन कनेक्ट पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिस पर 15 दिन के भीतर आपकी शिकायत पर जवाब प्राप्त होगा।

अतः एक नागरिक होने के नाते जो हमें अधिकार मिले हैं उनके बारे में हमें जानना बेहद जरुरी है, क्योंकि जब तक हम स्वयं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर सरकार से बेहतर सेवाओं के लिए जवाबदेही नहीं मांगेगे तब तक हम भी समस्याओं को बराबर हिस्सा बने रहेंगे।