इंटरनेशनल मदर्स डे: क्या माओं के स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखा जा रहा है?

एक बार नेपोलियन ने कहा था कि “तुम मुझे 60 अच्छी मां दो, मैं तुम्हें एक बेहतर राष्ट्र दूँगा ”

 देश और समाज के निर्माण को दिशा देने में मां की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। माँ और मातृत्व को इसी मई माह के दुसरे रविवार को हम सबने खूब प्रकाशमान किया है। परन्तु इसमें कतई संशय नही कि आज के समय में माओं को अच्छा स्वास्थ्य देना जरुरी है और भारत जैसे राष्ट्र जहाँ कुपोषण की  का दर वैसे भी अधिक है यहाँ उनका स्वास्थ्य और भी जरुरी हो जाता है |

इकोनॉमिक्टा इम्स की 13नवम्बर 2019 की एक खबर अनुसार देश में हर साल गर्भावस्था के दौरान होने वाली दिक्कतों और बीमारियों की वजह से 56,000 से अधिक महिलाओं की मौत हो जाती है तथा भारत में आज भी कुपोषण से पांच साल से कम आयु के 68.2% बच्चों की मौत हो जाती है|

बहराल, भारत में केंद्र स्तर से माताओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए दो बड़ी फ्लेगशिप योजनाये,  प्रधानमन्त्री मातृ वंदन योजना(PMMVY) एवं जननी सुरक्षा योजना(JSY) संचालित की जाती है| प्रधानमन्त्री मातृ वंदन योजना(PMMVY) में राज्यों की हिस्सेदारी 40 फीसदी (नार्थइस्टर्न में 10%) है| जबकि जननी सुरक्षा योजना(JSY) 100%केंद्र द्वारा संचालित है|

प्रधानमन्त्री मातृ वंदन योजना (PMMVY)
क्या योजना है?

प्रधानमन्त्री मातृ वंदन योजना (PMMVY) से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले जीवित बच्चे के जन्म के दौरान 5000 रूपए की लाभराशि योजना की शर्ते पूर्ण करने पर किस्तों से  में  DBT के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे भेजे जाने का प्रावधान है

प्रधानमन्त्री मातृ वंदन योजना(PMMVY) में राज्यों की हिस्सेदारी 40 फीसदी (नार्थइस्टर्न में 10%) है|

सरकार पैसा  कैसे  खर्च कर रही है?

भारत सरकार ने जितना पैसा इस योजना के लिए आवंटित किया था| उसका वितीय वर्ष 2017-18 में 79% ही जारी किया तथा वितीय वर्ष 2018-19 एवं  2019-20 (नवम्बर 2019तक ) क्रमश: ये पैसा 87 % एवं 51 % ही जारी हुआ है|

ऐसे ही प्रतिवर्ष लाभार्थीयों के नामांकन की बात करे तो वर्ष2019-20 में  जनवरी 2020 तक केवल औसतन 42% नामांकन हुआ है| हिमाचल में ये नामांकन 58% ,राजस्थान में 34%, बिहार में 60%और मध्यप्रदेश में 55% रहा |

सरकारे आमतौर पर समय पर तो पैसा जारी नही करती, उपर से आवंटित पैसा पूरा भी नही देती परन्तु लाभार्थियों का योजनाओं के लिए नामांकन भी कम होना गंभीर विचारक तथ्य है|

इसके बाद भी दिक्कते समाप्त नही होती | जितने का नामांकन हुआ उसमे से वर्ष2019-20 में  जनवरी 2019-20 तक  हिमाचल में 72% को पहली 69% को दूसरी एवं 53%को ही तीसरी क़िस्त मिली , वहीँ राजस्थान में 79% को पहली 75% को दूसरी एवं 44%को ही तीसरी क़िस्त मिली एवं मध्यप्रदेश में 72% को पहली 68% को दूसरी एवं 49%को ही तीसरी क़िस्त मिली जबकि बिहार में सिर्फ 32% को पहली 19% को दूसरी एवं 06%को ही तीसरी क़िस्त मिली|

जननी सुरक्षा योजना(JSY)
क्या योजना है?

ऐसे ही दूसरी फ्लेगशिप योजना जननी सुरक्षा योजना(JSY) एक सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर मातृ और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करना है। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का हिस्सा है| इसमें राज्यों को उनके स्वास्थ्य संकेतकों के आधार पर कम प्रदर्शन और उच्च प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में विभाजित किया गया है।’लो-परफॉर्मिंग स्टेट्स’ (LPS) में बिहार, मध्यप्रदेश,राजस्थान आदि  शामिल है, जहाँ कम संस्थागत प्रसव दर है| जबकि हिमाचल को ‘उच्च प्रदर्शन वाले राज्य’ (HPS) माना गया है।

सरकार पैसा  कैसे  खर्च कर रही है?

‘लो-परफॉर्मिंग स्टेट्स’ (LPS) में इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओ को संस्थागत प्रसव के दौरान सरकार द्वारा 1400 रूपये धनराशि दी जाती है जबकि शहरो के लिए यह राशि 1000 रुपये है | वहीँ दूसरी और उच्च प्रदर्शन वाले राज्य’ (HPS) में यह ग्रामीण क्षेत्रो में BPL, SC,ST गर्भवती महिलाओं को राशि 700 रुपये दी  जाती है तथा शहरी के लिए 600 रूपये दिए जाते है | 

परन्तु इस योजना में भी वितीय वर्ष 2019-20 में अनुमानित लाभर्थियो में से सितम्बर 2019 तक ‘उच्च प्रदर्शन वाले राज्यो’ (HPS) में 38% ही नामांकन हुआ तथा ‘लो-परफॉर्मिंग स्टेट्स’ (LPS) में 21% नामांकन दर्ज हुआ है |

निष्कर्ष

विगत वर्षो में दोनों हो योजनाओं में आधे से भी कम योग्य लाभार्थियों का नामांकन हुआ और उनमें भी  सभी को लाभ नही मिला| ऐसे में सकुशल मातृत्व पर सरकार की समझ असमंजस में नजर आती है | 

बड़ा सवाल यह भी निकल आता है कि आखिर जमीनी स्तर पर योजनाये क्यों विफल हो जाती है |

ऐसे में क्या एकदिवसीय मातृत्व जयकारा काफी है ?

अभी सरकार के पास कोरोना महामारी के रूप एक नई स्वास्थ्य चुनौती विकराल रूप लिए खड़ी है| अब मातृत्व यानि की गर्भवती महिलाओं का खास ख्याल रखने में सरकार और हमारा दोनों का दायित्व और बढ़ा है|

निश्चित रूप से मातृत्व दिवस पर माताओं को हजारो महान संज्ञाए देने वाले हम एवं विभिन्न मनलुभावन घोषणायें करनी वाली सरकारों से यही मातृत्व जब तक सवाल करता रहेगा तब तक की या तो हम उनके हक के लिए आवाज नही उठाते या सरकारे सही फैसले लेकर जमीनी स्तर पर काम नही करती|