अपने हक की मांग- एक सफल प्रयास

परिचय

मेरा नाम मधुबाला शर्मा है| मैं राजस्थान के अलवर जिले की रहने वाली हूँ| मैंने शादी से पहले अर्थात 19 वर्ष पहले यूनिसेफ के साथ मिलकर वाटर एंड सैनिटेशन पर काम किया| इसके 2 वर्ष बाद मुझे लोक संस्था ने महिला एवं स्वास्थ्य की ट्रेनिंग दिलवाकर प्रशिक्षक बनाया जिसमें महिलाओं में होने वाली बीमारियों की जानकारी देते व बढ़ते शरीर में क्या-क्या बदलाव होते हैं उस पर हम जानकारी देते थे ताकि वो आंगनवाड़ी पर आने वाली किशोरी बालिकाओं को स्वयं ये सब समझा सकें| 

इसके बाद 2000 में मेरी शादी हो गयी, शादी के बाद मैंने स्वयं का स्कूल खोला, जिसमें तीन साल बच्चों को पढ़ाया| फिर जुड़वाँ बच्चे होने के कारण मैंने स्कूल छोड़ दिया और 3 साल तक कोई काम नहीं किया| 

इब्तिदा संस्था में काम

जब बच्चे स्कूल जाने लगे तब 2011 में मैंने इब्तिदा संस्था में काम करना शुरू किया| जिसमें महिला साक्षरता एवं सशक्तिकरण पर काम किया| इसका उद्देश्य यह था कि महिलाओं को साक्षर करना व 5वीं और 8वीं तथा 10वीं के पेपर दिलवाए और महिलाओं की पहुँच पंचायत तक बनाई| हमारा मानना है कि यदि महिलाएं पढ़ी-लिखी होंगी तो वो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी और उनके प्रति सवाल-जवाब करने में सक्षम होंगी|

इस कार्यक्रम को चलाने के लिए समूह की महिलाओं को उसी गाँव में ही किसी एक घर में जगह लेकर 15 से 25 महिलाओं का एक समूह बनाया जिसे नाम दिया गया ‘महिला ज्ञानशाला’ और उन्हें पढ़ाने वाली उसी गाँव की एक पढ़ी-लिखी महिला होती जोकि उन्हें 3-5 घंटे तक पढ़ाती थी|  पढ़ाने की सामग्री इब्तिदा से मिलती जिसमें स्लेट, पेन्सिल, किताबें, मोती माला, सांप-सीढ़ी, कैलकुलेटर आदि सामग्री होती थी, खेल-खेल व गीत और कविताओं के माध्यम से महिलाओं को पढ़ाया जाता था|

इसके बाद 3 वर्ष राजिविका का साथ इब्तिदा संस्था की पार्टनरशिप में NRLM प्रोजेक्ट पर काम किया| जिसके अंतर्गत हमें राजिविका को 3 वर्ष में 250 समूह, 25 ग्राम संगठन को मजबूत करने का काम किया| हमने 25 गाँव में काम किया और 3000 महिलाओं को साथ में जोड़ा|

अभी वर्तमान में मैं इब्तिदा संस्था के अंतर्गत अधिकार कार्यक्रम में काम कर रही हूँ जिसमें हम सरकार की 10 योजनाओं पर काम कर रहे हैं जिनमें:

  1. पेशन  2) पालनहार 3) खाद्य सुरक्षा 4) प्रधानमंत्री आवास 5) उज्ज्वला योजना 6) छात्रवृति योजना 7) पंचायती राज 8) मनरेगा 9) सूचना का अधिकार 10) आंगनवाड़ी आदि शामिल हैं| 

इसका उद्देश्य हमारा यही है कि लाभार्थी एवं वंचित समुदाय तक इन योजनाओं का लाभ मिले| इसके लिए हम उस गांव में चल रहे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को जोड़कर एक संगठन बनाते हैं जिसको नाम दिया गया है ‘ग्राम अधिकार समिति’| इसके लिए गांव से ही एक पढ़ी-लिखी महिला को अधिकार सखी के तौर पर तैयार करते हैं और महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हैं जिसमें महिलाओं को पात्रता, लाभ, दस्तावेज, विभाग व् शिकायत प्रक्रिया को विस्तार से बताते हैं| \

इन्होने अलवर ज़िले की पंचायतों में सरकार के साथ किस तरह से जुड़ कर 50 लोगों को मनरेगा योजना के तहत काम मिलवाने में मदद करी?

अलवर जिले की कई पंचायतों को गाँव में 8 साल से मनरेगा योजना के अंतर्गत काम नहीं चल रहा था| काफी प्रयास किये, बार-बार लोग पंचायत में काम मांगने के लिए जा रहे थे लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा था| हमने भी पंचायत सचिव व सरपंच से काम देने की बात कही लेकिन उनका कहना था कि जब पंचायत में काम ही नहीं है तो हम काम कहाँ से दें? बस यही कहते थे 10-15 दिन रुक जाओ हम सभी के लिये काम देंगे लेकिन बावजूद इसके फिर भी काम नहीं मिला| इस तरह से 6 से 8 महीने बीत गए लेकिन जिन लोगों ने काम माँगा था उन्हें काम नहीं मिला| तो अंत में फिर मैंने फार्म नंबर 6 लेकर 50 लोगों के फार्म भरवाये और उन्हें पंचायत में जाकर सचिव से मिलने को कहा| अगर पंचायत में 6 नंबर जमा करके उसकी रसीद ली जाए तो पंचायत को 15 दिन के भीतर काम मांगने वाले व्यक्ति को काम देना होता है अगर ऐसा न हो तो उस स्थिति में उस व्यक्ति को भत्ता देने का प्रावधान है| 

पंचायत में जाने के बाद उन लोगों को सचिव ने कहा की मधु मेडम आप सभी को भड़का रही है, उनकी बातों में मत आओ| इस तरह पंचायत सचिव ने महिलाओं को खूब सुनाया और कहा जब काम होगा तो तुम्हे मिल जायेगा यहाँ आने की जरूरत नहीं है| उन लोगों ने मुझे पंचायत से फ़ोन किया और कहा कि हमें पंचायत सचिव ने कार्यालय से बाहर निकाल दिया है और कह रहा है कि जब काम होगा तो तुम्हे मिल जायेगा| मैं पंचायत कार्यालय पहुंची और पंचायत सचिव से कहा कि काम माँगना इनका हक़ है और पंचायत को इन्हें काम देना होगा| मैंने सचिव से कहा कि अगर आप काम नहीं दे सकते तो हमें लिखकर दे दीजिये कि पंचायत में काम नहीं है फिर हम दूसरी जगह से मनरेगा का काम लायेंगे|

पंचायत सचिव ने लिखकर तो नहीं दिया लेकिन हमें इस बात का यकीन करवाया कि अगले 5-6 दिन में हर हाल में लोगों को काम मिल जायेगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो आप आगे कार्यवाही कर लीजियेगा| इसका परिणाम यह हुआ कि 50 में से 40 लोगों को काम मिल गया| 

मुझे ये सब काम करना बहुत अच्छा लगता है कि जब लाभार्थी अपने हक़ की मांग करते हैं और उन्हें उसका लाभ मिल जाता है| इसमें हमने 3 महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास के लिए पैसा दिलाया है, 3 महिलाओं की पालनहार का पैसा जो एक वर्ष से किसी दुसरे के खाते में जा रहा था उसे प्रयास करते हुए उसके खाते में एक साथ 40 हजार रुपये दिलवाये| कई गाँवो में हमने शराबबंदी पर काम किया जिसमें कुछ गाँव में तो सभी के प्रयास से शराब बंद हो चुकी है कुछ गाँव में अभी भी प्रयास चल रहे हैं जिसमें कुछ पुरुषों द्वारा उसे रोका जा रहा है| लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि जो लक्ष्य हमने निर्धारित किये हैं उन्हें हम जरुर पूरा करेंगे|   

(मधुबाला शर्मा राजस्थान में इब्तिदा संस्था में काम करती है । दिसंबर 2019 में उन्होंने अलवर में ‘हम और हमारी सरकार’ कोर्स में हिस्सा लिया था।यहाँ लिखे गए सारे विचार केवल लेखक के हैं और किसी भी तरह से लेखक की संस्था या अकॉउंटबिलिटी इनिशिएटिव के विचारों को व्यक्त नहीं करते हैं।)