नेहरु युवा केंद्र के साथी कुलदीप वर्मा की कहानी

मेरा नाम कुलदीप वर्मा है और मैं जयपुर जिले के जालसू पंचायत समिति के ग्राम देवगुढा का रहने वाला हूँ| मैं मध्यम परिवार से सम्बन्ध रखता हूँ, मेरे पिता जी ग्राम विकास अधिकारी है और माता जी गांव के ही एक आंगनबाड़ी पाठशाला में कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत हैं|

अभी वर्तमान में मैं नेहरू युवा केंद्र के राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक (ब्लॉक युवा समन्वयक) के रूप में ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाने एवं सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दे रहा हूं|

सामाजिक कार्यों में रुचि जब मैंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली, उसी समय से मैंने सर्वप्रथम 2011-12 में डॉ. अंबेडकर विचार मंच के साथ मिलकर कई  सामाजिक कार्य किए|

उसके बाद नेहरू युवा केंद्र जयपुर ने मेरा जालसू ब्लॉक पर ब्लॉक युवा समन्वयक के पद पर चयन किया इस दौरान मैंने ब्लॉक के लगभग सभी गांव जाकर जहां युवा मंडल नहीं बने हुए थे वहां युवा मंडलों का गठन किया और जो पहले से बने हुए थे उनको सक्रिय किया| इस दौरान मेरी सामाजिक कार्यों में रुचि और भी ज्यादा बढ़ने लगी और समाज सेवा के कार्यों में जैसे स्वच्छ भारत मिशन, पर्यावरण संरक्षण, घायल जानवरों का उपचार, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान, जल बचाओ अभियान, परिंडा अभियान एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य विभिन्न मुद्दों को लेकर जागरूकता अभियान पर कार्य किया|

डॉ अम्बेडकर विचार मंच के माध्यम से मैं कई कार्यक्रमों में जयपुर शहर की ओर आने लगा और यहीं से सामाजिक सेवा कार्यों में अपना योगदान देने लगा| सामाजिक सेवा के क्षेत्र में जिनमें वृक्षारोपण, नशा मुक्ति रैली, सरकारी स्कूलों के नामांकन बढ़ाने के लिए घर-घर संपर्क करना आदि कई बिंदुओं पर विभिन्न संस्थाओं जिनमें युवा टीम स्वाभिमान जयपुर ग्रामीण मुख्यतः और आर्ट ऑफ लिविंग के साथ मिलकर काम किया| इस दौरान मैंने राजस्थान के विभिन्न जिलों एवं देश के अन्य राज्यों का दौरा किया, जिससे कि वहां की सामाजिक परिवेश एवं ग्रामीण परिस्थितियों को करीब से समझने का अनुभव मिला| साथ ही मुझे युवा टीम स्वाभिमान के माध्यम से राष्ट्रीय युवा महोत्सव ग्रेटर नोएडा जाने का भी मौका मिला|

धीरे-धीरे लोग सरकारी कार्यों जैसे पेयजल विभाग, पंचायती राज विभाग, कृषि विभाग से सम्बंधित कार्यों को लेकर मेरे पास आने लगे वैसे तो मेरे पिता जी सरकारी कर्मचारी हैं| कागज़ी कार्रवाई थोड़ी बहुत मैं जानता था लेकिन मुझे इतना अनुभव नहीं था कि मैं उनके काम करवा सकूं लेकिन मैंने अपनी कोशिश फिर भी जारी रखी और जितना संभव हो पाता था उतना लोगों की मदद करता था|

लोगों का काम करवाने के दौरान बहुत सी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा| पंचायत प्रशासन की बारीकियों को एवं उसकी जटिलताओं को बारीकी से देखने का अनुभव हुआ तो सिर्फ नेहरू युवा केंद्र जयपुर में कार्य करने के दौरान ही मैं सेंटर फॉर रिसर्च पॉलिसी के “हम और हमारी सरकार” कोर्स की टीम के संपर्क में आकर मेरे अन्य युवा साथियों के साथ हमने सरकारी मशीनरी कैसे काम करती है, योजनाओं के लिए पैसा कहां से आता है तथा कब और कैसे अटक जाता है, योजनाएं कहां पर बनती हैं, यह जानने को मिला जो कि हमारे क्षेत्र में काम करने के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हुआ| अपनी समझ को और पक्का करते हुए मैं धीरे-धीरे लोगों के काम करवाने लगा और इससे मेरी लोकप्रियता भी बढ़ी और लोगों से आशीर्वाद मिलने लगा, चाहे वह सोशल मीडिया के जरिए हो या अन्य माध्यमों के द्वारा मिल रही हो|

पहले कई ऐसी समस्याएं थी जिनका पता तो था लेकिन उनके निवारण के लिए कोई योजना नहीं बना सकते थे, मेरे लिए “हम और हमारी सरकार” कोर्स करने के बाद सामाजिक क्षेत्र में आर्थिक क्षेत्र में या आप किसी भी क्षेत्र में काम करें तो उसमें हर प्रकार से मददगार साबित हो रहा है क्योंकि इस कोर्स के द्वारा मुझे यह मालूम चलता है कि सरकार कैसे बनती है, सरकार किस रूप में काम करती है सरकार को चलाने में क्या-क्या समस्याएं आती है, सरकार की जनता के प्रति क्या जवाबदेही है, नौकरशाह कैसे काम करते हैं और मुख्य स्वरूप से विकेंद्रीकरण सरकार क्या है तथा वह अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को कैसे पूरा करते हैं सरकार वास्तव में काम करना चाहती है लेकिन उसका प्रशासनिक ढांचा ऐसा बना हुआ है इतना जटिल है कि उसके द्वारा चलाई गई जन कल्याणकारी योजनाएं पूर्ण रूप से धरातल स्तर तक नहीं पहुंच पाती है|

इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण मेरे साथ घटित हुआ पड़ोस के ग्राम पंचायत रहने वाले मेरे दोस्त के यहां स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत आने वाले शौचालय के पैसे कहीं अटके हुए थे यह बात उनको भी नहीं पता थी और मुझे भी नहीं पता थी| मैंने मालूम किया की समस्या कहां पर आ रही है और मालूम करने पर पता चला कि पंचायत समिति से पैसा उनके खाते में ट्रांसफर नहीं किया गया फाइल नीचे दबी हुई थी जांच पड़ताल के बाद फाइल मिली और उसमें लाभार्थी के खाते में पैसा ट्रांसफर करवाया|

यहां पर मैंने “हम और हमारी सरकार” कोर्स में अर्जित ज्ञान का उपयोग किया और संबंधित परिवार को अनुदान की राशि दिलवाई क्योंकि मैं जानता था कि पैसे का प्रवाह कैसे होता है और पैसा कहाँ-कहाँ से होकर नीचे पहुँचता है|

मैं बताना चाहता हूं कि मैंने सामाजिक क्षेत्रों के कार्य में एवं धरातल स्तर तक “हम और हमारी सरकार” कोर्स के बारे में हमारे गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के कक्षा 11 व 12 को इस कोर्स के बारे में विस्तार से बताया तथा सरकार का प्रशासनिक ढांचा कैसे काम करता है उसके बारे में बताया जो छात्रों के लिए काफी रुचिपूर्ण रहा|