‘अपने प्रयास जारी रखें’

मेरा नाम सुभाष चंद है और मैं अलवर जिला के केसरोली गाँव का रहने वाला हूँ| शिक्षा की अगर बात करूँ तो मैंने हिंदी विषय में एम्. ए., बी. एड. किया है| मैंने 9 वर्षों तक स्कूलों में 12वीं तक हिंदी पढ़ाने का काम किया है| वर्ष 2017 को मुझे इब्तिदा संस्था में काम करने का मौका मिला| इब्तिदा एक अलाभकारी, गैरसरकारी विकासोन्मुख संस्था है जो महिलाओं एवं अन्य समुदाओं को अपने कर्तव्यों एवं अधिकारों के प्रति जागरूक करती है|
पिछले 2 वर्षों से मैं इब्तिदा संस्था द्वारा संचालित ‘अधिकार कार्यक्रम’ में मदद कर रहा हूँ| यह कार्यक्रम 160 गाँव में संचालित है जिसमें हम मुख्य रूप से सरकार द्वारा चलाई गयी योजनाओं को लेकर काम कर रहे हैं| हम समुदाय को न केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हैं बल्कि पंचायती राज व्यवस्था के सरकारी कार्यालयों व् जिला कलेक्टर कार्यालय तक का शैक्षणिक भ्रमण करवाते हैं| हम गाँव स्तर पर एक संगठन का निर्माण करते हैं जिसे ‘ग्राम अधिकार समिति’ कहते हैं जिसमें 15-20 महिला सदस्य होते हैं और उनकी मदद को लेकर प्रत्येक गाँव स्तर पर महिलाएं एक ग्राम ‘अधिकारी सखी’ का चयन करवाते हैं| ये सभी मिलकर गाँव स्तर पर योजनाओं के पात्र सदस्यों या वंचित सदस्यों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने का प्रयास करते हैं| इसमें मुख्य रूप से सार्वजनिक मुद्दों जैसे सड़क, पानी, मनरेगा योजना, आंगनवाड़ी व् राशन वितरण आदि को लेकर भी ये साझा रूप से काम करते हैं| हम प्रत्यक्ष रूप से पिछले 2 वर्षों से पंचायत में महिलाओं की भागीदारी को लेकर काम कर रहे हैं| हम गाँव की महिलाओं की भूमिका व उनके हक और स्थानीय सरकार में आवश्यकता पर न सिर्फ प्रशिक्षण करके जानकारी प्रदान करवाते हैं बल्कि उन्हें संगठित कर संगठन के रूप में पंचायत तक पहुंचाने में मदद करते हैं|
मैं पिछले 2 वर्षों से इब्तिदा द्वारा संचालित ‘अधिकार कार्यक्रम’ के अंतर्गत रामगढ़ तहसील के 10 गाँवों में काम कर रहा हूँ| अक्तूबर 2018, में जब मैंने रामगढ़ ब्लॉक में काम करना शुरू किया था तो मेरे 10 गाँवों में से किसी भी गाँव में मनरेगा योजना के तहत काम नहीं चल रहा था| वहां पर राजिविका समूहों का 15 से 20 महिलाओं को समिति का गठन कर उसमें एक अधिकार सखी लगाकार सरकार द्वारा संचालित 10 योजनाओं को लेकर ट्रेनिंग देने का काम शुरू किया|

मनरेगा योजना के तहत निम्नलिखित आवश्यक जानकारी दी जाती है:
ग्रामीण परिवारों को भारत में लागू इस रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष में किसी भी परिवार के वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है|
मनरेगा योजना के तहत प्रत्येक परिवार के 5 सदस्यों तक का जॉब कार्ड बनने का प्रावधान है|
मनरेगा योजना के अंतर्गत आवेदक द्वारा 6 नंबर फार्म भरना आवश्यक होता है, यह आवेदक के लिए काम मांगने का फॉर्म होता है जिसके एवज में पंचायत सचिव से रसीद लेना जरुरी होता है|
आवेदन करने के लिए आवेदक को अपनी पंचायत तथा अटल सेवा केन्द्रों पर जाना होता होता है| आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर जॉब कार्ड बनाने का नियम है|
काम मिलने के बाद आवेदक को अपनी हाजिरी रोज जॉब कार्ड में डलवानी चाहिए तथा 15-20 दिन बाद पेमेंट के लिए अपनी बैंक की पासबुक में एंट्री जरुर करवानी चाहिए|
इस योजना में जिन लोगों के पास जॉब कार्ड हैं उन्हें मनरेगा योजना के तहत 100 दिनों तक गारंटी रोजगार देना शामिल होता है|
अगर उनके 100 दिन पूरे हो गए हैं तो उसके बाद जॉब कार्ड धारक खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़ा सकते हैं| अगर ऐसे में किसी को राशन नहीं मिलता है तो खाद्य सुरक्षा फ़ार्म अटल सेवा केंद्र या फिर ई-मित्र पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं|
मान लीजिये यदि किसी जॉब कार्ड धारक को 90 दिनों तक रोजगार नहीं मिलता है तो ऐसे में वह बेरोजगारी भत्ते के लिए पात्र हैं| यानी फिर सरकार द्वारा उस व्यक्ति को बेरोजगार माना जायेगा और उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा|
अगर किसी व्यक्ति को 15 दिनों में अपना मजदूरी वेतन नहीं मिलता है तो ऐसे में उसे क्षतिपूर्ति के तौर पर भी देने का प्रावधान है|
मनरेगा योजना से जुड़ी अगर किसी को भी कोई शिकायत हो तो नंबर संख्या 18001806427 पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं| राजस्थान संपर्क पोर्टल 181 पर संपर्क कर सकते हैं|

जॉब कार्ड हेतु जरुरी दस्तावेज
बैंक पासबुक (महिला व पुरूष दोनों की लगानी हैं)
आधार कार्ड
भामाशाह कार्ड व जन आधार कार्ड
पासपोर्ट साइज़ फोटो

रामगढ़ की पंचायत में लोगों को 7 सालों से मनरेगा योजना के तहत काम नहीं मिल पा रहा था| हमने लोगों को साथ ले जाकर सरपंच से इसके बारे में बात की| सरपंच ने कहा की जब काम के लिए कोई जगह ही नहीं है तो हम काम कहाँ से देंगे| ऐसा ही पंचायत सचिव तथा ग्राम रोजगार सेवक ने भी हमें जवाब दिया| जब हमने 6 नंबर फॉर्म भरने की बात की तब पंचायत सचिव ने कहा की जब काम ही नहीं है तो ऐसे में 6 नंबर फॉर्म भी नहीं भरा जायेगा|
इसके बाद हम बीडीओ सर के पास गाँव के महिलाओं को लेकर गए और पूरी बात बताई| बीडीओ सर ने काम मांगने वाले सभी लोगों के 6 नंबर फॉर्म भरकर एक कागज पर सभी के नाम लिखकर नीचे हस्ताक्षर कर दिए तथा सभी को काम देने का आश्वासन दिया| अगले 15 दिन के अंदर सभी लोगों को पंचायत द्वारा काम दिया गया|
इसके बाद अधिकारी सखियों ने लोगों के नए जॉब कार्ड बनवाने शुरू किये व पंचायत में 6 नम्बर फार्म भरवाकर रसीद भी ली जाने लगी| बदलाव के तौर पर देखें तो आज रामगढ़ के 10 गाँवों में लगातार काम चल रहा है| आज लोग खुद जाकर काम मांगते हैं जिससे वित्तीय वर्ष 2019-20 में 757 लोगों ने काम किया जिसमें से 400 से 500 लोगों ने रोजगार के तौर पर अपने 100 दिन पूरे किये| आज लोगों की पंचायत में भागीदारी बढ़ रही है जिसमें लोगों ने अपने हक़ जैसे राशन, श्रमिक कार्ड के फायदे, पालनहार, छात्रवृति, आंगनवाड़ी से लाभ लेने शुरू कर दिए हैं|